राजस्थान: झालावाड़ में स्कूल ढहने से 6 मासूमों की मौत 29 से ज्यादा घायल-भयावह मंजर का पूरा हाल

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राजस्थान: झालावाड़ में सरकारी स्कूल की इमारत ढहने से 6 बच्चों की मौत, 29 से ज्यादा घायल। हादसे के बाद हाहाकार, पूरी घटना की विस्तार से जानकारी यहां पढ़ें।

राजस्थान: काल्पनिक तस्वीर

राजस्थान के झालावाड़ में दर्दनाक हादसा: सरकारी स्कूल की छत ढही, 6 मासूमों की मौत, 29 से अधिक घायल

प्रार्थना के दौरान मचा कोहराम, मलबे में दबे मासूमों की चीखें

शुक्रवार की सुबह राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव में एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया। सरकारी स्कूल के प्रांगण में रोज़ की तरह सुबह की प्रार्थना सभा चल रही थी। सैकड़ों मासूम बच्चे कतारों में खड़े होकर राष्ट्रगान  गा रहे थे। तभी अचानक पुरानी और जर्जर हो चुकी सरकारी स्कूल के बिल्डिंग की छत जोरदार आवाज के साथ भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरा परिसर मलबे के ढेर में तब्दील हो गया, और बच्चे, शिक्षक सब अफरातफरी में इधर-उधर भागने लगे। चीख-पुकार और मदद की पुकारों से पूरा माहौल गूंज उठा।

मलबे के नीचे दबे मासूमों को निकालने की जद्दोजहद शुरू हुई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। छह मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 29 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया। कई घायल अब भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग, पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया।

छह मासूमों की मौत, 29 से ज्यादा गंभीर घायल

इस हादसे में अब तक छह बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 29 से अधिक छात्र गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। घायलों को पहले पिपलोदी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार दिया गया और बाद में हालत गंभीर होने पर झालावाड़ जिला अस्पताल रेफर किया गया।
घटना के समय स्कूल परिसर में करीब 60 से अधिक बच्चे मौजूद थे। प्रशासन को आशंका है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कुछ बच्चे अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है।

राहत-बचाव अभियान: जेसीबी और पुलिस की तैनाती

घटना की खबर फैलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जिला प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाकर बच्चों को बाहर निकाला गया। घायल बच्चों को एम्बुलेंस की मदद से तेजी से अस्पताल पहुँचाया गया।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य में योगदान दिया। हालांकि, हादसे के समय संसाधनों की कमी और जर्जर इमारत की स्थिति पर प्रशासन की लापरवाही को लेकर लोगों में आक्रोश भी देखा गया।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया दुख, जांच के आदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे और घायलों के बेहतर इलाज की घोषणा की है।
राज्य सरकार ने हादसे की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की है और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

जर्जर इमारत और लापरवाही बनी मौत का कारण

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सरकारी स्कूल लंबे समय से जर्जर हालत में था। छत में सीलन और दरारें होने की शिकायतें बार-बार शिक्षा विभाग को दी गईं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हाल ही में हुई बारिश से छत की हालत और खराब हो गई थी, लेकिन फिर भी बच्चों को उसी इमारत में पढ़ाया जा रहा था।
ग्रामीणों ने कहा कि यह हादसा प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण गुणवत्ता की बड़ी चूक का नतीजा है।

मासूमों की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर

हादसे के बाद पिपलोदी और आसपास के गांवों में मातम का माहौल है। जिन परिवारों के बच्चों की मौत हुई है, उनके घरों में कोहराम मचा हुआ है। मृत बच्चों के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि घायल बच्चों के परिवार अस्पतालों में बेसुध इंतजार कर रहे हैं।

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