रायबरेली में LOCKUP में युवक ने काटा गला, थानाध्यक्ष निलंबित | Manikpur Thana Suicide Attempt
रायबरेली-प्रतापगढ़ में LOCKUP में युवक ने किया गला काटने का प्रयास, थानाध्यक्ष निलंबित — पुलिस जांच में जुटी, Manikpur Thana Suicide Attempt
प्रतापगढ़ के मानिकपुर थाने में हिरासत में लिए गए 24 वर्षीय युवक शिवम सिंह ने खुद को धारदार हथियार से घायल कर लिया, जिससे थाने में अफरातफरी मच गई। खून से लथपथ युवक को आनन-फानन में रायबरेली जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया। इस घटना के बाद मानिकपुर थाने के थानाध्यक्ष दीप नारायण को निलंबित कर दिया गया है और मामले की गहन जांच सीओ कुंडा अमरनाथ को सौंपी गई है।
घटना का क्रम — हिरासत में आत्महत्या का प्रयास
पुलिस के अनुसार, शिवम सिंह को चोरी के मामले में पूछताछ के लिए मानिकपुर थाने लाया गया था। पांच दिन पहले से ही वह हिरासत में था और परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मियों द्वारा उसे प्रताड़ित किया जा रहा था।
गुरुवार को थाने के लॉकअप में बंद शिवम ने अचानक अपना गला धारदार हथियार से काट लिया। घटना की सूचना पाकर थाने में खलबली मच गई। पुलिस ने तुरंत उसे रायबरेली जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचारकर रहे हैं ।
अस्पताल में स्थिति
रायबरेली जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉ. वैभव शुक्ला ने बताया:
“युवक को पुलिस लायी है। गले पर चोट के निशान मिले हैं। प्रारंभिक उपचार किया गया और स्थिति अब स्थिर है। इसके बाद गहन जांच की जाएगी कि घायल युवक तक धारदार हथियार कैसे पहुंचा।”
प्रशासनिक कदम — निलंबन और जांच
प्रतापगढ़ पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने मामले का संज्ञान लेते हुए मानिकपुर थाने के थानाध्यक्ष दीप नारायण को निलंबित कर दिया।
साथ ही घटना की जांच सीओ कुंडा अमरनाथ को सौंपी गई है।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हथियार कैसे लॉकअप तक पहुंचा, और क्या हिरासत में किसी प्रकार की लापरवाही हुई।
परिवार और स्थानीय प्रतिक्रिया
युवक के परिजनों का कहना है कि पुलिस के पूछताछ के दौरान शिवम सिंह लगातार परेशान था।
परिवार का आरोप है कि उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। घटना ने पूरे इलाके में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।
पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया
प्रतापगढ़ पुलिस ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी साझा की है कि मामले की पूर्ण जांच की जा रही है।
रायबरेली जिला अस्पताल ने भी मामले में पुष्टि की कि युवक का प्राथमिक उपचार किया गया और उसे सुरक्षित रखा गया।
यह घटना लॉकअप सुरक्षा और पुलिस हिरासत के प्रबंधन पर कई सवाल खड़े करती है।
युवक की उम्र महज 24 साल और गंभीर परिस्थितियों में खुद को घायल करना — यह पुलिस निगरानी और मानवाधिकार की कमजोरियों को उजागर करता है।
जांच के परिणाम से स्पष्ट होगा कि हिरासत में लापरवाही हुई या युवक की मानसिक स्थिति ने इस कदम को प्रेरित किया।
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