Pilibhit: कीजिये शारदकाल इन गन्ना प्रजातियों की बुवाई, किसान भाइयो हो जाओगे मालामाल
Pilibhit: शारदकाल में रोगरोधी अगेती गन्ना किस्मों की बुवाई से किसान बढ़ा सकते हैं अपनी आमदनी
पीलीभीत, 26 अक्टूबर 2025: शरदकालीन गन्ना बुवाई के लिए किसान भाइयों के लिए खुशखबरी है। आज जिला गन्ना अधिकारी खुशी राम भार्गव ने गन्ना विकास परिषद् बीसलपुर के ग्राम भसूड़ा में स्थित आधार पौधशाला का निरीक्षण किया। यह पौधशाला बसंतकाल में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद्, शाहजहांपुर से लाई गई गन्ना किस्म कोशा 18231 से स्थापित की गई थी।
जांच के दौरान अधिकारी ने बताया कि यह किस्म जल्दी पकने वाली अगेती गन्ना किस्म है, जिसमें टिलरिंग बहुत अच्छी होती है। इसका मतलब है कि मिल योग्य स्वास्थ्य गन्ने आसानी से प्राप्त होते हैं। इसके अतिरिक्त, गन्ने की सूखी पत्तियाँ आसानी से उतर जाती हैं और यह किस्म लाल सड़न रोग व स्मट रोग के प्रति मध्यम रोगरोधी है।
शरदकालीन बुवाई में किस्म चयन बेहद महत्वपूर्ण
जिला गन्ना अधिकारी ने किसानों को चेताया कि शरदकाल में गन्ना किस्म का चयन बेहद सावधानीपूर्वक करना जरूरी है, क्योंकि गलत किस्म का चयन पूरे साल नुकसान और पछतावे का कारण बन सकता है। उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित अगेती और रोगरोधी किस्मों की बुवाई की सलाह दी:
कोशा 18231
को लख. 14201
कोशा 17231
को लख. 16202
को लख. 94184
कोशा 08272
पीलीभीत के किसान विशेष रूप से को लख. 14201 को पसंद कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि यह किस्म 10 से 11 महीने में तैयार हो जाती है, चीनी पर्ता 10.5% से 11.5% तक होती है, और इसका गन्ना लंबा, मोटा और गांठे समान दूरी पर होने के कारण उच्च पैदावार और बेहतर क्वालिटी प्रदान करता है।
रोग और जलभराव के प्रति मजबूती
इस किस्म में लाल सड़न रोग और पोक्का बोईंग का प्रकोप कम होता है। इसके अलावा, जहाँ मध्यम जलभराव होता है, वहाँ भी यह किस्म अच्छी पैदावार देती है। किसानों को बीज का चयन करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि पौधशाला में कोई कीट या रोग न हो।
सुझावित तकनीक:
8 से 10 महीने के गन्ने का केवल आधा ऊपर का हिस्सा ही बुवाई में प्रयोग करें।
बुवाई के लिए दो आँखों वाले टुकड़े ही इस्तेमाल करें।
वर्तमान में किसान भाई पौध तैयार करके खेतों में रोपाई कर रहे हैं, जिससे 15 से 20 कुं बीज प्रति हेक्टेयर बुवाई में लगते हैं।
सरकारी सहयोग और सहायता
किसान भाई गन्ना पौध गन्ना विकास परिषद्, पीलीभीत, मझोला, बरखेड़ा, पूरनपुर और बीसलपुर में सक्रिय महिला स्वयं सहायता समूहों से भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए अपने सर्किल के गन्ना पर्वेक्षक या वरिष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक से संपर्क करना होगा।
जिला प्रशासन और राज्य सरकार की मंशा साफ है: किसानों को रोगरोधी और उच्च पैदावार वाली गन्ना किस्मों के जरिए उनकी आमदनी बढ़ाना और गन्ना उद्योग को मजबूती देना। यही कारण है कि इस पौधशाला का सत्यापन और किसानों को किस्मों की जानकारी प्रदान की जा रही है।
किसान भाइयों के लिए प्रमुख संदेश
सही किस्म का चयन आपकी फसल की सफलता और आमदनी का आधार है।
गन्ना किस्म कोशा 18231 और को लख. 14201 जैसे अगेती और रोगरोधी किस्मों की बुवाई से बेहतर पैदावार और कम जोखिम।
सरकारी पौधशालाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों से बीज प्राप्त कर सुरक्षित और स्वस्थ बुवाई सुनिश्चित करें।
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