Pilibhit: प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक पोस्ट, कॉलेज का बाबू का सस्पेंड होना तय
Pilibhit:प्रधानमंत्री पर आपत्तिजनक पोस्ट डालते ही कॉलेज का बाबू सस्पेंड होना तय , सोशल मीडिया पर गरमाई सियासत
पीलीभीत जिले से सनसनीखेज खबर सामने आई है। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट डालना एक कॉलेज के बाबू को भारी पड़ गया। अमरिया स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के वरिष्ठ सहायक विजय कुमार पर कार्रवाई करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित के लिए उच्चाधिकारियों को संस्तुति भेज दी है । यह मामला न केवल शिक्षा विभाग में हलचल मचा रहा है बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का केंद्र बन गया है।
Pilibhit: सोशल मीडिया पर पीएम के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट
मामले की शुरुआत तब हुई जब विजय कुमार ने अपने फेसबुक/सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी और तस्वीर पोस्ट कर दी। यह पोस्ट देखते ही वायरल हो गया। आरोप है कि इस पोस्ट ने शिक्षक-सेवा की गरिमा को धूमिल किया और विभाग की छवि पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
Pilibhit: शिकायत और संज्ञान, प्रधानाचार्य ने भेजा पत्र
राजकीय इंटर कॉलेज अमरिया के प्रधानाचार्य ने इस पूरे प्रकरण की जानकारी लिखित रूप से जिला विद्यालय निरीक्षक को दी।
शिकायत में साफ कहा गया कि बाबू विजय कुमार ने आचार-संहिता और सरकारी सेवाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। इसके बाद DIOS राजीव कुमार ने तत्काल संज्ञान लिया और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
Pilibhit:सुनवाई और जवाब में नाकामी
इस मामले में विजय कुमार को विभागीय स्तर पर सुनवाई का अवसर भी दिया गया।
18 अगस्त को आयोजित बैठक में उनसे आरोपों पर स्पष्टीकरण मांगा गया। मगर, हैरानी की बात यह रही कि बाबू विजय कुमार संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। यही चूक उनके लिए सबसे बड़ा सबूत बन गई।
कार्रवाई: तत्काल निलंबन और जांच
DIOS राजीव कुमार ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए विजय कुमार को तत्काल निलंबन के लिए उच्चाधिकारियों को संस्तुति भेज दी है। साथ ही विभागीय जांच बैठाने के भी आदेश जारी कर दिए गए हैं। अब यह जांच तय करेगी कि बाबू के खिलाफ आगे कौन-कौन सी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Pilibhit: विवाद और सवाल
इस घटना के बाद जिले में कई तरह की चर्चाएँ गर्म हैं—
क्या एक सरकारी कर्मचारी को सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी करनी चाहिए?
क्या सरकारी सेवा में रहते हुए राजनीतिक या आपत्तिजनक पोस्ट डालना कदाचार की श्रेणी में आता है?
क्या अब शिक्षा विभाग सख्ती से सोशल मीडिया की निगरानी करेगा?
जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस खबर के फैलते ही लोग बंट गए।
कुछ लोग कह रहे हैं—“सरकारी कर्मचारी को ऐसी हरकत बिल्कुल शोभा नहीं देती, कार्रवाई सही हुई।”
वहीं कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार बता रहे हैं। लेकिन सच यही है कि सरकारी सेवा में रहते हुए नियम और आचार-संहिता सर्वोपरि मानी जाती है।
पीलीभीत का यह मामला एक बड़ा सबक है। यह साफ संदेश देता है कि सोशल मीडिया पर लिखते या पोस्ट डालते वक्त सरकारी कर्मचारियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।
एक छोटी सी गलती नौकरी और करियर दोनों पर भारी पड़ सकती है।
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