पीलीभीत में लाश पर इलाज का नाटक, परिजनों से ठगे 3 लाख
पीलीभीत में लाश पर इलाज का नाटक, निजी अस्पताल में इलाज के नाम पर 3 दिन तक मृत युवक का झूठा इलाज, परिजनों से 3 लाख रुपये ठग लिए गए। परिजनों के हंगामे के बाद डॉक्टर और स्टाफ फरार। पढ़िए पूरा मामला।
तीन दिन तक ‘मृतक’ का इलाज! पीलीभीत के निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने की हैवानियत की हदें पार – तीन लाख ऐंठे, युवक की पहले ही हो चुकी थी मौत
गंभीर एक्सीडेंट के बाद मौत को छुपाकर इलाज का ड्रामा, परिजनों से तीन लाख वसूले — सच्चाई खुलते ही अस्पताल खाली
अजय देव वर्मा- रॉकेट पोस्ट लाइव | पीलीभीत
पीलीभीत में लाश पर इलाज का नाटक: हादसे के बाद अस्पताल पहुंचा युवक, मौत के बाद भी इलाज का ढोंग
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से एक ऐसा शर्मनाक मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को तार-तार कर दिया। सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के गौहनिया रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थित एक निजी अस्पताल पर आरोप है कि उसने एक मृत युवक के शव का तीन दिन तक इलाज का नाटक रचाया और परिजनों से लाखों रुपये ठग लिए।
बीस वर्षीय विष्णु, निवासी चाट फिरोजपुर, शनिवार को अपनी पत्नी नीलम और एक अन्य परिजन के साथ बाइक से ससुराल जा रहा था। रास्ते में गौवंश से टकराकर उसकी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के तुरंत बाद परिजन उसे उसी निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे, जहां से यह दिल दहला देने वाली लूट और धोखाधड़ी की शुरुआत हुई।

पीलीभीत में लाश पर इलाज का नाटक: हॉस्पिटल ने मांगे पहले 50 हजार, फिर ऑपरेशन के नाम पर एक लाख — इलाज का ‘नाटक’ शुरू
युवक के भाई राजेंद्र के अनुसार, अस्पताल में दाखिल करने के तुरंत बाद डॉक्टरों ने पहले 50 हजार रुपये जमा कराए। इसके बाद ऑपरेशन का हवाला देकर एक लाख रुपये और वसूल लिए। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर न तो उन्हें मरीज से मिलने दे रहे थे, न ही किसी तरह की मेडिकल रिपोर्ट दिखा रहे थे। केवल दूर से इशारे में कह देते कि मरीज को दवा दी जा रही है, ऑपरेशन हो रहा है।
मौत हो चुकी थी, लेकिन तीन दिन तक जारी रखा इलाज का झांसा
तीन दिन तक परिजनों को अंधेरे में रखा गया। जब मंगलवार को परिजनों ने जबरन मरीज को देखने की कोशिश की, तब उनकी दुनिया उजड़ गई — विष्णु की मौत पहले ही दिन हो चुकी थी। लेकिन तीन दिन तक न केवल इलाज का नाटक किया गया, बल्कि लगातार दवाएं भेजने और पैसे वसूलने का सिलसिला भी जारी रहा।
राजेंद्र ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने सच्चाई खुलने के बाद भी शर्मिंदगी नहीं दिखाई, बल्कि विष्णु को बरेली रेफर करने की तैयारी शुरू कर दी। एंबुलेंस तक बुला ली गई थी, जिससे साफ जाहिर है कि यह कोई लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ किया गया मेडिकल फ्रॉड था।
हंगामा होते ही डॉक्टर और स्टाफ भाग निकले, पुलिस जांच में जुटी
जैसे ही परिजनों ने सच्चाई का खुलासा किया और अस्पताल में हंगामा शुरू किया, पूरा अस्पताल जैसे खाली हो गया। डॉक्टर और पूरा स्टाफ मौके से फरार हो गया। सूचना मिलने पर सुनगढ़ी थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है।
पीलीभीत में लाश पर इलाज का नाटक: CMO बोले – लिखित शिकायत नहीं, लेकिन सोशल मीडिया से लिया संज्ञान
पीलीभीत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आलोक कुमार ने कहा है कि अभी तक उन्हें इस मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों को देखकर उन्होंने स्वयं संज्ञान ले लिया है। यदि जांच में मामला सही पाया गया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों की मांग – लूट और धोखाधड़ी करने वाले डॉक्टरों पर दर्ज हो हत्या का मुकदमा
विष्णु के परिवार ने इस बेहद संगीन और अमानवीय धोखाधड़ी को लेकर प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल के संचालक और डॉक्टरों पर धारा 302 (हत्या) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। परिजनों का कहना है कि जिस तरह से मौत को छुपाकर इलाज का नाटक किया गया, वह एक किस्म की हत्या ही है।
यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज की आंखें खोलने वाला है
पीलीभीत जैसे जिले में जहां मेडिकल संसाधन पहले ही सीमित हैं, वहां इस तरह की घटनाएं गरीबों और मध्यमवर्गीय लोगों की जान के साथ खिलवाड़ हैं।
यह घटना साफ दर्शाती है कि कुछ निजी अस्पताल अब इलाज नहीं, लूट का अड्डा बन चुके हैं।
समय आ गया है कि जनता अब इस तरह की मेडिकल माफियागिरी के खिलाफ खड़ी हो, और हर ठगी पर मुकदमा दर्ज कराए।