झाँसी: हैवानियत की हद पार, स्कूटी से बांधकर कुत्ते को घसीटा, तड़प-तड़पकर मौत
झाँसी: स्कूटी से कुत्ते को बांधकर एक किलोमीटर तक घसीटा गया, जिससे उसकी दर्दनाक मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी वीडियो वायरल, आरोपी हिरासत में।
हैवानियत की पराकाष्ठा: झांसी में स्कूटी से कुत्ते को घसीटकर मार डाला, आरोपी हिरासत में!”
जिस धरती पर जानवरों को देवता समझा जाता है, वहां एक जानवर को इंसान ने रौंद डाला!”
ये सिर्फ एक खबर नहीं है, ये एक कराहती हुई आत्मा की चीख है। झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत पिछोर इलाके से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने इंसानियत पर सवाल खड़ा कर दिया है। एक व्यक्ति ने अपने स्कूटी के पीछे एक बेजुबान कुत्ते के दोनों पैर रस्सी से बांध दिए और फिर उसे लगभग एक किलोमीटर तक घसीटते हुए ले गया, जब तक कि उसकी मौत नहीं हो गई।
झाँसी: वीडियो में कैद वहशीपन – “कुत्ते की चीखें, सड़क पर लहूलुहान शरीर और बेदर्द ड्राइवर”
इस पूरी घटना का वीडियो क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। वायरल वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि स्कूटी चालक ने कुत्ते को पीछे घसीटा और उसकी दर्दभरी चीखें भी सुनाई देती रहीं। राहगीरों की नजरों के सामने ये सब होता रहा, लेकिन आरोपी बेपरवाह चलता रहा।
“कुछ ही मिनटों में खत्म हो गई एक मासूम जान, और बच गई सिर्फ लाश…”
घटना के कुछ ही मिनटों बाद कुत्ता गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह सिर्फ एक बेजुबान जानवर की मौत नहीं थी, बल्कि इंसानियत, करुणा और जीवों के प्रति सम्मान की भी मौत थी।
झाँसी: “शव का हुआ पोस्टमार्टम – इंसाफ की दिशा में पहला कदम”
घटना की जानकारी मिलते ही झांसी की समाजसेवी संस्था मिनी खरे के नेतृत्व में इस अमानवीयता का विरोध किया गया और नवाबाद थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। साथ ही कुत्ते के शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग भी की गई।
थाना प्रभारी संतोष कुमार अवस्थी ने मीडिया को बताया कि तहरीर मिलने के बाद कुत्ते का पोस्टमार्टम कराया गया है और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। उसके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।
“पोस्टमार्टम रिपोर्ट जल्द, आरोपी पर लगेगा पशु क्रूरता अधिनियम”
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर सत्येंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि उन्हें थाने से शव लाने की सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी की है। जल्द ही रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी जाएगी, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम सहित गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया जा सकता है।
झाँसी: मिनी खरे, समाजसेवी ने कहा
“यह घटना सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि हमारे समाज की संवेदनशीलता की हार है। ऐसे लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए, ताकि जानवरों को भी इंसानों की तरह जीने का हक मिल सके।”
झाँसी: कब बदलेगा समाज? कब जानवरों को मिलेंगे उनके जीने के अधिकार?
भारत में हर साल हज़ारों बेजुबान जानवर इंसानी क्रूरता का शिकार होते हैं। इस तरह की घटनाएं दर्शाती हैं कि सिर्फ कानून बनाना काफी नहीं, संवेदना जगाना ज़रूरी है। क्या हम इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि एक मासूम की चीख भी हमें नहीं रोक सकती?
मध्य प्रदेश: आवारा कुत्तों को ज़िंदा जलाया गया
भोपाल में एक निर्माण स्थल पर कुछ लोगों ने दर्जनों कुत्तों को पकड़कर एक जगह बंद किया और फिर पेट्रोल छिड़क कर उन्हें ज़िंदा आग के हवाले कर दिया।
वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, लेकिन तब तक कई कुत्ते जलकर मर चुके थे।
उत्तर प्रदेश (गाज़ीपुर): बैल को रस्सी से बांधकर खंभे से पीटा गया
गाज़ीपुर में एक किसान द्वारा एक बैल को बिजली के खंभे से बांधकर डंडों से बेरहमी से पीटा गया। वजह सिर्फ इतनी थी कि बैल ने हल चलाते समय थक कर बैठने की कोशिश की थी।
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।
दिल्ली: एक युवक ने बिल्डिंग से फेंककर कुत्ते को मार डाला
दिल्ली के एक पॉश इलाके में एक व्यक्ति ने पालतू कुत्ते को तीसरी मंजिल से फेंक दिया। कुत्ते की मौके पर मौत हो गई।
पूरे इलाके में रोष फैल गया और पशु अधिकार संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया।
तमिलनाडु: कुत्ते को बाइक से बांधकर घसीटा गया
झांसी जैसी ही एक हूबहू घटना तमिलनाडु में भी सामने आई थी, जहां एक व्यक्ति ने कुत्ते को अपनी बाइक से बांधकर करीब दो किलोमीटर तक घसीटा।
कुत्ते की हालत नाजुक हो गई और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। आरोपी के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ।
हरियाणा: सूअर के बच्चों को कुल्हाड़ी से काटा गया
फतेहाबाद जिले में कुछ ग्रामीणों द्वारा सूअर के बच्चों को पकड़कर खुलेआम कुल्हाड़ी से काटने और फिर जलाने की घटना सामने आई। वीडियो वायरल हुआ, लेकिन दोषियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
बार-बार दोहराई जा रही हैं ये घटनाएं, लेकिन सजा क्यों नहीं होती?
इन सब घटनाओं से एक बात साफ है – पशु क्रूरता को लेकर हमारी न्यायिक और सामाजिक व्यवस्था बेहद कमजोर है। चाहे वह एक हथिनी हो, एक आवारा कुत्ता हो, या पालतू जानवर — किसी को इंसाफ नहीं मिल रहा।
कानून हैं, लेकिन उनका पालन नहीं होता। न अभियुक्तों को सज़ा मिलती है, न समाज में डर पैदा होता है।
क्या कहते हैं भारतीय कानून?
भारत में “पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960” है, लेकिन इसकी सज़ा इतनी मामूली है कि अपराधी बच निकलते हैं। अधिकतर मामलों में 50 रुपये से 500 रुपये तक का जुर्माना या सिर्फ चेतावनी मिलती है।
अब समय है – कानून को धार देने और समाज को झकझोरने का
झांसी की घटना, केरल की हथिनी, तमिलनाडु के कुत्ते और गाज़ीपुर के बैल — ये सब हमें एक ही बात बताते हैं —
अगर हम अब भी नहीं जागे, तो “इंसानियत” खुद एक लुप्त प्रजाति बन जाएगी।
जनता से अपील:
अगर आपके आसपास कोई पशु पर अत्याचार करता दिखे, तुरंत वीडियो बनाएं।
पुलिस और PETA या Blue Cross जैसे संगठनों को जानकारी दें।
सोशल मीडिया के माध्यम से जनदबाव बनाएं।
बच्चों को बचपन से सिखाएं – “बेजुबान भी जीव हैं, सिर्फ कमज़ोर नहीं।”