Pilibhit: कोर्ट परिसर में खूनी की जंग — अधिवक्ता पर हमला, न्याय के मंदिर में सनसनी
Pilibhit: कोर्ट परिसर में खूनी जंग — अधिवक्ता पर धारदार हथियार से हमला, न्याय के मंदिर में सनसनी
कानून के मंदिर में खून खराबा!
जहाँ इंसाफ की दलीलें दी जाती हैं, वहीं आज खून की बूंदें गिरीं।
पीलीभीत जिला न्यायालय परिसर में उस वक्त अफरातफरी मच गई जब अधिवक्ता ओमपाल वर्मा पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला कर दिया गया।
कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई — यह नजारा किसी अपराध स्थल का नहीं, बल्कि न्याय के मंदिर का था।
हमले में वकील गंभीर रूप से घायल हुए हैं, और पूरे अधिवक्ता समाज में आक्रोश है।
घटना का विवरण — तारीख लेने आए थे, पर तारीख बन गई यादगार
जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता ओमपाल वर्मा, निवासी बरखंडी गांव (जनपद पीलीभीत),
आज एक पुराने हत्या के मुकदमे की तारीख लेने के लिए कोर्ट पहुंचे थे।
लेकिन जैसे ही वे न्यायालय परिसर में दाखिल हुए, तभी उसी मुकदमे के वादी पक्ष से जुड़े दो व्यक्तियों —
बृजनंदन और सुरेंद्र — ने उन्हें निशाना बनाते हुए अचानक धारदार हथियार से हमला कर दिया।
हमला इतना तेज़ और अचानक था कि आसपास मौजूद अधिवक्ता और कर्मचारी कुछ पल के लिए सन्न रह गए।
हमलावर वारदात के बाद मौके से फरार हो गए,
जबकि घायल ओमपाल वर्मा को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया,
जहाँ डॉक्टरों की टीम ने उन्हें गंभीर हालत में उपचार हेतु भर्ती कर लिया है।
अधिवक्ता संघ का आक्रोश — सुरक्षा पर उठे सवाल
न्यायालय परिसर में हुई इस वारदात के बाद अधिवक्ताओं में गहरा आक्रोश है।
वकील संघ ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि
“अगर वकील ही अदालत में सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी कहाँ जाएगा?”
संघ ने जिला प्रशासन और पुलिस से न्यायालय परिषद में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है,
ताकि इस तरह की घटनाएँ दोबारा न हों।
अधिवक्ता राजीव अवस्थी ने बताया
“हमारे साथी अधिवक्ता ओमपाल वर्मा पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया है।
वे गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है।
हम सभी अधिवक्ता साथी इस कृत्य की निंदा करते हैं और चाहते हैं कि न्यायालय परिसर की सुरक्षा को तत्काल मजबूत किया जाए।”
पुलिस ने की तत्काल कार्रवाई — दो आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने फौरन मोर्चा संभाला।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक यादव ने बताया कि
“अधिवक्ता पर हुए हमले के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
एक आरोपी फरार है, उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है।
हम न्यायालय परिसर की सुरक्षा को और सुदृढ़ कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना न दोहराई जाए।”
पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने अधिवक्ता समाज को कुछ राहत दी है,
लेकिन घटना ने इस सवाल को जरूर जन्म दिया है कि
क्या न्याय के गलियारों में भी अब सुरक्षा कवच की जरूरत पड़ने लगी है?
न्याय के मंदिर में हमला — समाज के लिए खतरे की घंटी
यह सिर्फ एक वकील पर हमला नहीं, बल्कि न्याय प्रणाली के आत्मविश्वास पर हमला है।
अगर अदालत जैसी सुरक्षित जगहों में धारदार हथियार पहुँच सकते हैं,
तो यह प्रशासन और समाज दोनों के लिए चेतावनी है कि
सुरक्षा और अनुशासन की परिधि अब और मज़बूत की जानी चाहिए।
अधिवक्ता ओमपाल वर्मा के लिए न्याय की लड़ाई अब दोहरी हो गई है —
एक अपने पुराने मुकदमे की, और दूसरी अपनी खुद की जान बचाने की।