पेड़ की डाल पर दर्दनाक मंजर, मादा तेंदुआ की मौत
मादा तेंदुआ की दर्दनाक मौत, शामली के जंगल में पेड़ पर उल्टा लटका मिला मादा तेंदुआ, हाई टेंशन लाइन की चपेट में आकर दर्दनाक मौत।
पेड़ की डाल पर दर्दनाक मंजर, जंगल की छांव में दर्दनाक मंजर
उत्तर प्रदेश के शामली जनपद से वन्यजीव प्रेमियों के लिए दिल तोड़ने वाली खबर सामने आई है। कांधला थाना क्षेत्र के एलम कस्बे के पास एक पेड़ पर एक मादा तेंदुआ का शव उल्टा लटका मिला। ग्रामीणों ने जब पहली बार उस मंजर को देखा, तो कुछ देर तक विश्वास नहीं कर सके। पीपल के उस विशाल पेड़ की ऊपरी शाखाओं में उल्टा लटका हुआ तेंदुआ मानो दर्द और बेबसी की आखिरी तस्वीर बन गया हो।
हाई टेंशन तार बना मौत का जाल
जानकारी के मुताबिक, यह मादा तेंदुआ जंगल के पास स्थित खेतों से गुजरते हुए एक पीपल के पेड़ पर चढ़ने लगी थी। लेकिन उसी पेड़ से होकर एक हाई टेंशन लाइन गुजर रही थी। तेंदुआ जैसे ही पेड़ की ऊँचाई पर पहुंचा, उसका शरीर सीधे करंट की चपेट में आ गया और कुछ ही सेकंड में उसकी मौत हो गई। विद्युत संपर्क की तीव्रता इतनी भयानक थी कि शरीर पेड़ पर ही उलझकर वहीं अटक गया।
पेड़ की डाल पर दर्दनाक मंजर, ग्रामीणों की आंखों में उतर आया सन्नाटा
सुबह-सुबह जैसे ही ग्रामीणों की नजर इस मंजर पर पड़ी, गांव में हड़कंप मच गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई दौड़कर मौके पर पहुंचा। लोग घंटों तक उस दृश्य को देखकर सकते में रहे। पेड़ पर उल्टा लटका जानवर – जो कल तक इस जंगल की शान था – आज निर्जीव अवस्था में अपनी असहाय मौत की कहानी सुना रहा था।
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पुलिस और वन विभाग को दी गई सूचना
मौके पर स्थानीय पुलिस ने पहुंचकर क्षेत्रीय वन विभाग को तुरंत सूचना दी। कुछ ही देर में वन कर्मी मौके पर पहुंचे और क्रेन की मदद से शव को पेड़ से नीचे उतारा गया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया ताकि मौत के कारणों की पूरी पुष्टि की जा सके।
पेड़ की डाल पर दर्दनाक मंजर, क्या थी लापरवाही?
वन्यजीव प्रेमियों ने सवाल उठाया है कि जंगलों के बीचोंबीच इस तरह की हाई वोल्टेज लाइनों को लेकर सुरक्षा मानकों का क्या हुआ? वन विभाग को चाहिए था कि पेड़ों के नजदीक से गुजरने वाली लाइनें इंसुलेटेड हों, जिससे ऐसे हादसों को टाला जा सके।
जनता की मांग: हो उचित मुआवजा व संरक्षण
स्थानीय लोगों और वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने शासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में तेंदुओं व अन्य जानवरों की सुरक्षा के लिए उचित प्रबंध किए जाएं। यह घटना सिर्फ एक जानवर की मौत नहीं, बल्कि मानव लापरवाही से बेजुबानों की जान गंवाने का उदाहरण है।
पेड़ की डाल पर दर्दनाक मंजर, शामली की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, चेतावनी है – जंगल की चुप्पी को न सुनना, उसकी रक्षा न करना एक दिन हमें खुद पर भारी पड़ सकता है। यह मौत उस तेंदुए की नहीं, हमारी चेतना की है।
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