Navratri Special 2023 – जानिए “मां कात्यायनी” की “पूजा” से किस “फल” की होती है प्राप्ति – कैसा है भव्य “स्वरूप”

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UP Desk – भक्तों और देवी सज्जनों जैसा की हम सब जानते है कि वर्तमान में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व का हर एक दिन मां आदि शक्ति दुर्गा मा के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन करने का सौभाग्य मिल रहा है। आज छठा दिन है और माता रानी कात्यायनी देवी की पूजा अर्चना की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं माता रानी के इस स्वरूप की आराधना करने से किस फल की प्राप्ति होती है और क्या आप यह भी जानते हैं कि माँ दुर्गा के इस स्वरूप को कात्यायनी देवी का नाम क्यों दिया गया। अगर नहीं जानते हैं तो आज हम आपको यह बताने जा रहे हैं, तो बने रहिए हमारे साथ। 
 
मिलती है फल की प्राप्ति  
 
नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। 
 
इस तरह पड़ा मां का नाम कात्यायनी देवी 
 
आपको बताते चलें कि कात्य गोत्र में विश्व प्रसिद्ध महर्षि कात्यायन ने भगवती पराम्बा की उपासना की घोर और कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि उन्हें पुत्री की प्राप्त हो। मां भगवती ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसलिए यह देवी कात्यायनी कहलाईं। उनके गुण शोध कार्य है। इसलिए इस वैज्ञानिक युग में कात्यायनी का महत्व सर्वाधिक हो जाता है। इनकी कृपा से ही सारे कार्य पूरे हो जाते हैं। ये वैद्यनाथ नामक स्थान पर प्रकट होकर पूजी गईं। मां कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी हैं।
गोपियों ने की थी पूजा जानिए मां का भव्य स्वरूप
भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने मां कात्यायनी देवी की पूजा की थी। यह पूजा कालिंदी यमुना के तट पर की गई थी। इसलिए ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी प्रतिष्ठित हैं। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। ये स्वर्ण के समान चमकीली हैं और भास्वर हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं। इसलिए कहा जाता है कि इस देवी की उपासना करने से परम पद की प्राप्ति होती है।
 
           “जय मां कात्यायनी” 

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