कानून पर लानत! नेता ने युवक से सड़क पर नाक रगड़वाई, सत्ता के रंग में घुली Police तमाशा देखती रही।
“सत्ता का नशा इतना चढ़ा कि इंसानियत शर्म से झुक गई, और Police… वर्दी पहनकर मौन खड़ी रही।”
उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक मामूली पार्किंग विवाद ने इंसानियत की हदें पार कर दीं। जानकारी के अनुसार, शहर के पॉश इलाके में दो गाड़ियों के बीच पार्किंग को लेकर कहासुनी हुई, जो कुछ ही मिनटों में हाथापाई और अपमान में बदल गई। बताया जा रहा है कि भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष विकुल चपराणा, जो राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर के करीबी माने जाते हैं, ने अपनी दबंगई दिखाते हुए सड़क पर ही एक युवक से नाक रगड़वाने, माफी मंगवाने और गालियाँ देने जैसी शर्मनाक हरकतें कीं। ये पूरा वाकया वहीं मौजूद पुलिसकर्मियों के सामने हुआ, जो किसी पत्थर की मूर्ति की तरह खड़े तमाशा देखते रहे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जैसे ही वायरल हुआ, वैसे ही पूरे मेरठ में राजनीतिक भूचाल आ गया। पुलिस ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए आरोपी विकुल चपराणा को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन जनता का सवाल अब भी वही है — अगर वीडियो वायरल न होता, तो क्या कानून यूँ ही सोया रहता?, आइये बिस्तर से जानते है इस शर्मशार घटना के बारे में
मेरठ का वायरल वीडियो — लोकतंत्र की लाज पर लात
मेरठ में एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ जिसने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया।
दीपावली के बाद के दिनों में जब लोग अभी भी खुशियों में डूबे थे, उसी वक़्त मेरठ की सड़कों पर इंसानियत को घसीटा जा रहा था।
भाजपा किसान मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष विकुल चपराणा — वही नाम जो अब जनता के गुस्से का प्रतीक बन चुका है।
उसने एक युवक से सिर्फ़ पार्किंग विवाद के चलते सड़क पर नाक रगड़वाई, गालियाँ दीं, धमकियाँ दीं, और यह सब कुछ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुआ।
हाँ, वर्दी वाले वहीं थे — लेकिन मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे थे!
Police के सामने चली गुंडई — कानून का मज़ाक
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे शर्मनाक बात ये नहीं थी कि एक नेता ने गुंडागर्दी की —
बल्कि ये थी कि पुलिस वहीं खड़ी होकर मौन थी!
मेरठ मेडिकल पुलिस की जीप कुछ ही दूर थी, लेकिन कोई रोकने नहीं आया।
युवक नेता के डर से कांप रहा था, पर नेता की आवाज़ में सत्ता का दंभ था —
“नाक रगड़ो… माफ़ी मांगो!”
और पुलिस उस सत्ता के रंग में घुली हुई… तमाशा देखती रही।
अब जब वीडियो वायरल हुआ — तब हुई गिरफ्तारी!
सोशल मीडिया पर वीडियो ने आग की तरह फैलते ही, पुलिस की नींद टूटी।
एसपी सिटी आयुष विक्रम ने बयान जारी किया कि “सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, मुख्य आरोपी विकुल चपराणा को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।”
लेकिन सवाल यहाँ है —
क्या गिरफ्तारी तब होती अगर वीडियो वायरल न होता?
क्या कानून की जाग सिर्फ़ सोशल मीडिया की वायरलिटी पर निर्भर है?
कानून अगर जनता के कैमरे से चलता है तो वर्दी का अस्तित्व आखिर किसके लिए है?
राजनीति की गंध — मंत्री के करीब बताया जा रहा आरोपी
सूत्रों के अनुसार, आरोपी विकुल चपराणा राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का करीबी बताया जा रहा है।
और यही नजदीकी शायद उसे इतना बेलगाम बना गई कि वो सड़क को कोर्ट समझ बैठा और खुद जज बन गया।
राजनीति का ये चेहरा बताता है कि जब सत्ता के साये में अपराधी पनपते हैं, तब कानून की रीढ़ टूट जाती है।
एआईएमआईएम नेता शादाब चौहान का पलटवार — “मंत्री माफी मांगे”
एआईएमआईएम नेता शादाब चौहान ने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी —
उन्होंने कहा,
“ये बेहद शर्मनाक है कि पुलिस वहीं खड़ी तमाशा देख रही थी।
अगर कोई आम आदमी ये करता, तो उसे मौके पर पीटकर जेल में डाल दिया जाता।
लेकिन जब सत्ता का आदमी करता है, तो पुलिस उसे सलाम करती है।
मंत्री सोमेंद्र तोमर को जनता से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उनके नाम पर गुंडागर्दी की गई।”
शादाब चौहान ने सवाल उठाया —
क्या योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी सिर्फ़ गरीबों और आम जनता के लिए है?
क्या कानून का डर अब नेताओं पर लागू नहीं होता?
“ब्रांड” बनने की चाह में बिगड़े हालात
यह भी सच है कि आज सोशल मीडिया पर “दबंग छवि” बनाना एक नया चलन बन गया है।
विकुल चपराणा जैसे लोग शायद इसी नशे में थे —
पुलिस की मौजूदगी में किसी को नीचा दिखाकर “ब्रांड” बनने की कोशिश।
लेकिन सवाल यह है —
अगर ऐसी हरकतें ही “ब्रांड” बन गईं,
तो यूपी पुलिस किस “मॉडल स्टेट” का सपना दिखा रही है?
पुलिस के लिए सवाल — वर्दी शर्म से झुकी क्यों नहीं?
इस घटना ने सिर्फ़ मेरठ को नहीं, पूरे यूपी की पुलिस व्यवस्था को आईना दिखाया है।
वर्दी का मतलब सुरक्षा है, डर नहीं।
लेकिन जब अपराधी के आगे पुलिस खामोश हो जाती है,
तो जनता का भरोसा टूट जाता है।
अगर यही ‘जीरो टॉलरेंस’ है,
तो फिर ‘कानून का राज’ सिर्फ़ भाषणों में ही बचा है।
जनता का दर्द — “हमारे लिए न्याय सिर्फ़ कैमरे में बचा है”
वीडियो में युवक की हालत देख देश का हर जागरूक नागरिक यही सोचने पर मजबूर है —
क्या यूपी में अब न्याय सिर्फ़ वायरल वीडियो से मिलेगा?
क्या पुलिस तभी हरकत में आएगी जब सोशल मीडिया उन्हें जगाएगा?
अगर वर्दी का रंग सत्ता की पहचान बन जाए,
तो जनता अपने अधिकार किससे मांगे?
लेखक की बात
रॉकेट पोस्ट लाइव की नज़र में ये सिर्फ़ एक घटना नहीं —
ये प्रशासनिक चरित्र की सच्ची पोल है।
एक युवक से गलती हुई होगी, पर जो गुंडागर्दी हुई — वो अपराध से भी बड़ा अपराध था।
पुलिस की यह चुप्पी जनता के भरोसे पर सबसे बड़ा तमाचा है।
विकुल चपराणा भले गिरफ्तार हो गया हो,
पर असली सजा तो उन पुलिसकर्मियों को मिलनी चाहिए जो वर्दी में खड़े होकर तमाशा देखते रहे।