Mahoba:करवाचौथ पर मां ने बेटे संग खाया ज़हर, जानिए पूरी घटना

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Mahoba:करवाचौथ पर मां ने बेटे संग खाया ज़हर, जानिए पूरी घटना

Mahoba: करवाचौथ पर मातृत्व की दर्दनाक कहानी, मां ने बेटे संग खाया जहर-अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग

महोबा/छतरपुर। जहां एक ओर पूरे देश की सुहागिनें करवाचौथ के व्रत में अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर मध्यप्रदेश की सीमा से लगे एक गांव से ऐसी खबर आई जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। 26 वर्षीय सविता नाम की विवाहिता ने अपने पांच वर्षीय बेटे ऋतिक के साथ जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया।
करवाचौथ जैसे पवित्र दिन पर मातृत्व और रिश्तों पर सवाल खड़े कर देने वाली यह घटना दिल दहला देने वाली है।

करवाचौथ की खुशियों के बीच मौत की चीख

छतरपुर जिले के चितहरी गांव (महोबा बॉर्डर एरिया) में रहने वाली सविता, जो पिछले कई महीनों से घरेलू कलह और मानसिक तनाव से गुजर रही थी, ने करवाचौथ के दिन एक ऐसा कदम उठा लिया जिसने पूरे गांव को हिला दिया।
बताया जाता है कि सविता ने अपने पांच वर्षीय बेटे ऋतिक को पहले जहरीला पदार्थ खिलाया, और फिर खुद भी निगल लिया। कुछ ही देर में मां-बेटे की चीखें पूरे घर में गूंजने लगीं, पड़ोसी और परिजन दौड़ते हुए पहुंचे तो दोनों की हालत बेहद खराब थी।

इलाज के लिए जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर

मां-बेटे को तत्काल महोबा जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद दोनों को हायर सेंटर रेफर कर दिया।
डॉ. अमित राजपूत (ईएमओ, जिला अस्पताल) ने बताया कि दोनों की हालत बेहद गंभीर है और उनकी मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है।
वहीं, सविता के ससुर लक्षीराम ने बताया कि उनकी बहू कुछ दिनों से परेशान थी लेकिन इस तरह का कदम उठाएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

गांव में दहशत और खामोशी

इस घटना के बाद गांव में सन्नाटा और दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों के मुताबिक सविता का अपने पति से अक्सर झगड़ा होता था, और घरेलू विवाद ही इस घटना की मुख्य वजह माना जा रहा है।
पड़ोसी अरविंद ने बताया, “हमने अचानक चीखें सुनीं, दौड़कर पहुंचे तो सविता और उसका बेटा तड़प रहे थे। हम तुरंत दोनों को अस्पताल लेकर गए। उसने ऐसा क्यों किया, इसका हमें कोई अंदाजा नहीं।”

सवाल रिश्तों पर, व्यवस्था पर और समाज पर

एक मां, जिसने अपने बेटे के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा दी, वही मां जब अपने बच्चे के साथ जहर पी जाए — तो यह सिर्फ घरेलू विवाद नहीं, बल्कि समाज की संवेदनहीनता और मानसिक दबाव का आईना है।
करवाचौथ जैसे शुभ दिन पर यह हादसा बताता है कि औरतों के भीतर कितनी खामोश पीड़ा, कितना दबा हुआ गुस्सा और कितनी बेबसी पल रही है।

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