Mahakumbh 2025: तलवारों का खेल, रथ, घोड़े, ऊंट.. कुछ ऐसे हुई प्रयागराज में 5000 संतों की एंट्री
Mahakumbh 2025: प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ की तैयारियाँ जोरों पर हैं, और इस बड़े धार्मिक आयोजन से एक महीने पहले ही देशभर से साधु-संतों का आगमन शुरू हो गया है। आज श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा की छावनी प्रवेश (पेशवाई) और किन्नर अखाड़े की देवत्व यात्रा बड़े धूमधाम से निकाली गई। साधु-संतों की इस भव्य यात्रा को देखने के लिए हजारों लोग एकत्रित हुए, जबकि यात्रा में शामिल संतों ने शंखनाद और शास्त्र प्रदर्शन के साथ उत्सव का माहौल बना दिया।
छावनी प्रवेश और देवत्व यात्रा का आरंभ
यह यात्रा यमुना तट पर स्थित मौजगिरी आश्रम से शुरू हुई। यात्रा की शुरुआत चांदी के सिंहासन पर महामंडलेश्वर छत्र और चंवर के साथ हुई, जिसके बाद संत शंखनाद करते हुए करतब दिखाते हुए आगे बढ़े। यात्रा में संतों के साथ अखाड़े के करीब 5,000 पदाधिकारी भी शामिल हुए। उनके साथ ढोल-नगाड़ों की आवाज गूंज रही थी और लोग उन्हें फूल बरसाकर आशीर्वाद ले रहे थे।
साधु-संतों के शस्त्र प्रदर्शन और रथ पर सवार होना

जूना अखाड़े और किन्नर अखाड़े के संतों ने इस यात्रा में शस्त्र प्रदर्शन भी किया। संत महात्मा सज-धजकर बघ्घी, रथ, घोड़े, ऊंट और टैक्टर पर सवार होकर इस यात्रा में शामिल हुए। यह यात्रा करीब 2 किलोमीटर से भी लंबी थी और यात्रा के रास्ते पर हर छत पर लोगों की भीड़ देखी गई। किन्नर अखाड़े के संत भी डांस करते हुए यात्रा के साथ बढ़ रहे थे।
प्रमुख संतों की मौजूदगी और यात्रा का उत्सव

इस भव्य यात्रा में श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के प्रमुख संतों के अलावा किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरी समेत कई प्रमुख संत और महात्मा भी शामिल थे। यात्रा में जूना अखाड़े के प्रमुख संतों जैसे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज और अन्य संतों की विशेष उपस्थिति रही।
विदेशी संत भी शामिल हुए इस यात्रा में
इस बार की यात्रा में एक और खास बात रही कि जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर जापान से योग माता केको आइकावा भी इस यात्रा में शामिल हुईं। उनका साथ देते हुए कई अन्य विदेशी साधु-संत भी इस भव्य आयोजन का हिस्सा बने।
जनसमूह की उमड़ी भीड़
इस यात्रा को लेकर प्रशासन ने रूट डायवर्जन की व्यवस्था भी की थी ताकि भीड़-भाड़ को सही तरीके से नियंत्रित किया जा सके। यात्रा के रास्ते में हर जगह छतों पर लोग खड़े होकर संतों का आशीर्वाद ले रहे थे।
महाकुंभ के इस आयोजन के शुरू होने से पहले ही साधु-संतों की इस यात्रा ने प्रयागराज में धार्मिक जोश और उमंग का माहौल बना दिया है, और अब यह इंतजार और भी बढ़ गया है कि जब 13 जनवरी को महाकुंभ का वास्तविक आयोजन शुरू होगा।