Mahagathbandhan manifesto: ‘तेजस्वी प्रण’ सिर्फ वादों का महासागर या बदलाव की पटकथा?
Mahagathbandhan manifesto: ‘तेजस्वी प्रण’ से महागठबंधन का सत्ता-संकल्प, वादों का महासागर या बदलाव की पटकथा?
बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर आ खड़ी है। आज महागठबंधन ने अपने घोषणा-पत्र को आज जारी कर दिया है जिसे राज्य की सत्ता-दौड़ में ‘संकल्प पत्र’ नाम से दर्ज किया जाएगा। शीर्ष पटल पर नाम है तेजस्वी यादव का — और घोषणापत्र का नाम रखा गया है “बिहार का तेजस्वी प्रण”।
यह कोई साधारण दस्तावेज नहीं, बल्कि एक राजनीतिक युद्ध-योजना है जिसमें नौकरी, पेंशन, मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मासिक सहायता, पुराने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना, और किसानों-मजदूरों के लिए अनेक वादे शामिल हैं। अब सवाल यह है — क्या यह बिहार में सत्ता का पावर-शिफ्टिंग का आरंभ होगा, या फिर हवा में खो जाएगी?
नीचे प्वाइंट टू प्वाइंट हर बड़ी जानकारी पेश है, ताकि पाठक पूरा परिदृश्य समझ में आजाए
घोषणापत्र की प्रमुख बातें (पॉइंट-वाइज)
1. हर परिवार में एक सरकारी नौकरी
गठबंधन सरकार बनने पर अगले 20 दिनों के भीतर एक ऐसा विधेयक लाया जाएगा जिसके तहत प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी।
20 महीनों के भीतर नौकरी वितरण की प्रक्रिया शुरू करने का वादा किया गया है।
इस योजना को “परिवार-सुधारात्मक” कदम बताया गया है जो बेरोज़गारी और आर्थिक असमानता को लक्ष्य करती है।
2. नियमितीकरण व रोजगार विस्तार
जीविका समूह की महिला कार्यकर्ताओं को नियमित सरकारी कर्मचारी बनाए जाने का वादा, और मासिक वेतन ₹30,000 तय करने की घोषणा।
सभी संविदा व आउटसोर्स कर्मियों को नियमित सेवा में लाया जाएगा।
उद्योग, आई-टी पार्क, एग्रो-फूड प्रोसेसिंग, पशुपालन, लॉजिस्टिक्स और टूरिज़्म जैसे सेक्टर्स में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की बात कही गई है।
3. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना को तत्काल प्रभाव से पुनः लागू किया जाएगा, ताकि सरकारी कर्मचारियों के लिए स्थिर भविष्य सुनिश्चित हो सके।
4. मुफ्त बिजली व गैस-सहायता
प्रत्येक उपभोक्ता-परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा।
गरीब परिवारों को ₹500 में गैस सिलेंडर देने का आश्वासन।
5. महिलाओं के लिए मासिक सहायता (‘माई-बहन मान योजना’)
दिसंबर 1 से महिलाओं को ₹2,500 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जो पांच वर्षों तक जारी रहेगी।
इसे महिला-सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया है।
6. किसानों-पिछड़े वर्गों-अल्पसंख्यकों के लिए उपाय
सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करने की घोषणा।
राज्य में मंडियों और कृषि-बाजारों को फिर से सक्रिय करने की योजना।
वक्फ कानून में संशोधन और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर संवैधानिक प्रतिबद्धता जताई गई।
7. शिक्षा-स्वास्थ्य-इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार
हर उप-विभाग में महिला कॉलेज और हर ब्लॉक में डिग्री कॉलेज स्थापित करने का वादा।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फीस समाप्त करने और अभ्यर्थियों को मुफ्त यात्रा सुविधा देने का आश्वासन।
स्वास्थ्य बीमा की सीमा ₹25 लाख तक बढ़ाने का प्रस्ताव।
8. शासन-सुधार और भ्रष्टाचार-रोधी पहल
“समय-बद्ध सेवा कानून” लागू करने की घोषणा, ताकि जनता को तय समय में सरकारी सेवाएँ मिलें।
निगरानी आयोग को सशक्त बनाने और सभी सरकारी ठेकों में पारदर्शिता बढ़ाने की बात कही गई है।
9. शराब नीति में सुधार
बिहार में लागू शराब-बंदी की विफलताओं को स्वीकार करते हुए ‘ताड़ी (देशी शराब)’ पर प्रतिबंध हटाने की संभावना जताई गई।
शराबबंदी से प्रभावित गरीब परिवारों के पुनर्वास की नीति बनाने की भी बात कही गई।
10. उद्योग-ऊर्जा-पर्यावरण विचार
राज्य में 5 नए एक्सप्रेसवे, आई-टी पार्क, SEZ और उद्योग क्लस्टर्स विकसित करने की घोषणा।
“हरित बिहार मिशन” के तहत वृक्षारोपण, नवीकरणीय ऊर्जा और सिंचाई विस्तार के कार्यक्रम चलाने की बात कही गई।
11. सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना
विधवा, वृद्ध और विकलांग पेंशन बढ़ाने का वादा।
विकलांग नागरिकों को ₹3,000 प्रति माह की सहायता देने का प्रस्ताव।
पंचायत और नगर निकायों में पिछड़े वर्गों और महिलाओं का आरक्षण बढ़ाने की योजना।
12. चुनावी संदेश और रणनीति
घोषणापत्र का टैगलाइन रखा गया है — “सम्पूर्ण बिहार का, सम्पूर्ण परिवर्तन – तेजस्वी प्रतिज्ञा, तेजस्वी प्रण।”
इसे केवल वादों का दस्तावेज नहीं, बल्कि बिहार के सामाजिक-आर्थिक बदलाव का रोडमैप बताया गया।
विश्लेषण, क्या यह ‘खिलाफ़’ स्लेट है या ‘नए बिहार’ की पटकथा?
इस घोषणापत्र ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रोजगार, सामाजिक न्याय और आर्थिक स्थिरता महागठबंधन की प्राथमिकता हैं।
200 यूनिट मुफ्त बिजली, हर परिवार को नौकरी, महिलाओं को मासिक सहायता — ये वादे सीधे आम जनता के घर-आँगन से जुड़ते हैं।
“20 दिन में विधेयक, 20 महीने में क्रियान्वयन” जैसी समयसीमा तय कर, गठबंधन ने वादों को केवल घोषणाओं तक सीमित न रहने देने का संकेत दिया है।
हालांकि इतने व्यापक वादों के लिए वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक ढांचा जुटाना एक बड़ी चुनौती होगा।
यह घोषणापत्र सीधे तौर पर मौजूदा सत्ता-संरचना को चुनौती देता है और जनता से कहता है — “अब बदलाव का वक्त है।”
दूसरी ओर, इस दस्तावेज़ में शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग को भी प्रमुखता देकर इसे केवल ‘पॉपुलिस्ट पैकेज’ नहीं, बल्कि विकास का एजेंडा बताया गया है।
महागठबंधन का “तेजस्वी प्रण” न सिर्फ एक घोषणापत्र है, बल्कि यह बिहार की जनता के नाम एक राजनीतिक संकल्प पत्र है — जिसमें बदलाव, रोजगार, महिला सुरक्षा और किसान सम्मान का पूरा खाका खींचा गया है।
अब बिहार की जनता के सामने सवाल है — क्या ये वादे सिर्फ कागज पर रहेंगे या सच में सत्ता-परिवर्तन की पटकथा लिखेंगे?
समय इसका सबसे बड़ा गवाह बनेगा।
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