वरिष्ठ समाजसेवी राहुल तोमर की जीत, पेट्रोल एंड एचएसडी डीलर्स एसोसिएशन चुनाव प्रक्रिया पर लगी मुहर, आगे पढ़िए
कानपुर। उत्तर प्रदेश से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पेट्रोल एंड एचएसडी डीलर्स एसोसिएशन के आगामी कार्यकारिणी चुनाव में वरिष्ठ समाजसेवी एवं संस्था के सक्रिय सदस्य राहुल तोमर की बड़ी जीत हुई है। यह जीत केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि संस्था की लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता की ओर एक कदम भी है।
दरअसल, 22 जून 2025 को होने वाले चुनाव से पहले कुछ प्रत्याशियों के नामांकन पत्र बिना स्क्रूटनी किए ही रद्द कर दिए गए थे। इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राहुल तोमर ने 19 जून 2025 को संस्था कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा किया और डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स सोसाइटी एवं चिट्स से शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को रोकने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी।
नोटिस में रखी गई प्रमुख मांगें
राहुल तोमर ने स्पष्ट किया था कि नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के लिए कोई तारीख तय नहीं की गई थी। इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं के नामांकन रद्द कर दिए गए। इसलिए उन्होंने चुनाव को स्थगित करने, नई तारीख घोषित करने और सभी उम्मीदवारों को नामांकन पुनः भरने का अवसर देने की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि संस्था का नवीनीकरण वर्ष 2020 में केवल दस सदस्यीय सूची के आधार पर किया गया था। वहीं 2025 के चुनाव में अचानक 113 सदस्यीय सूची प्रस्तुत की गई, जिसे चार पदाधिकारियों ने पारित कर दिया। इस विसंगति को गंभीर मानते हुए उन्होंने पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की।
धारा 1860 का पालन और जांच के परिणाम
शिकायतकर्ताओं की ओर से राहुल तोमर ने सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 की धारा 4बी का हवाला दिया और सदस्यता सूची की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। जांच के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने माना कि नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया गलत थी। नतीजतन चुनाव स्थगित कर दिया गया और नई प्रक्रिया शुरू की गई।
यह रहे प्रमुख दावेदार
इस पूरी लड़ाई में राहुल तोमर अध्यक्ष पद के दावेदार रहे। वहीं महामंत्री पद के लिए गौरव कुमार, उपाध्यक्ष पद हेतु आशीष सिंह और प्रेम कुमार त्रिपाठी, सचिव पद के लिए राना शुभम सिंह सहित कई सदस्य शामिल रहे।
संस्था में ख़ुशी की लहर
इस फैसले से न केवल शिकायतकर्ताओं को न्याय मिला बल्कि संस्था के सभी सदस्यों में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी ने राहुल तोमर का आभार व्यक्त किया और इसे लोकतंत्र की सच्ची जीत बताया। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि जब समाजसेवी आगे बढ़कर सही आवाज उठाते हैं, तो पारदर्शिता और निष्पक्षता को स्थापित किया जा सकता है।