Kanpur News: अधीनस्थ कृषि सेवा संघ ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, डिजिटल क्रॉप सर्वे कार्यभार को लेकर रखी यह मांग

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कानपुर। अधीनस्थ कृषि सेवा संघ कानपुर नगर ने प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित था जिसे जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के माध्यम से कलेक्ट्रेट परिसर में एडीएम को सौंपा गया। संघ के पदाधिकारियों ने कृषि विभाग के कर्मचारियों पर बढ़ते कार्यभार और अतिरिक्त जिम्मेदारियों के संबंध में अपनी चिंता व्यक्त की।

पढ़िए संघ की प्रमुख मांग 

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग के समस्त तकनीकी कर्मचारी पहले से ही कई महत्वपूर्ण योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फैमिली आईडी, फार्मर्स रजिस्ट्री, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, नमामि गंगे, कृषि यंत्रीकरण, समयानुसार बीज वितरण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके बावजूद हाल ही में भारत सरकार की योजना डिजिटल क्रॉप सर्वे (एग्री स्टेट) का कार्य भी उन्हीं पर सौंपा गया है।

पदाधिकारियों ने कहा कुछ ये 

तकनीकी कर्मचारियों का कहना है कि मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश द्वारा इस सर्वे का संपूर्ण कार्य प्राइवेट एजेंसी के साथ-साथ कृषि विभाग के कार्मिकों से भी कराने का निर्देश दिया गया है। कर्मचारियों का मानना है कि यह कार्यभार अनावश्यक रूप से कृषि विभाग के तकनीकी कर्मचारियों पर डाला जा रहा है, जिससे उनकी नियमित जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।

मौजूद रहे संघ के लोग 

इस संदर्भ में अधीनस्थ कृषि सेवा संघ के अध्यक्ष डॉ. उमाशंकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा। इस अवसर पर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष राजा भरत अवस्थी और मंडल मंत्री डॉ. आलोक यादव भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में संघ कार्यकारिणी के मंत्री श्री संतोष सचान, उपाध्यक्ष अनुराग शुक्ला, अनिल कुमार, राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली के जिला अध्यक्ष डॉ. सुनील सिंह सहित रणधीर सिंह, अजीत सिंह चौहान, राहुल कुमार, श्यामलाल, अजय सागर, धीरेंद्र कुमार, श्रीमती शिवानी, प्राची और शिव सिंह रामनरेश सहित अनेक तकनीकी सहायक शामिल हुए।

संघ ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित विचार नहीं किया गया तो वे आगे आंदोलन की राह भी अपना सकते हैं। ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने सरकार से यह अपेक्षा की है कि कृषि विभाग के तकनीकी कर्मचारियों को केवल उनकी मूल जिम्मेदारियों में ही लगाया जाए ताकि किसानों तक योजनाओं का लाभ समय पर और सही तरीके से पहुंच सके।

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