कानपुर में मण्डल स्तरीय दिव्यांगजन दीपावली मेले का हुआ भव्य शुभारंभ, बच्चों की प्रतिभा ने जीता दिल
कानपुर। मोतीझील स्थित लॉन नंबर-3 में मण्डल स्तरीय दिव्यांगजन दीपावली मेले का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने फीता काटकर एवं दीप प्रज्वलित कर मेले की शुरुआत की। समारोह में उप निदेशक दिव्यांगजन सशक्तिकरण, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, उपायुक्त उद्योग कानपुर, पुष्पा खन्ना मेमोरियल की निदेशक और परवाज जन कल्याण समिति की निदेशक ने बुके देकर जिलाधिकारी का स्वागत किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ कार्यक्रम का हुआ आगाज
कार्यक्रम का आरंभ साईं बाबा स्पेशल स्कूल के दृष्टिबाधित दिव्यांग बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुआ। बच्चों की प्रस्तुति ने उपस्थित सभी जनों को भावविभोर कर दिया। उनके उत्साह और आत्मविश्वास ने यह साबित किया कि दिव्यांगता कभी भी प्रतिभा और सृजनशीलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।
जिलाधिकारी ने बच्चों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों का आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है। इसके साथ ही यह भी दिखता है कि समाज के हर वर्ग को समान अवसर मिलना कितना महत्वपूर्ण है।
स्टॉलों का अवलोकन और दिव्यांगजनों का समर्थन
जिलाधिकारी ने मेले में दिव्यांगजनों द्वारा बनाए गए हस्तनिर्मित उत्पादों के स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने कुछ उत्पादों की खरीदारी भी की, जिससे न केवल दिव्यांगजनों को आर्थिक मदद मिली, बल्कि उनके हुनर और मेहनत को भी प्रोत्साहन और मान्यता मिली।
मेले में विभिन्न स्टॉलों पर दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां, सजावट का सामान, मिट्टी की प्रतिमाएं, जूट के डोर-मैट, मोतियों की मालाएं, चित्रकला, मोमबत्तियां, अगरबत्तियां, भगवान की पोशाक, थैले और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं प्रदर्शित की गईं।
जिलाधिकारी ने कहा कि “समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान और अवसर देना हम सबका नैतिक दायित्व है। दिव्यांग बच्चे और युवा जिस आत्मविश्वास, सृजनशीलता और मेहनत से कार्य कर रहे हैं, वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। अगर उन्हें अवसर और सहयोग मिले तो ये बच्चे किसी से कम नहीं हैं।”
सहयोगी संस्थाओं की भूमिका
इस मेला का आयोजन निदेशालय दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश लखनऊ, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी कार्यालय और पंजीकृत स्वयंसेवी संस्थाओं—परवाज जन कल्याण समिति और पुष्पा खन्ना मेमोरियल सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
मेले में कुल 10 संस्थाओं ने स्टॉल लगाए। प्रमुख संस्थाओं में शामिल हैं—
1. पहल विकलांग पुनर्वास केंद्र समिति
2. पुष्पा खन्ना मेमोरियल सेंटर
3. प्रेरणा स्पेशल स्कूल फेथफुलगंज
4. दिव्यांग डेवलपमेंट सोसाइटी
5. परवाज जन कल्याण समिति
6. दृश्यम सेवा समिति
7. प्रगति लर्निंग सेंटर
8. अमृता स्पेशल स्कूल एवं पुनर्वास केंद्र
9. विकलांग एसोसिएशन कानपुर नगर
10. साकार स्पेशल स्कूल
इन संस्थाओं ने मिलकर दिव्यांग बच्चों और कलाकारों की हुनर और प्रतिभा को मंच प्रदान किया।
मुख्यधारा से जोड़ने का है माध्यम
जिलाधिकारी ने कहा कि यह मेला दिव्यांगजनों की प्रतिभा और मेहनत को समाज तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजनों से न केवल बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरणा भी मिलती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे मेले में जाकर न केवल उत्पाद खरीदें बल्कि दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास और सामाजिक समावेश को भी बढ़ावा दें।
जानिए मेले के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
दिव्यांगजन मेले का महत्व केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। यह सांस्कृतिक जागरूकता, समावेशिता और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। बच्चे अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन करते हुए यह संदेश देते हैं कि **दिव्यांगता किसी के सपनों और क्षमता पर रोक नहीं लगा सकती।
जिलाधिकारी ने कहा कि “माता-पिता, स्वयंसेवक और समाज के सहयोगी इस प्रक्रिया में शक्ति का स्रोत हैं। हमें मिलकर ऐसे बच्चों को अवसर प्रदान करना चाहिए ताकि वे समाज में समान रूप से विकसित हो सकें।”
यह रहेगी भविष्य की राह
इस मेले ने यह स्पष्ट किया कि दिव्यांग बच्चों और युवाओं का सशक्तिकरण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। समाज का सहयोग, शिक्षा, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मेला यह भी साबित करता है कि जब अवसर और समर्थन मिलते हैं, तो दिव्यांग बच्चे किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं और उनकी प्रतिभा सामाजिक और आर्थिक रूप से मूल्यवान बनती है।