कानपुर: चकेरी में प्लाट कब्जे विवाद में खुल रही है पोल, हाई कोर्ट को गुमराह करने का आरोप, पुलिसकर्मियों पर डकैती का केस
कानपुर के चकेरी क्षेत्र में प्लाट कब्जे का मामला गहराता जा रहा है। प्लाट मालिक अभिषेक वाष्र्णेय ने आरोप लगाया है कि संगीता जायसवाल और उनके पति संजय जायसवाल ने तथ्यों को छिपाकर हाई कोर्ट को गुमराह किया और गलत आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई।
अभिषेक का पक्ष
पत्रकार वार्ता में अभिषेक वाष्र्णेय ने बताया कि एसीएम-2 ने उनके पक्ष में निर्णय दिया था। कोर्ट ने संगीता जायसवाल के खिलाफ बेदखली का आदेश भी दिया था। आदेश के अनुपालन में चकेरी पुलिस ने प्लॉट का कब्जा उनके पिता को दिलाया। लेकिन, आरोप है कि इसके बाद संगीता, उनके पति और सहयोगियों ने मिलकर सुनियोजित तरीके से प्लाट में घुसपैठ की और तोड़फोड़ की।
अभिषेक का कहना है कि जब उन्होंने इसकी शिकायत पुलिस से की तो आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हीं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया गया। बाद में उन्होंने पुलिस आयुक्त को वीडियो साक्ष्य दिखाए। जांच में आरोपियों द्वारा कब्जा करने की बात सही साबित हुई, जिसके बाद संगीता, उनके पति संजय, राजकुमार सोनी और अन्य पर रिपोर्ट दर्ज हुई।
जांच की नई शुरुआत
विवाद बढ़ने पर मामला अब नए सिरे से जांच के चरण में है। महाराजपुर थाना प्रभारी संजय पांडेय ने बताया कि संबंधित प्रपत्र मिलते ही विवेचना शुरू होगी। वहीं एसीपी चकेरी अभिषेक पांडेय इंस्पेक्टर और दारोगा पर विभागीय जांच करेंगे। दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप
इस विवाद ने तब नया मोड़ लिया जब चकेरी इंस्पेक्टर संतोष शुक्ला और दारोगा अंकित खटाना समेत अन्य पर उनके ही थाने में डकैती और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। लाल बंगला निवासी एक महिला ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन विवादित होने के बावजूद पुलिस ने कब्जा दिलाया और उनके डेढ़ करोड़ रुपये के गहने व सामान ट्रक में भरकर ले गए।
महिला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर पुलिस आयुक्त तक शिकायत की। इसके बाद 2 सितंबर को इंस्पेक्टर और दारोगा समेत अन्य के खिलाफ डकैती, दंगा और चोरी सहित कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। अब इस केस की विवेचना महाराजपुर थाने में स्थानांतरित कर दी गई है।
निष्कर्ष
चकेरी प्लाट कब्जा विवाद केवल दो पक्षों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें पुलिसकर्मियों पर भी गंभीर आरोप लगने से मामला और संवेदनशील हो गया है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और न्याय किसके पक्ष में जाता है।