कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के चकेरी थाना क्षेत्र से पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। श्याम नगर में हुए एक एक्सीडेंट केस में विवेचक पर धमकी देने और सुविधा शुल्क की मांग का आरोप लगा है। पीड़ित पक्ष ने यह भी कहा कि पुलिस ने झूठी एफआईआर दर्ज कर वाहन मालिक को फंसाने की कोशिश की।
दरअसल, श्याम नगर क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में घायल पीड़िता का प्लास्टर कराया गया था। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मेडिकल रिपोर्ट में नौ फ्रैक्चर दर्ज किए गए, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी। इसके बावजूद विवेचक ने फर्जी रिपोर्ट तैयार कर आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया।
फर्जी वाहन नंबर और FIR का आरोप
पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में जिस वाहन को शामिल बताया, वह असल में हादसे में शामिल ही नहीं था। स्थानीय लोगों के बयानों और फुटेज से भी यह साफ हुआ कि कार चालक निर्दोष है। बावजूद इसके विवेचक नरेंद्र कुमार ने वाहन मालिक को नोटिस भेजा और कथित तौर पर 15 मिनट में गाड़ी हटवा दी। इस पूरे मामले ने पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवेचक पर धमकी और रिश्वत का आरोप
परिजनों का आरोप है कि विवेचक ने वाहन मालिक को फंसाने की धमकी दी और मामले को दबाने के लिए सुविधा शुल्क मांगा। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि जब ईमानदार पुलिस कमिश्नर के रहते ऐसे आरोप लग रहे हैं, तो आम जनता का भरोसा पुलिस पर कैसे कायम रहेगा।
जनता में असंतोष और सवाल
मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंचाई गई है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि एफआईआर दर्ज करने में कई गड़बड़ियां हुईं। स्थानीय लोगों ने साफ कहा कि पंकज सिंह की कार इस हादसे में शामिल नहीं थी, फिर भी झूठी रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई की गई।
फिलहाल, मामला जांच के अधीन है और पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है। नागरिकों का कहना है कि पुलिस की मिलीभगत और लापरवाही के कारण आम लोगों को बेवजह परेशान होना पड़ता है। यह घटना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है और यह संकेत देती है कि कुछ पुलिसकर्मी अब भी भ्रष्टाचार, झूठे केस और धमकी जैसी प्रवृत्तियों के आदी हो चुके हैं।
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