Jaunpur::देखिए कितना खतरनाक साबित हुआ सेल्फी का चक्कर, गोमती नदी में डूबा युवक, मौत
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Jaunpur: सेल्फी की दीवानगी फिर एक बार जानलेवा साबित हुई। जौनपुर में हनुमान घाट पर एक युवक सेल्फी लेने के दौरान नदी में गिर पड़ा और तेज बहाव में डूब गया। यह कोई पहला मामला नहीं है, जब सेल्फी की सनक ने किसी को मौत के मुंह में धकेल दिया हो। सवाल यह है कि आखिर कब लोग समझेंगे कि कुछ सेकंड की सनक हमेशा के लिए जिंदगी छीन लेती है।
हादसे की पूरी कहानी
घटना उस समय हुई, जब सुरेश गौतम उर्फ गुल्लू (निवासी हुसैनाबाद) अपने दोस्तों के साथ हनुमान घाट पर पहुंचा। घाट पर खड़े होकर वह मोबाइल से सेल्फी लेने लगा। इसी दौरान उसका पैर फिसला और वह सीधे गोमती नदी की तेज धारा में जा गिरा। देखते ही देखते युवक गहराई में समा गया और अफरा-तफरी मच गई।
करीब तीन घंटे तक गोताखोरों की कड़ी मशक्कत चली, तब जाकर सुरेश का शव नदी से बाहर निकाला गया। मौके पर मौजूद लोगों की आंखों में आंसू थे और हर किसी के चेहरे पर एक ही सवाल था—क्या कुछ तस्वीरों के लिए जान गंवाना वाजिब है?
मौत की ओर धकेलती सेल्फी की सनक
आज का यह हादसा कोई नया मामला नहीं है। सेल्फी लेने की होड़ ने न जाने कितने युवाओं और युवतियों की जिंदगी छीन ली है। कभी नदियों के किनारे, तो कभी पुलों और ऊंची इमारतों पर लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सेल्फी लेने की कोशिश करते हैं। दुख की बात यह है कि खतरे को जानते हुए भी लोग ऐसी हरकतों से बाज नहीं आते।
सेल्फी की यह सनक पल भर की खुशी के लिए हमेशा की नींद में सुला देती है। ऐसी घटनाओं में न केवल परिवार तबाह होता है, बल्कि समाज को भी एक दर्दनाक सबक मिलता है।
प्रशासन की चेतावनी और हकीकत
प्रशासन समय-समय पर लोगों को चेतावनी देता है कि नदियों के किनारे, पुलों पर या जोखिम भरी जगहों पर सेल्फी लेने से बचें। लगातार जागरूकता अभियान भी चलाए जाते हैं, यहां तक कि कई बार कड़ी कार्रवाई भी की जाती है। इसके बावजूद भी लोग इन चेतावनियों को हल्के में लेते हैं और अपनी जान को दांव पर लगा देते हैं।
यह हादसा इसी लापरवाही का एक और नतीजा है। प्रशासन चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, जब तक लोग खुद अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक ऐसे हादसे थमने वाले नहीं हैं।
सुरेश गौतम की मौत ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब लोग समझेंगे कि जिंदगी किसी तस्वीर से कहीं ज्यादा अनमोल है। एक तस्वीर के लिए अपनी जान गंवाना सिर्फ परिवार पर बोझ नहीं डालता, बल्कि समाज को भी यह कड़वा संदेश देता है कि हम अपनी ही मौत को खुद बुलावा दे रहे हैं।