इजरायली संसद में हंगामा: ट्रंप के भाषण पर बवाल, ‘Genocide’ लिखा पोस्टर लहराया- गाजा समर्थक सांसदों को बाहर निकाला

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इजरायली संसद में हंगामा: ट्रंप के भाषण पर बवाल, ‘Genocide’ लिखा पोस्टर लहराया- गाजा समर्थक सांसदों को बाहर निकाला

इजरायली संसद में हंगामा: ट्रंप के भाषण पर गाजा समर्थक सांसदों का विरोध,‘Genocide’ लिखे पोस्टर लहराए

इजरायल की संसद में एक बार फिर से राजनीतिक और कूटनीतिक तूफ़ान छिड़ गया। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के दौरान, संसद में दो गाजा समर्थक सांसदों ने जोरदार विरोध जताया और ‘Genocide’ लिखा पोस्टर लहराया। विरोध इतना उग्र था कि अधिकारियों ने तुरंत दोनों सांसदों को बाहर निकाल दिया। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा और फिलिस्तीन-इजरायल संकट को फिर से अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया।

ट्रंप का भाषण और विरोध का कारण

ट्रंप का भाषण मुख्य रूप से मध्य पूर्व शांति और फिलिस्तीन-इजरायल संबंधों पर केंद्रित था। भाषण के दौरान गाजा के हालात और फिलिस्तीनी नागरिकों के प्रति हिंसा पर चर्चा की गई। इस पर संसद में दो सांसदों ने सीधे विरोध किया और ‘Genocide’ के पोस्टर के माध्यम से चेतावनी दी कि फिलिस्तीनियों पर हो रही हिंसा को विश्व नजरअंदाज नहीं कर सकता। विरोध इतना तीव्र था कि सुरक्षा बलों को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा।

सांसदों को बाहर निकाला गया

गाजा समर्थक सांसदों का यह प्रदर्शन संसद के अंदर हंगामा और तनाव का कारण बना। इजरायली सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों सांसदों को हॉल से बाहर किया। इस कार्रवाई के दौरान सांसदों और सुरक्षा कर्मियों के बीच तनाव बढ़ गया, लेकिन स्थिति को काबू में किया गया। यह घटना दिखाती है कि राजनीतिक मंच पर भी फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष किस हद तक उग्र हो चुका है।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं

इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी। कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने ट्रंप और इजरायली संसद पर जोर दिया कि फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ हिंसा को रोका जाए। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लोगों में गहरी चिंता पैदा की। गाजा में हो रही तबाही और इजरायली संसद में विरोध के बीच यह एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया है।

इजरायली संसद में ट्रंप के भाषण पर हुए विरोध ने दिखाया कि गाजा संकट कितनी संवेदनशील और विवादास्पद स्थिति पैदा कर रहा है। यह घटना न केवल इजरायल के अंदर राजनीतिक तनाव को उजागर करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चेतावनी है कि फिलिस्तीनियों के अधिकारों और सुरक्षा के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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