पुलिस फायरिंग में 250 की मौत, 1,500 घायल –Pakistan में हिंसक विरोध प्रदर्शन

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पुलिस फायरिंग में 250 की मौत, 1,500 घायल –Pakistan में हिंसक विरोध प्रदर्शन

Pakistan में हिंसक विरोध प्रदर्शन, पुलिस फायरिंग में 250 की मौत, 1,500 घायल – गाजा पीस डील के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे

पाकिस्तान में गाजा पीस डील का समर्थन करने के फैसले के खिलाफ लगातार पांचवें दिन भी प्रदर्शन जारी रहे, और स्थिति भयावह होती जा रही है। तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के नेतृत्व में हजारों समर्थक सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। पार्टी का दावा है कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में अब तक लगभग 250 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

हिंसक झड़पों का विवरण

 प्रदर्शनकारियों ने लाहौर से इस्लामाबाद तक लंबा मार्च किया, जिसमें उन्होंने गाजा पीस डील के विरोध और इजराइल विरोधी नारों के साथ सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की। सुरक्षा बलों ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया, लेकिन भारी संख्या में लोग सड़क पर जमा होने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।

घायल और मृतक

मीडिया रिपोर्ट्स  के अनुसार, हिंसा में अब तक 250 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे गए, और लगभग 1,500 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इनमें TLP के कई नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हैं। घायल प्रदर्शनकारियों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

सुरक्षा बलों की स्थिति

 झड़पों में सुरक्षा बलों की तरफ से भी नुकसान हुआ है। पंजाब प्रांत में दो पुलिस अधिकारियों की मौत हुई और दर्जनों अन्य घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह बैरिकेडिंग तोड़ी और सड़कें बंद कर दी, जिससे स्थानीय प्रशासन की स्थिति और कठिन हो गई।

TLP का रुख

 TLP प्रमुख साद हुसैन रिजवी घायल होने के बावजूद प्रदर्शनकारी समूह का मनोबल बढ़ाने के लिए लगातार अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी या गोली का डर उन्हें और समर्थकों को रोक नहीं सकता।

स्थिति का सामाजिक प्रभाव

 पाकिस्तान के कई हिस्सों में प्रदर्शन और हिंसक झड़पों के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। सड़कें बंद, सरकारी दफ्तरों पर भारी सुरक्षा बल तैनात और रेड ज़ोन पूरी तरह से सील कर दिया गया।

यह हिंसा केवल विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और गाजा पीस डील के खिलाफ कट्टरपंथी गुटों के बढ़ते प्रभाव का भी स्पष्ट संकेत है।

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