Salute to Army: बेटी की शादी से 2 दिन पहले फौजी की मौत, बटालियन के जवानों ने किया कन्यादान

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Salute to Army: मथुरा के एक छोटे से गांव में एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने न केवल सेना की वफादारी को उजागर किया, बल्कि मानवीयता की मिसाल भी पेश की। जब एक पूर्व सैनिक की आकस्मिक मृत्यु के कारण उसकी बेटी की शादी खतरे में पड़ गई, तो सेना के जवानों ने न केवल दुख में परिवार का साथ दिया, बल्कि पिता की भूमिका निभाते हुए बेटी का कन्यादान भी किया। यह घटना न केवल दिल छूने वाली है, बल्कि फौजियों के बीच की गहरी दोस्ती और कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा को भी दर्शाती है।

पिता की मौत से बिखर गया था घर का माहौल

मथुरा के मांट थाना क्षेत्र के वकला गांव के निवासी देवेंद्र सिंह की बेटी ज्योति की शादी 7 दिसंबर को तय थी। घर में खुशी का माहौल था, लेकिन 5 दिसंबर को एक दुखद हादसे ने सब कुछ बदल दिया। देवेंद्र सिंह की कार, जो शादी की तैयारियों के सिलसिले में चल रही थी, मांट-राया मार्ग पर सड़क किनारे खड़ी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। इस दुर्घटना में देवेंद्र सिंह और एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई।

पिता के इस अचानक निधन के बाद, ज्योति को गहरे शोक का सामना करना पड़ा और उसने शादी से मना कर दिया। परिवार पूरी तरह से टूट चुका था, और शादी की तैयारियां रुक गईं।

फौजी भाइयों ने संभाला परिवार और बेटी को समझाया

देवेंद्र सिंह की मौत की सूचना मिलने के बाद, फाजिल्का स्थित 20 जाट बटालियन के सीओ कर्नल चंद्रकांत शर्मा ने तुरन्त बटालियन के 5 सैनिकों को मथुरा भेजा। इन सैनिकों में सूबेदार सोनवीर सिंह, सूबेदार मुकेश कुमार, हवलदार प्रेमवीर, बिनोद और वेताल सिंह शामिल थे।

सेना के इन बहादुर जवानों ने गांव पहुंचते ही देवेंद्र सिंह के परिवार का सहारा लिया और बेटी को समझाया। उन्होंने उसे बताया कि उसका पिता हमेशा उसे खुश देखना चाहता था और पिता के सपने को पूरा करना अब उसका कर्तव्य है। सैनिकों ने न केवल मानसिक संबल दिया, बल्कि शादी की सारी तैयारियां भी कीं।

सैनिकों ने निभाया पिता का धर्म, कन्यादान किया

शादी की सभी रस्में अब पूर्व सैनिक के चचेरे भाई आकाश के घर में पूरी की गईं। सैनिकों ने पिता की भूमिका निभाते हुए ज्योति का कन्यादान किया। यह देख हर कोई भावुक हो गया और पूरे गांव में एक सशक्त संदेश गया कि फौजी केवल युद्धभूमि में नहीं, बल्कि जीवन की हर चुनौती में एक सच्चे योद्धा होते हैं।

आंसुओं के साथ सलाम, सैनिकों के संघर्ष और कर्तव्य का सम्मान

देवेंद्र सिंह के रिश्तेदार नरेंद्र सिंह ने बताया, “जवानों ने जिस तरह से अपनी दोस्त की बेटी का कन्यादान किया, वह केवल एक परंपरा का पालन नहीं था, बल्कि एक महान कार्य था। सभी की आंखों में आंसू थे, लेकिन दिल में इन सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार था। इन बहादुरों ने साबित किया कि सेना में रिश्ते खून से नहीं, दिल से होते हैं।”

1 महीने पहले ही लिया था स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति

देवेंद्र सिंह, जो पंजाब के फाजिल्का में तैनात थे, ने एक महीने पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर परिवार के साथ मथुरा में रहने का निर्णय लिया था। वह अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में व्यस्त थे, लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी मृत्यु ने सब कुछ बदल दिया।

यह कहानी केवल एक परिवार के दुःख की नहीं, बल्कि भारतीय सेना के साहस, कर्तव्य और एकजुटता की भी कहानी है। फौजियों की यह साहसी और मानवीय मदद हर किसी के दिल में एक स्थायी छाप छोड़ गई।

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