Navratri Special: पाकिस्तान में लगते हैं जय माता दी के नारे, पढ़िए और जानिए कहां स्थित है हिंगलाज माता का मंदिर

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Navratri Special: नवरात्रि का पर्व आते ही भारत सहित पूरी दुनिया में देवी दुर्गा के भक्त माता के दरबार में श्रद्धा अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं। भारत में जहां 42 शक्तिपीठ स्थित हैं, वहीं कुछ शक्तिपीठ विदेशों में भी हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित हिंगलाज माता मंदिर, जिसे हिंगलाज भवानी या नानी का मंदिर भी कहा जाता है।

2000 साल से भी अधिक पुराना मंदिर

कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगोल नदी के तट पर चंद्रकूप पर्वत पर बसा यह शक्तिपीठ बेहद सिद्ध माना जाता है। यह मंदिर एक गुफा के भीतर स्थित है, जहां पहुंचना कठिन जरूर है लेकिन दर्शन के बाद भक्तों को दिव्य शांति का अनुभव होता है।

देवी सती की कथा से जुड़ा महत्व

हिंगलाज माता मंदिर का महत्व देवी सती की कथा से जुड़ा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के अपमान के बाद आत्मदाह कर लिया था, तब भगवान शिव ने क्रोधित होकर उनके शरीर को उठाया। उस समय सती के शरीर के 51 अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे, जहां-जहां अंग गिरे वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए।

कहा जाता है कि हिंगलाज शक्तिपीठ उस स्थान पर है जहां देवी सती का सिर गिरा था। इसी कारण इस शक्तिपीठ को अन्य शक्तिपीठों की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

नवरात्र में लगता है मेला

हर वर्ष नवरात्र के दौरान यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। इस दौरान न केवल हिंदू बल्कि मुसलमान श्रद्धालु भी यहां पहुंचकर माता के चरणों में शीश नवाते हैं। यहां की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि मंदिर की व्यवस्थापना में हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय मिलकर कार्य करते हैं। पाकिस्तान में इसे नानी का मंदिर कहा जाता है और स्थानीय लोग इसे विशेष श्रद्धा से पूजते हैं।

विदेशियों और भारतीयों के लिए प्रवेश

हिंगलाज माता के दर्शन करने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु आते हैं। भारतीय भी यहां दर्शन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान सरकार से अनुमति लेना आवश्यक है। पासपोर्ट, वीजा और आवश्यक दस्तावेज पूरे होने पर भारतीय भक्तों को यहां दर्शन का अवसर मिल सकता है।

श्रद्धालुओं की आस्था और कठिन राह

माना जाता है कि मंदिर तक पहुंचने का मार्ग कठिन जरूर है, लेकिन उतना ही सुंदर और मनमोहक भी। भक्तों की मान्यता है कि यहां पहुंचकर 10 फीट लंबी अग्निपथ पर चलने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी कारण सालभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

शक्तिपीठों का वैश्विक स्वरूप

देवी पुराण के अनुसार, कुल 51 शक्तिपीठों में से 42 भारत में हैं। शेष शक्तिपीठ अन्य देशों में स्थित हैं—

* पाकिस्तान में हिंगलाज शक्तिपीठ
* बांग्लादेश में चार शक्तिपीठ
* नेपाल में दो शक्तिपीठ
* श्रीलंका में एक शक्तिपीठ
* तिब्बत में एक शक्तिपीठ

इनमें से हिंगलाज माता मंदिर को सबसे पवित्र और प्राचीन माना जाता है।

धार्मिक सौहार्द का प्रतीक

हिंगलाज माता शक्तिपीठ केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि **सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक** भी है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों मिलकर श्रद्धा और विश्वास का वातावरण निर्मित करते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर दुनियाभर के भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

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