Hindu Temple – जानिए काशी के विश्वनाथ मंदिर का रहस्य, वर्ष में सिर्फ एक बार ही खुलता है माँ अन्नपूर्णा जी का मंदिर

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हिन्दू मंदिर – अनोखा है माँ अन्नपूर्णा और देवों के देव महादेव का रहस्य – शिव के भोग के बाद कोई न रहा था भूखा – जानिए क्यों 
 
Hindu Temple – अन्नपूर्णा के भक्तों आज हम आपको काशी के विश्वनाथ मंदिर के उस रहस्य से परिचित कराने जा रहे हैं, जिसके कारण यहां का मंदिर वर्ष में एक ही बार क्यों खोला जाता है। जिसकी जानकारी शायद ही बहुत कम भक्तों को होगी। तो चलिए हमारे साथ और  माँ अन्नपूर्णा के इस रहस्यमयी मंदिर और अलौकिक माया के दर्शन करते हैं। 
 
जानिए मंदिर की विशेषता 
 
बनारस में काशी विश्वनाथ मंदिर से कुछ ही दूर माता अन्नपूर्णा का मंदिर है। उन्हें तीनों लोकों में खाद्यान्न की माता माना जाता है। कहते हैं कि माता ने स्वयं भगवान शिव को खाना खिलाया था। इस मंदिर की दीवारों पर ऐसे चित्र बने हुए हैं। एक चित्र में देवी कलछी पकड़ी हुई हैं। इस मंदिर में साल में केवल एक बार अन्नकूट महोत्सव पर मां अन्नपूर्णा की स्वर्ण प्रतिमा को सार्वजनिक रूप से एक दिन के लिए दर्शनार्थ निकाला जाता है। तब ही भक्त इनकी अद्भुत छवि के दर्शन कर सकते हैं। 
 
मंदिर में एक कक्ष को छोड़कर पूरे वर्ष होते हैं दर्शन 
 
अन्नपूर्णा मंदिर के प्रांगण में कुछ अन्य मूर्तियां स्थापित हैं, जिनके दर्शन सालभर किए जा सकते हैं। इन मूर्तियों में मां काली, शंकर पार्वती और नरसिंह भगवान के मंदिर में स्थापित मूर्तियां शामिल हैं। बताते हैं कि अन्नपूर्णा मंदिर में ही आदि शंकराचार्य ने अन्नपूर्णा स्त्रोत की रचना कर के ज्ञान वैराग्य प्राप्ति की कामना की थी।
 
ऐसा ही एक श्‍लोक है, जिसमे भगवान शिव माता से भिक्षा की याचना कर रहे हैं
 
अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकर प्राण बल्लभे।
ज्ञान वैराग्य सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वती।।
 
पढ़िए प्राचीन कथा 
 
इस मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन कथा यहां बेहद चर्चित है। कहते हैं एक बार काशी में अकाल पड़ गया था, चारों तरफ तबाही मची हुई थी और लोग भूखों मर रहे थे। उस समय महादेव को भी समझ नहीं आ रहा था कि अब वे क्‍या करें। ऐसे में समस्‍या का हल तलाशने के लिए वे ध्‍यानमग्‍न हो गए, तब उन्हें एक राह दिखी कि मां अन्नपूर्णा ही उनकी नगरी को बचा सकती हैं।
 
 भगवान शिव के भोग के बाद न रहा था कोई भूखा 
 
इस कार्य की सिद्धि के लिए भगवान शिव ने खुद मां अन्नपूर्णा के पास जाकर भिक्षा मांगी। उसी क्षण मां ने भोलेनाथ को वचन दिया कि आज के बाद काशी में कोई भूखा नहीं रहेगा और उनका खजाना पाते ही लोगों के दुख दूर हो जाएंगे। तभी से अन्‍नकूट के दिन उनके दर्शनों के समय खजाना भी बांटा जोता है। जिसके बारे में प्रसिद्ध है कि इस खजाने का पाने वाला कभी आभाव में नहीं रहता।
 
              जय हो माँ अन्नपूर्णा की

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