पीलीभीत में बाघ का कहर: दो गांवों में हमला, एक महिला की मौत, दो घायल – सैजना और मडरिया गाँव में सुबह-सुबह तबाही

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पीलीभीत में बाघ का कहर: सैजना और मडरिया गांवों में सुबह-सुबह दोहरे हमले से दहशत फैल गई। एक महिला को मौत के घाट उतारा गया, दो लोग गंभीर रूप से घायल। वन विभाग गायब, ग्रामीणों में उबाल। आखिर कब जागेगा प्रशासन?

पीलीभीत में बाघ का कहर: सैजना और मडरिया गांवों में सुबह-सुबह दोहरे हमले से दहशत फैल गई। एक महिला को मौत के घाट उतारा गया, दो लोग गंभीर रूप से घायल। वन विभाग गायब, ग्रामीणों में उबाल। आखिर कब जागेगा प्रशासन?

पीलीभीत में फिर बाघ का खूनी तांडव: दो गांवों पर हमला, महिला की मौत, दो गंभीर, वन विभाग नदारद!

पीलीभीत में बाघ का कहर: सैजना और मडरिया गाँव में सुबह-सुबह तबाही

पीलीभीत, थाना न्यूरिया क्षेत्र:

आज सुबह लगभग 7 बजे, थाना न्यूरिया क्षेत्र के दो अलग-अलग गाँवों—सैजना और मडरिया—में बाघ के जानलेवा हमलों से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटनाओं में एक महिला की मौत, जबकि एक महिला और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

पीलीभीत में बाघ का कहर: पहली घटना: सैजना गाँव में महिला पर हमला

40 वर्षीय मीना देवी पत्नी कालीचरण जब खेत में घास काटने गई थीं, तभी बाघ ने उन पर हमला कर दिया।
ग्रामीणों ने शोर मचाकर किसी तरह बाघ को भगाया, लेकिन मीना देवी बुरी तरह घायल हो चुकी थीं।
परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल 112 और वन विभाग को सूचना दी, लेकिन केवल थाना पुलिस मौके पर पहुँची, वन विभाग की टीम का अब तक कोई अता-पता नहीं है।

दूसरी घटना: मडरिया गाँव में युवक और महिला पर हमला

रामविलास (21 वर्ष) खेत में काम कर रहे थे, तभी बाघ ने उन पर हमला कर दिया।

गाँव के दो साहसी युवकों—हरवांश कुमार और ठुकदास—ने डंडों से बाघ पर हमला कर उसे भगाया।

इस दौरान तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए और जिला अस्पताल भेजे गए।

इसके कुछ ही देर बाद, गाँव की 35 वर्षीय महिला कृष्णा देवी पर भी बाघ ने हमला किया।

ग्रामीण कुछ कर पाते, इससे पहले ही बाघ उन्हेंमौत के घाट उतारकर  कर भाग निकला।

प्रशासन और वन विभाग की लापरवाही उजागर

जब रॉकेट पोस्ट के पत्रकार अजय देव वर्मा ने फोन पर इस गंभीर घटना पर DFO मनीष कुमार से बात की, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था।
उन्होंने कहा:

“दो लोग घायल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
एक महिला जो कथित रूप से बाघ का शिकार हुई है, गायब है, उसकी तलाश की जा रही है।”

यह बयान तब दिया गया, जब मड़रिया गाँव के हरिलाल ने साफ-साफ पुष्टि की थी कि कृष्णा देवी का शव घटनास्थल पर मौजूद है और ग्रामीण शव को उठाने नहीं दे रहे हैं, जब तक कि वरिष्ठ अधिकारी और वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुँचती।

DFO का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि वन विभाग को न तो सटीक जानकारी है, न ही तत्परता, जबकि वह जिले के सबसे बड़े जिम्मेदार अधिकारी हैं।

पीलीभीत में बाघ का कहर: ग्रामीणों का गुस्सा: “हमारे मरे तो क्या?”

मडरिया के हरिलाल ने बताया कि गाँव में आवारा पशु खेतों में घूमते हैं, जिससे बाघ भोजन की तलाश में खेतों तक आ जाते हैं।

उन्होंने बताया कि गाँव में पशुशाला का प्रस्ताव पास हो गया था, लेकिन प्रशासन ने बाद में उसे निरस्त कर दिया।

ग्रामीणों ने वन विभाग पर घटनाओं को जानबूझकर नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।

फिलहाल, ग्रामीण कृष्णा देवी के शव को उठाने नहीं दे रहे हैं, जब तक वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचते।

 घायलों का इलाज और पुलिस की कार्रवाई

न्यूरिया थाना पुलिस ने घायलों को जिला अस्पताल भेजा, जहाँ उनका इलाज जारी है।
पुलिस के अनुसार, प्रशासन को स्थिति की जानकारी दे दी गई है, लेकिन वन विभाग की टीम अब भी मौके से नदारद है।

पीलीभीत में बाघ हमले: पिछले दो महीनों की काली सूची14 मई नजिरगंज हँसराज मौत
18 मई चैतीपुर राम प्रसाद मौत
25 मई खिरकिया बगरडिया लौंगश्री मौत
3 जून शांति नगर रेशमा देवी बाद में मौत
4 जून शांति नगर अज्ञात महिला मौत
9 जून मेवटपुर किसान मौत
26 जून फुलहर दो घायल, बाघिन पकड़ी गई
14 जुलाई बोरी फुलहर दयाराम मौत

इन आंकड़ों से यह साफ है कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आस-पास के गाँवों में लगातार हमले हो रहे हैं, और अब यह आकस्मिक नहीं बल्कि एक स्थायी खतरा बन चुका है।वन विभाग की तत्परता सुनिश्चित की जाए।

घायल ग्रामीणों का उच्चस्तरीय इलाज कराया जाए।

बाघ के मूवमेंट पर ट्रैकिंग उपकरण लगाए जाएँ।

गाँवों में स्थायी पशुशालाएँ और फेंसिंग बनाई जाए।

ग्रामीणों को आपातकालीन अलर्ट सिस्टम से जोड़ा जाए।

“रॉकेट पोस्ट” पत्रकार अजय देव वर्मा द्वारा इस घटना की तुरंत ग्राउंड रिपोर्टिंग ने एक बार फिर साबित किया कि स्थानीय पत्रकार ही असली ‘फील्ड वॉरियर्स’ हैं।
हम ईश्वर से कामना करते हैं कि घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिले और जिला प्रशासन व वन विभाग इन घटनाओं को हल्के में लेने की बजाय ठोस कार्यवाही करे।

पीलीभीत के ग्रामीण अब जवाब चाहते हैं—सिर्फ आश्वासन नहीं।

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