दूध, चिप्स, साबुन, तेल, टीवी, एसी, कार और बाइक सभी होंगे सस्ते – India’s crucial GST reform
India’s crucial GST reform:दूध से लेकर कार तक होंगी सस्ती! जीएसटी परिषद की बैठक से देशभर को राहत की उम्मीद
देशभर की निगाहें इस समय दिल्ली में चल रही जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक पर टिकी हुई हैं। यह बैठक 3 और 4 सितंबर को आयोजित की जा रही है और माना जा रहा है कि इसमें उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने वाले फैसले लिए जा सकते हैं। सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि रोज़मर्रा की वस्तुओं से लेकर बड़े उपभोग वाले सामानों—जैसे दूध, चिप्स, साबुन, तेल, टीवी, एसी, कार और बाइक तक—की कीमतों को घटाकर लोगों की जेब पर बोझ कम किया जाए। आने वाले त्योहारों के मौसम को देखते हुए यह बैठक और भी अहम मानी जा रही है।
India’s crucial GST reform:जीएसटी संरचना में बड़ा बदलाव
अभी तक देश में चार अलग-अलग जीएसटी स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) लागू हैं। परिषद इस ढांचे को सरल बनाते हुए सिर्फ दो मुख्य दरों में समेटने पर विचार कर रही है। प्रस्ताव है कि न्यूनतम दर 5% और मानक दर 18% हो, जबकि तंबाकू और लक्ज़री वस्तुओं जैसी महंगी या हानिकारक वस्तुओं पर 40% तक का उच्च कर लगाया जा सकता है।
India’s crucial GST reform:रोज़मर्रा की वस्तुओं पर राहत
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा रोज़मर्रा की उपयोगी वस्तुओं को सस्ता करने पर है।
साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट जैसे पर्सनल केयर उत्पादों पर वर्तमान 18% जीएसटी घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है।
खाद्य पदार्थ जैसे दाल, तेल, बटर, स्नैक्स, सूखे मेवे, जाम आदि पर 12% से घटाकर 5% या शून्य कर की संभावना है।
दूध, पनीर, रोटी और कुछ पैक्ड फूड उत्पादों को पूरी तरह जीएसटी मुक्त किए जाने की भी चर्चा है।
इससे आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़रूरतें काफी सस्ती हो सकती हैं और घरेलू बजट को बड़ी राहत मिलेगी।
India’s crucial GST reform:इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरण
टीवी (32 इंच से बड़े), एसी, वॉशिंग मशीन और रेफ्रिजरेटर जैसी वस्तुएँ अभी 28% जीएसटी स्लैब में आती हैं। इन्हें घटाकर 18% में लाने का प्रस्ताव है। यदि ऐसा हुआ तो आने वाले समय में इन सामानों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिलेगी और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं की जेब हल्की होगी।
वाहन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी
परिषद की बैठक का एक अहम एजेंडा वाहन क्षेत्र भी है।
छोटी पेट्रोल और हाइब्रिड कारें, बाइक और स्कूटर वर्तमान में 28% जीएसटी (साथ में उपकर) के दायरे में हैं। प्रस्ताव है कि इन्हें घटाकर लगभग 18% कर दिया जाए। इससे इन वाहनों की कीमतों में करीब 10% तक की कमी आ सकती है।
इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) पर पहले से ही 5% जीएसटी लागू है। अब इसे और स्पष्टता के साथ बनाए रखने तथा कीमत के आधार पर अलग व्यवस्था लाने पर भी विचार किया जा रहा है।
इन प्रस्तावों से वाहन खरीदने वालों को बड़ी राहत मिलने के साथ ही उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
बीमा और सेवा क्षेत्र
जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर फिलहाल 18% जीएसटी लागू है। बैठक में सुझाव दिया गया है कि इसे घटाकर 5% या शून्य किया जाए। यदि ऐसा हुआ तो बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम पर बोझ कम होगा और आम नागरिकों की बीमा लेने की क्षमता बढ़ेगी। हालांकि इसके तकनीकी पहलुओं पर अभी विस्तार से चर्चा बाकी है।
राज्यों की चिंता और राजस्व का सवाल
जहाँ उपभोक्ताओं के लिए यह फैसले राहत भरे हो सकते हैं, वहीं कई राज्य सरकारें राजस्व हानि की चिंता जता रही हैं। अनुमान है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर कर कटौती होती है तो राज्यों को सालाना करीब 1.5 से 2 लाख करोड़ रुपये तक की कमी झेलनी पड़ सकती है। यही कारण है कि मुआवज़े की व्यवस्था पर भी जोरदार बहस हो रही है।
बाजार और उपभोक्ताओं पर असर
बैठक से जुड़े फैसलों की आहट ने ही बाजार को उत्साहित कर दिया है। शेयर बाज़ार में एफएमसीजी, ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई। यदि परिषद दरअसल इन कटौतियों को लागू करती है तो त्योहारों के मौसम में मांग में जबरदस्त उछाल आ सकता है। इससे न केवल उपभोक्ता को राहत मिलेगी बल्कि अर्थव्यवस्था में खपत और उत्पादन दोनों को बल मिलेगा।
जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक देश की टैक्स व्यवस्था में एक ऐतिहासिक सुधार की ओर इशारा कर रही है। रोज़मर्रा के सामानों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहनों तक को सस्ता करने की तैयारी आम जनता के लिए खुशखबरी है। हालांकि राज्यों के राजस्व पर असर और मुआवज़े की व्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी। अब नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि 4 सितंबर को बैठक समाप्त होने के बाद परिषद आधिकारिक रूप से कौन-कौन से फैसले सामने लाती है।
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