Ghazipur: पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, एक की मौत – पूरे थाने पर गिरी गाज़
Ghazipur में पुलिस का तांडव
भाजपा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने दौड़ा -दौड़ा कर पीटा — एक कार्यकर्ता मौत, पूरे थाने पर गिरी गाज, एक दर्जन पुलिस कर्मी सस्पेंड और लाइन हाजिर, मुख्यमंत्री तक पहुँचा मामला
गाजीपुर जिले की उस रात ने पूरे प्रदेश को हिला दिया। अंधेरा छाते ही पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर ऐसा कहर बरपाया कि चीख-पुकार से पूरा इलाका दहल उठा। लाठीचार्ज में कई भाजपा कार्यकर्ता घायल हुए और एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। मौत की खबर के बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा मामले में थाने के कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी। मामला इतना गंभीर हो गया कि यह सीधे मुख्यमंत्री के संज्ञान तक पहुँच गया।
Ghazipur:ऐसे हुई विवाद की शुरुआत
घटना की जड़ बिजली के पोल लगाने को लेकर हुए छोटे से विवाद से जुड़ी थी। मामूली कहासुनी बढ़ती-बढ़ती तनाव में बदल गई। कार्यकर्ता थाने पहुँचे और प्रशासन से कार्रवाई की मांग करने लगे।
Ghazipur:रात का अंधेरा होते ही पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर भाजीं लाठियां
जैसे-जैसे अँधेरा होता गया , तनाव और गहराता गया। अचानक बिजली कट गई और पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया। तभी पुलिस ने मौके का फायदा उठाया और आरोप है कि शांत बैठे भाजपा कार्यकर्ताओं पर अचानक लाठीचार्ज कर उन्हें दौड़ा- दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया ।
Ghazipur:लाठीचार्ज से मची भगदड़
पुलिस की कार्रवाई इतनी तेज़ और अचानक थी कि लोग संभल भी नहीं पाए। अंधेरे और भगदड़ में कई कार्यकर्ता चोटिल हो गए। गंभीर रूप से घायल एक कार्यकर्ता की हालत इतनी बिगड़ी कि उसे अस्पताल ले जाना पड़ा।
Ghazipur:इलाज के दौरान कार्यकर्ता की अस्पताल में मौत और परिवार का दर्द
घायल कार्यकर्ता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिवार का आरोप है कि यह मौत पुलिस की बेरामी से की पिटाई का नतीजा है। उनका कहना है कि वह हिंसक झगड़े में शामिल नहीं थे, फिर भी उन्हें निशाना बनाकर पीटा गया।
Ghazipur:घटना का वीडियो वायरल होते ही जनता में फैला आक्रोश
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सवाल उठने लगे कि अंधेरे का फायदा उठाकर पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर हमला किया और यह कानून और अधिकारों का सीधा उल्लंघन है
मामला संज्ञान में आते ही प्रशासन की कार्रवाई — थाने पर गिरी गाज
मौत और आक्रोश देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए। दर्जन भर पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया और कई को लाइन हाजिर कर दिया गया। साथ ही मजिस्ट्रियल जाँच का आदेश जारी हुआ ताकि जिम्मेदारों की पहचान हो और सख्त कार्रवाई की जा सके।
Ghazipur:मुख्यमंत्री तक पहुँचा मामला
मामला इतना गंभीर था कि यह सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँचा। मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन पर और दबाव बढ़ा और जांच को तेज़ करने के निर्देश दिए गए। जनता को यह भरोसा दिलाया गया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
परिजनों और जनता की सरकार से मांग
परिवार और इलाके के लोग केवल निलंबन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होगा और उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा।
Ghazipur:आगे की संभावनाएँ
पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट मौत की असली वजह बताएगी।
मैजिस्ट्रियल जांच पूरी होते ही दोषियों पर कानूनी कार्रवाई संभव है।
अगर पुलिस के दुरुपयोग के प्रमाण मिले तो बड़े स्तर पर प्रशासनिक गाज गिर सकती है।
Ghazipur:इस घटित घटना से बड़ा संदेश
यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और जनता की सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। अंधेरे का फायदा उठाकर निर्दोषों पर डंडे चलाना लोकतंत्र और मानवता दोनों के खिलाफ है। पुलिस का काम सुरक्षा देना है, डर फैलाना नहीं।
गाजीपुर की इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। एक भाजपा कार्यकर्ता की मौत ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सबकी नज़र प्रशासन और मुख्यमंत्री की कार्रवाई पर है। परिवार और जनता की एक ही मांग है — “न्याय चाहिए, दोषियों को सजा चाहिए।”
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