Extramarital Affair: रिश्ते बनाम मोहब्बत की छीछालेदार – जब इश्क ने शर्म का लिबास उतार फेंका हो?
Extramarital Affair: रिश्ते बनाम मोहब्बत की छीछालेदार – जब इश्क ने शर्म का लिबास उतार फेंका हो. …
कुछ लोग शादी कर लेते हैं, बच्चे भी पैदा कर लेते हैं, पर दिल का GPS किसी और की गली में घूमता रहता है। फिर जब चोरी पकड़ी जाती है तो इज्ज़त बचाने के बजाय, मोहतरमा या जनाब, कभी अर्धनग्न तो कभी पूर्ण नग्न अवस्था में गली-मोहल्लों में ऐसे दौड़ लगाते हैं जैसे ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने निकले हों। मोहल्ले की औरतें खिड़कियां बंद कर लेती हैं, बच्चे अपनी आंखें ढक लेते हैं और लोग ठहाके मारते हुए कहते हैं—
“वाह! ये है असली ‘ओपन रिलेशनशिप’ का डेमो वर्ज़न!” यह लेख उन ‘बहादुर’ प्रेमियों और ‘निडर’ प्रेमिकाओं के नाम, जो अपने निजी सुख के लिए समाज की आंखों में मिर्च झोंकने का हुनर रखते हैं।
बीते कुछ दिनों में ऐसे कारनामे एक-आध नहीं, बल्कि कई सामने आए हैं। कहीं मोहतरमा प्रेमी के साथ रंगे हाथ पकड़ी गईं तो कहीं जनाब प्रेमिका के साथ पकडे गए। इन सभी घटनाओं को पढ़ने और देखने के बाद मेरे मन में एक ही सवाल उठता है—आख़िर ऐसे दृश्य समाज पर क्या असर डालते हैं?
इसी सोच के तहत, आज मैं बिंदुवार इस विषय पर रोशनी डालने जा रहा हूँ, ताकि आप भी समझ सकें कि मोहब्बत के नाम पर बेशर्मी का ये ‘रियलिटी शो’ हमारी सामाजिक सेहत को कैसे खा रहा है। लेख के बीच-बीच में, मैं आपको हाल की कुछ प्रमुख घटनाओं के लिंक भी दूंगा, जिन्हें पढ़कर आप यह बेहतर समझ पाएंगे कि मैंने यह लेख आखिर क्यों लिखा।
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Extramarital Affair: आधी रात की रंगे हाथ मोहब्बत – और गली-गली का नाच
वो महिला हो या पुरुष, जिनके सिर पर शादी का सिंदूर या उंगली में शादी की अंगूठी है, फिर भी दिल कहीं और अटक जाता है। और जब पकड़े जाते हैं, तो इज्जत का चीरहरण ऐसे होता है कि कभी आधा ढका, कभी पूरा नंगा होकर मोहल्ले की गलियों में भागते हैं। लोग हंसते हैं, वीडियो बनाते हैं, और सोशल मीडिया पर “#LoveInPublic” ट्रेंड कर जाता है।
गांव की औरतें खिड़कियां-दरवाजे बंद कर कहती हैं – “अरे, घर में बच्चों को क्या मुंह दिखाएंगे?” लेकिन तब तक तो मोहब्बत का मेला सज चुका होता है।
Extramarital Affair: बच्चे, पति/पत्नी – सबको छोड़ भागने वाले प्रेमवीर
ये वो लोग हैं, जो घर में पत्नी या पति, मां-बाप, और दो-चार बच्चे होते हुए भी “सिर्फ तन की तलब” में अपना घर-परिवार छोड़कर भाग जाते हैं। पीछे रोते बच्चे, टूटे मां-बाप, और बदनामी का बोझ ढोता जीवनसाथी… और सामने, “नई मोहब्बत” के साथ फोटो खिंचवाते ये लोग।
इनका तर्क बड़ा प्यारा होता है – “हम अपने दिल की सुन रहे हैं।” लेकिन हकीकत में, ये कई परिवारों की कब्र खोद रहे होते हैं।
प्रेम में बाधा डालने वाले जीवनसाथी का कत्ल
सबसे डरावनी किस्म – वो जाहिल दिमाग, जो सोचते हैं कि अगर पति/पत्नी उनके अवैध रिश्ते में अड़चन डाल रहा है, तो उसे मार डालो। कभी सुपारी देकर, कभी खुद हाथ से। नतीजा? एक जिंदगी मिट्टी में, और दूसरी जेल की सलाखों के पीछे सड़ती हुई।
ये न मोहब्बत है, न इंसानियत – यह तो सीधे-सीधे जानवरपन है।
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लिव-इन रिलेशन में अश्लीलता का प्रदर्शन
कानून में लिव-इन की इजाज़त है, लेकिन इन्होंने इसे बेशर्मी का सार्वजनिक नाच बना दिया। सड़क किनारे, पार्क में, होटल के बाहर – मानो मोहब्बत कोई “पब्लिक इवेंट” हो। इससे सिर्फ रिश्तों का नहीं, बल्कि समाज की बुनियादी मर्यादा का भी गला घुटता है।
रिश्तों के नाम पर कलंक – नाबालिगों के साथ संबंध
ये सबसे घटिया किस्म की हरकत है – जब कुछ महिलाएं अपने रिश्तेदारों (भांजे, भतीजे, देवर आदि) या उम्र में आधे से भी छोटे लड़कों को फंसाकर, उन्हें अपना “साथी” बना लेती हैं। फिर वीडियो वायरल कर इसे “आधुनिक मोहब्बत” बताने का ड्रामा।
असल में, यह मोहब्बत नहीं, रिश्तों का रेप है।
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शादीशुदा होकर भी गैर-जरूरी रिश्तों में फंसने वाले पुरुष
ये वो लोग हैं, जो शादीशुदा होने के बावजूद रिश्तेदार या समाज की लड़कियों को अपने “रोमांस के जाल” में फंसाकर खुद की और उनकी जिंदगी बर्बाद कर देते हैं। नतीजा – समाज में हंसी का पात्र, और परिवार में लांछन का भार।
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इन घटनाओं का समाज पर असर
ऐसी हरकतें सिर्फ दो लोगों के बीच का मामला नहीं रहतीं – यह पूरे समाज में गंदगी घोल देती हैं। बच्चों का बचपन टूट जाता है, बुजुर्ग माता-पिता का दिल जल जाता है, और आम लोग रिश्तों पर से भरोसा खो देते हैं। मोहब्बत का नाम सुनकर भी लोग शक करने लगते हैं।
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पीड़ित परिवारों की दर्दनाक हकीकत
जिन घरों में ऐसी घटनाएं होती हैं, वहां हर दिन एक जंग होती है। मोहल्ले के ताने, रिश्तेदारों की नजरें, और समाज की चुगलियां – सब मिलकर पीड़ित परिवार को तोड़ देते हैं। बच्चे स्कूल में चिढ़ाए जाते हैं, माता-पिता घर से निकलने में शर्माते हैं।
यह घाव सिर्फ दिल में नहीं, पूरी जिंदगी में रह जाता है।
क्या करना चाहिए ऐसे लोगों को?
अपनी निजी इच्छाओं को रिश्तों की मर्यादा से ऊपर न रखें।
अगर रिश्ते में दिक्कत है, तो कानूनी और सामाजिक तरीके से समाधान खोजें, भागने या मारने का नहीं।
नाबालिग या रिश्तेदारों के साथ संबंध – यह सिर्फ अनैतिक नहीं, अपराध है।
पब्लिक प्लेस में अश्लील हरकतें करना, समाज के सामने खुद की इज्जत उतारना है।
समाज की सतर्कता और जिम्मेदारी
पड़ोस और रिश्तों में ऐसे लोगों की हरकतों को अनदेखा न करें।
पीड़ित परिवार को तानों के बजाय सहारा दें।
बच्चों को रिश्तों और मर्यादा का सही मतलब सिखाएं, ताकि अगली पीढ़ी इस गंदगी में न फंसे।
मोहब्बत एक खूबसूरत अहसास है, लेकिन जब इसे हवस और बेशर्मी का नाम दे दिया जाए, तो यह सिर्फ रिश्तों की छीछालेदार बनकर रह जाती है। समाज तभी सुधरेगा, जब हम मोहब्बत और शर्म – दोनों का बराबर सम्मान करना सीखें।
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मोहब्बत, अपने असली मायनों में, इंसान के दिल का सबसे पवित्र और अनमोल अहसास है — जो त्याग, विश्वास और मर्यादा की नींव पर खड़ा होता है। यह वह रिश्ता है जो दो आत्माओं को जोड़ता है, न कि केवल दो शरीरों को। लेकिन अफसोस, जब इस मोहब्बत को हवस, बेशर्मी और स्वार्थ का रंग दे दिया जाता है, तो यह अपने असली सौंदर्य को खोकर सिर्फ रिश्तों की छीछालेदार बनकर रह जाती है। जो रिश्ता कभी जीवन को खुशियों से भर सकता था, वही रिश्ता जब वासना और धोखे में डूब जाता है, तो केवल टूटे परिवार, बर्बाद बच्चों का भविष्य और समाज में बढ़ती कड़वाहट छोड़ जाता है।
आज जरूरत है कि हम मोहब्बत और शर्म — दोनों का समान रूप से सम्मान करना सीखें। मोहब्बत को हवस से अलग पहचानें, रिश्तों को सिर्फ अपनी इच्छाओं की पूर्ति का साधन न बनाएं। रिश्तों की गरिमा बचाना सिर्फ पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है। हमें यह समझना होगा कि जो लोग अपनी निजी वासना के लिए सामाजिक मर्यादा की चादर फाड़ते हैं, वे सिर्फ खुद को नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सोच को भी दूषित कर रहे हैं।
लेखक की यह बात बिल्कुल सही है कि यदि हम इस विषय पर आंखें मूंदते रहे, तो समाज का नैतिक ढांचा धीरे-धीरे ढह जाएगा। सही मोहब्बत वह है, जिसमें वफादारी हो, इज्जत हो और त्याग हो — न कि वह, जिसमें एक रात का जोश और बाकी जिंदगी का पछतावा हो। हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को यह सिखाना होगा कि मोहब्बत में हदें भी होती हैं और वही मोहब्बत सबसे खूबसूरत है, जो इज्जत के साथ जिए और इज्जत के साथ याद की जाए।
“इश्क़ अगर हो इज़्ज़त के साथ, तो सजदा है, वरना हवस का हर रिश्ता बस तमाशा है।”