Meerut: पत्नी की हत्या कर शव के पास बैठा रहा युवक, पुलिस से कहा – डेड बॉडी उठा लीजिए

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Meerut: युवक ने पत्नी की हत्या कर दी और घंटों तक शव के पास बैठा रहा। पुलिस पहुंची तो बोला – "डेड बॉडी उठा लीजिए"। जानिए इस सनसनीखेज वारदात की पूरी कहानी।

Meerut: युवक ने पत्नी की हत्या कर दी और घंटों तक शव के पास बैठा रहा। पुलिस पहुंची तो बोला – "डेड बॉडी उठा लीजिए"। जानिए इस सनसनीखेज वारदात की पूरी कहानी।

मेरठ की एक दिल दहला देने वाली वारदात: पत्नी की चाकुओं से हत्या कर शव के पास बैठा रहा पति, खुद पुलिस को दी सूचना

मेरठ के गंगानगर थाना क्षेत्र के अमहेड़ा गांव से एक दर्दनाक और स्तब्ध कर देने वाली घटना सामने आई है। एक युवक ने अपनी गर्भवती पत्नी की चाकू से गोदकर हत्या कर दी और फिर उसी के शव के पास बैठा रहा। हत्या के बाद उसने स्वयं पुलिस को कॉल कर सूचित किया कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है। यह मामला रिश्तों में आई दरार, मानसिक अस्थिरता और भावनात्मक संतुलन के बिगड़ने की त्रासदी को उजागर करता है।

घटना का पूरा विवरण:

अमहेड़ा गांव की रहने वाली सपना (उम्र लगभग 26 वर्ष) अपने पति रविशंकर से किसी पारिवारिक विवाद के चलते अलग रह रही थी और बहन सरिता के घर रह रही थी। सपना सात महीने की गर्भवती थी। शनिवार सुबह रविशंकर ने उसे कॉल किया और मिलने की इच्छा जताई, यह कहते हुए कि उसने कोई बुरा सपना देखा है।

जब वह वहां पहुंचा, तो सरिता घर पर नहीं थी और बच्चे स्कूल जा चुके थे। घर में सपना अकेली थी। इसी मौके का फायदा उठाते हुए रविशंकर ने चाकू से सपना के चेहरे, पेट और सिर पर कई बार वार किए। खून से लथपथ सपना ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हत्या के बाद रविशंकर शव के पास बैठा रहा और फिर स्थानीय पुलिस को कॉल कर कहा,
“मैंने अपनी पत्नी को मार दिया है, आकर डेड बॉडी उठा लीजिए।”

पुलिस जांच और संभावित कारण:

घटना की सूचना मिलते ही गंगानगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोपी रविशंकर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

फिलहाल हत्या के पीछे का सही कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन प्रारंभिक जांच में पारिवारिक विवाद और आपसी तनाव की बात सामने आ रही है। पुलिस अवैध संबंध और मानसिक तनाव जैसे संभावित पहलुओं पर भी जांच कर रही है।

सामाजिक सवाल और चेतावनी:

इस घटना ने एक बार फिर से समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

क्या हम रिश्तों को संभालने में नाकाम हो रहे हैं?

क्या मानसिक असंतुलन और घरेलू कलह जानलेवा रूप ले रहे हैं?

क्यों महिलाओं की सुरक्षा, वह भी गर्भवस्था जैसे नाजुक समय में, अब भी सुनिश्चित नहीं हो पाई है?

सपना की मौत केवल एक हत्या नहीं है, यह उस सामाजिक व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह है जिसमें संवाद की जगह हिंसा ले लेती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।

घरेलू हिंसा को हल्के में न लें, समय रहते हस्तक्षेप करें।

संवाद और परामर्श परिवार को टूटने से बचा सकते हैं।

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