“मैट पर जीतने वाली दिव्या रिश्तों की जंग हार गई!” – इंस्टाग्राम पर तलाक का ऐलान
मैट पर जीतने वाली दिव्या रिश्तों की जंग हार गई! अंतरराष्ट्रीय पहलवान दिव्या काकरान ने पति से तलाक लेने का किया ऐलान। इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा- "यह मेरे जीवन का सबसे कठिन अध्याय है।" पढ़ें पूरी खबर।
जीतने की आदत अब खुद के लिए”: तलाक की घोषणा से दिव्या काकरान ने समाज को सोचने पर मजबूर किया
मैट पर जीतने वाली दिव्या रिश्तों की जंग हार गई!”अब खुद को समय दे रही हूं” – दिव्या काकरान का भावुक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल
मुज़फ्फरनगर/नोएडा।
अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान और देश का गौरव रहीं दिव्या काकरान ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने उनके प्रशंसकों और खेल जगत को हिलाकर रख दिया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपने पति से तलाक लेने की घोषणा की है। दिव्या का यह ऐलान न केवल व्यक्तिगत जीवन में एक बड़ा मोड़ है, बल्कि यह हर उस महिला की कहानी भी बन गया है, जो अपने आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता देती है।
मैट पर जीतने वाली दिव्या रिश्तों की जंग हार गई! मूल रूप से मुज़फ्फरनगर के मंसूरपुर क्षेत्र की हैं दिव्या काकरान
दिव्या काकरान का जन्म उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर जिले के मंसूरपुर थाना क्षेत्र के पुरबालियान गांव में हुआ था। एक बेहद सामान्य किसान परिवार से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के मैदान में देश का परचम लहराया। दिव्या की जड़ें ग्रामीण भारत में हैं, लेकिन उनकी उड़ान विश्वस्तरीय रही है।
मैट पर जीतने वाली दिव्या रिश्तों की जंग हार गई!2023 में हुई थी शादी, 2025 में टूटा रिश्ता
दिव्या काकरान ने वर्ष 2023 में राष्ट्रीय पावरलिफ्टर सचिन प्रताप सिंह से शादी की थी। शुरू में यह जोड़ी फिटनेस और खेल जगत की आदर्श मानी जा रही थी। लेकिन वक्त के साथ इस रिश्ते में मनमुटाव बढ़ता गया। अब आखिरकार दिव्या ने इस रिश्ते को तोड़ने का फैसला कर लिया है।
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इंस्टाग्राम पोस्ट में छलका दर्द – “यह मेरे जीवन का सबसे कठिन अध्याय है”
दिव्या ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा –
“यह मेरे जीवन का सबसे कठिन अध्याय है। मैंने बहुत कुछ सहा है लेकिन अब खुद को समय देना चाहती हूं। मैं एक नई शुरुआत की ओर बढ़ रही हूं।”
उनका यह बयान बताता है कि इस निर्णय के पीछे लंबा मानसिक संघर्ष रहा है।
नोएडा में हैं नायब तहसीलदार, लेकिन व्यक्तिगत जीवन में उथल-पुथल
जहां एक ओर दिव्या काकरान ने सरकारी सेवा में भी जगह बनाई और नोएडा में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात हैं, वहीं दूसरी ओर उनका निजी जीवन एक कठिन दौर से गुजरता रहा। दिव्या ने अपने संघर्षों से यह साबित कर दिया है कि वह हर मोर्चे पर डटकर खड़ी हैं।
फैंस और खेल प्रेमियों में फैला हैरानी और सदमा
सोशल मीडिया पर दिव्या की पोस्ट के बाद लाखों प्रशंसकों ने उनके साहस और ईमानदारी की सराहना की है। कई फैंस ने लिखा कि यह निर्णय आसान नहीं रहा होगा, लेकिन यह उनकी मजबूत और स्वतंत्र सोच को दर्शाता है।
महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं दिव्या
दिव्या काकरान आज सिर्फ एक पहलवान नहीं, बल्कि साहसी निर्णय लेने वाली महिला की प्रतीक बन चुकी हैं। उन्होंने यह दिखाया है कि महिला चाहे किसी भी क्षेत्र में हो, वह अपने आत्मसम्मान और मानसिक शांति के लिए किसी भी स्तर पर लड़ सकती है।
समाज और रिश्तों को लेकर गहरी सोच को जन्म देता है यह फैसला
दिव्या का यह कदम समाज के लिए एक बड़ा संदेश है –
“रिश्ते जब बोझ बन जाएं, तो उन्हें ढोने से बेहतर है खुद के लिए एक रास्ता चुनना।”
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