Dharmik News: देवताओं ने की थी उत्तरार्क सूर्य की महिमा, जानिए फिर दैत्यों को कर दिया था परास्त

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धार्मिक न्यूज़: पढ़िए सूर्य की आराधना करने से मिलती है माहशक्ति, एक बार जरूर करिए उपासना 

Dharmik News: बलिष्ठ दैत्यों द्वारा देवता बार-बार युद्ध में परास्त हो जाते थे। देवताओं ने दैत्यों के इस अत्याचार से सदा के लिये छुटकारा पाने के उद्देश्य से भगवान सूर्य की आराधना करने का निश्चय किया। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर सूर्यदेव प्रकट हुए। अपने सम्मुख उपस्थित  सूर्यदेव से प्रार्थना करते हुए देवताओं ने कहा- ‘प्रभो ! बलिष्ठ दैत्य कोई-न-कोई बहाना बनाकर हम पर आक्रमण कर देते हैं तथा हमें परास्त कर हमारे सब अधिकार छीन लेते हैं। हम असुरों के इस भयानक अत्याचार से मुक्ति प्राप्त करने के लिये आपकी शरण में आये हैं। आप इस कष्ट से मुक्त होने का हमें कोई उचित उपाय बतायें।

सूर्य भगवान ने दी थी सलाह 

 
भगवान सूर्य ने विचार कर अपने से उत्पन्न एक शिला उन्हें दी और कहा कि ‘तुम लोग इसे लेकर वाराणसी जाओं और विश्वकर्मा द्वारा शास्त्रों की विधि से इस शीला से मेरी मूर्ति बनवाओ। मूर्ति बनाते समय इसे तलाशने पर जो प्रस्तर खण्ड निकलेंगे, वे तुम्हारे दृढ़ अस्त्र-शस्त्र होंगे। उनसे तुम लोग दैत्यों पर विजय प्राप्त करोगे।’

वाराणसी में बना है मंदिर

 
देवताओं ने वाराणसी जाकर सूर्यदेव के निर्देशानुसार विश्वकर्मा द्वारा सुन्दर सूर्य मूर्ति का निर्माण कराया। मूर्ति तराशते समय उससे जो पत्थर के टुकड़े निकले, उनसे देवताओं के प्रभावशाली अस्त्र-शस्त्र बने। फिर देवताओं और दैत्यों का भयानक संग्राम हुआ। दैत्य भगवान सूर्य की कृपा से प्राप्त अस्त्र-शस्त्रों की मार को न सह सके और परास्त होकर इधर-उधर हो गये। मूर्ति गढ़ते समय जो गड्ढा बन गया था, उसका नाम उत्तर मानस या उत्तरार्क कुंड पड़ा। कालान्तर में एक अनाथ ब्राह्मण-कन्या ने उत्तरार्क सूर्य के समीप कठोर तपस्या की।

इस तरह से स्थापित हुआ था मंदिर 

 
एक दिन भगवान शिव-पार्वती लीला पूर्वक विचरण करते हुए वहाँ आये। दयामयी पार्वती देवी ने भगवान शंकर से कहा- ‘प्रभो ! यह ब्राह्मण-कन्या बन्धु-बान्धवों से हीन है। आप वर देकर इसे अनुग्रहीत करें।’महादेव शंकर ने उसे वर दिया और वहाँ पर सूर्य मंदिर स्थापित हुआ।

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