नग्न तस्वीरें पूरे कॉलेज ग्रुप्स में वायरल कर दी जाएंगी, जानिये Delhi University में गैंगरेप की कोशिश का सच
Delhi University में शर्मसार कर देने वाली वारदात, छात्रा को धमकाया, कपड़े फाड़े, गैंगरेप की कोशिश
नई दिल्ली। राजधानी का दिल माने जाने वाले यूनिवर्सिटी कैंपस में ऐसी दरिंदगी हुई जिसने पूरे छात्र समाज को हिला दिया है। एक मासूम छात्रा, जो सपनों के साथ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने आई थी, उस पर कुछ वहशी दरिंदों ने गैंगरेप की कोशिश की। उससे पहले उसे न्यूड फोटो भेजकर धमकाया गया, और जब उसने प्रतिरोध किया तो उसके कपड़े तक फाड़ दिए गए।
धमकी से शुरू हुआ खौफ का खेल
पीड़िता के अनुसार, घटना से पहले उसे अज्ञात नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट्स से भद्दे मैसेज, ईमेल और मॉर्फ की गई न्यूड तस्वीरें भेजी जा रही थीं। धमकी दी गई कि अगर वह एक तय जगह पर नहीं आई, तो उसकी नग्न तस्वीरें पूरे कॉलेज ग्रुप्स में वायरल कर दी जाएंगी। डर और मानसिक दबाव में उसने इन संदेशों को अनदेखा करने की कोशिश की, लेकिन यह चुप्पी ही उसके खिलाफ हथियार बन गई।
रविवार की रात बनी खौफ की रात
रविवार की रात, करीब साढ़े आठ बजे, छात्रा अपने हॉस्टल से निकली ही थी कि चार लोगों ने उसे घेर लिया। यह हमला यूनिवर्सिटी के अंदर निर्माणाधीन हिस्से में हुआ — जहां स्ट्रीट लाइट्स धुंधली थीं और आवाजें बाहर नहीं जातीं।
इन चारों ने मिलकर छात्रा को ज़मीन पर गिरा दिया, उसके कपड़े खींचे और उसे कमरे में ले जाने की कोशिश की।
छात्रा ने जोर से चिल्लाया तो एक ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया। दूसरे ने उसे धमकाया, “अगर आवाज़ निकाली तो तेरी ज़िंदगी बर्बाद कर देंगे।”
गर्भपात की गोली जबरन खिलाने की कोशिश
छात्रा ने अपने बयान में बताया कि दरिंदों में से एक ने उसके मुंह में abortion pill डालने की कोशिश की, जिसे उसने किसी तरह बाहर निकाल फेंका।
वह लगातार खुद को छुड़ाने की कोशिश करती रही और किसी तरह मौके से भाग निकली।
शर्मनाक रवैया: “तुमने खुद कपड़े फाड़े होंगे”
जब छात्रा रोती-बिलखती अपने हॉस्टल पहुंची और मदद मांगी, तो वहां मौजूद वॉर्डन और केयरटेकर ने उसे सांत्वना देने की बजाय उल्टा उस पर ही शक जताया।
कहा गया – “तुम्हारे कपड़े खुद फटे हैं, किसी ने ऐसा नहीं किया होगा।”
यह सुनकर छात्रा टूट गई। न केवल उसने अपने शरीर पर हमले के निशान दिखाए बल्कि यह भी बताया कि उसे पहले से धमकी दी जा रही थी।
फिर भी, कई घंटे तक उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई।
प्रशासन की लापरवाही पर छात्रों का फूटा गुस्सा
घटना की खबर जैसे ही फैली, कैंपस में भारी प्रदर्शन शुरू हो गया। सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने प्रशासनिक ब्लॉक का घेराव किया और “न्याय दो, दोषियों को सज़ा दो” के नारे लगाए।
छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश की, ताकि संस्थान की “छवि” न खराब हो।
छात्राओं का कहना है — “अगर पीड़िता की बात शुरू में सुनी जाती, तो इतने सबूत नष्ट नहीं होते।”
जांच और गिरफ्तारी की कवायद
पुलिस ने अब तक दर्जनों सुरक्षा गार्डों और स्टाफ से पूछताछ की है।
सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, और ईमेल ट्रैकिंग के लिए साइबर टीम सक्रिय है।
प्राथमिक जांच में पता चला है कि धमकी भरे संदेश यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर से ही भेजे गए थे, यानी हमलावर कोई बाहरी नहीं, बल्कि अंदर का ही व्यक्ति हो सकता है।
एक मां, एक बेटी की पीड़ा
पीड़िता की मां ने कहा —
“हमने सोचा था कि दिल्ली में पढ़ाई कर बेटियां तरक्की करेंगी, लेकिन यहां तो उनकी अस्मिता तक असुरक्षित है। अगर यूनिवर्सिटी ही सुरक्षित नहीं तो देश में लड़कियां कहां जाएं?”
उनके शब्द सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि हर उस माता-पिता की चिंता हैं जो अपनी बेटियों को शिक्षा के लिए घर से दूर भेजते हैं।
अब सवाल व्यवस्था से — सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी?
यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक प्रणालीगत असफलता का प्रतीक है।
कैंपस में सुरक्षा के नाम पर कैमरे लगे हैं, गार्ड तैनात हैं — फिर भी दरिंदे अंदर तक पहुंच गए।
यह सवाल उठना लाजमी है —
क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन दोषी है?
क्या सुरक्षाकर्मी मिलीभगत में हैं?
और क्या पीड़िताओं की आवाज़ सिर्फ रिपोर्ट बनकर रह जाएगी?
रॉकेट पोस्ट लाइव की अपील
इस घटना को किसी “आंतरिक मामला” कहकर दबाने की कोशिश न की जाए।
देश के हर शिक्षण संस्थान को यह समझना होगा कि लड़कियों की सुरक्षा सिर्फ कैमरों से नहीं, संवेदनशीलता से होती है।
यह समय है — दोषियों को कठोर सजा देने का, ताकि आने वाला वक़्त यह न कहें कि “हमारी यूनिवर्सिटी सुरक्षित नहीं।”