पढ़िए क्यों मनाया जाता है बुढ़वा मंगल: कहां है हनुमान चट्टी, जहां भीम का घमंड तोड़ा था हनुमानजी ने
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बुढ़वा मंगल की हार्दिक शुभकामनाओं के अवसर पर आज हम आपको एक पौराणिक कथा से परिचित कराते हैं, जो उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम से जुड़ी है। यहां एक विशेष स्थान है, जिसे *हनुमान चट्टी* कहा जाता है। यह वही जगह है जहां महाभारत काल में महाबली भीम का घमंड हनुमान जी ने तोड़ा था।
हनुमान चट्टी बद्रीनाथ मंदिर से लगभग 12 किलोमीटर और जोशीमठ से करीब 34 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हर वर्ष हजारों भक्त बद्रीनाथ यात्रा के दौरान इस पवित्र स्थल के दर्शन करते हैं।
भीम और हनुमान जी की भेंट
महाभारत के वनपर्व में वर्णन मिलता है कि वनवास काल में पांडव द्रौपदी के साथ बद्रीनाथ क्षेत्र में रह रहे थे। एक दिन द्रौपदी ने गंगा में बहते हुए *ब्रह्मकमल* का फूल देखा और भीम से कहा कि वह ऐसे और पुष्प लेकर आएं।
भीम जब ब्रह्म कमल लेने के लिए बद्रीवन की ओर बढ़े तो मार्ग में एक वृद्ध वानर लेटा हुआ मिला। उसकी पूंछ रास्ता रोक रही थी। भीम ने वानर से हटने का आग्रह किया, लेकिन वानर ने कहा कि वृद्धावस्था के कारण उसमें उठने की शक्ति नहीं है। इसलिए भीम को स्वयं पूंछ हटाने को कहा।
भीम का अहंकार टूटा
भीम ने पूरी शक्ति लगाई, किंतु वह पूंछ को हिला भी नहीं सके। तब उन्हें एहसास हुआ कि यह कोई साधारण वानर नहीं है। उन्होंने विनम्रता से प्रार्थना की कि वह अपना असली रूप दिखाएं। तभी हनुमान जी प्रकट हुए और भीम को समझाया कि शक्ति के साथ विनम्रता का होना भी आवश्यक है।
हनुमान चट्टी का धार्मिक महत्व
इस घटना की स्मृति में जिस स्थान पर भीम और हनुमान जी की भेंट हुई, वही आज *हनुमान चट्टी* कहलाता है। यह स्थान भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। बद्रीनाथ धाम की यात्रा से पहले भक्त यहां दर्शन अवश्य करते हैं।
इस प्रकार बुढ़वा मंगल पर हनुमान जी की यह कथा हमें यह सिखाती है कि बल या सामर्थ्य पर घमंड करना उचित नहीं, बल्कि विनम्रता और श्रद्धा के साथ जीवन जीना ही सच्ची भक्ति है।