Navratri Special: कानपुर में है अनोखा मंदिर: बुद्धा देवी को प्रसाद में चढ़ती हैं हरी सब्जियां, जानिए क्यों

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Navratri Special: भारत में देवी-देवताओं के मंदिरों की परंपराएं हमेशा से अलग और अद्वितीय रही हैं। कहीं भक्त दूध अर्पित करते हैं तो कहीं नारियल, कहीं मिठाई तो कहीं फल, लेकिन कानपुर के हटिया स्थित **बुद्धा देवी मंदिर** की परंपरा बिल्कुल निराली है। यहां मां को प्रसाद के रूप में मिठाई या फल नहीं, बल्कि ताजी हरी सब्जियां चढ़ाई जाती हैं। यह परंपरा न केवल भक्तों के लिए आस्था का विषय है, बल्कि मंदिर की ऐतिहासिकता से भी गहराई से जुड़ी है।

110 साल पुराना है प्राचीन मंदिर

हटिया का यह प्राचीन मंदिर लगभग **110 साल पुराना** बताया जाता है। मंदिर की देखरेख करने वाले रघुवीर माली के अनुसार, जहां यह मंदिर स्थित है, वहां पहले हरे-भरे बगीचे हुआ करते थे। उस समय उनके पूर्वज बगीचे की देखभाल करते थे। मान्यता है कि रघुवीर माली के पूर्वजों को बार-बार स्वप्न में देवी मां ने आदेश दिया कि उन्हें बगीचे से बाहर निकालो। कई दिनों तक यह सपना आता रहा और परिवार चिंतित रहने लगा।

आखिरकार, उन्होंने उस स्थान की खुदाई करने का निर्णय लिया, जिसका संकेत देवी मां ने स्वप्न में दिया था। करीब तीन दिन की गहरी खुदाई के बाद वहां से देवी मां की मूर्ति प्राप्त हुई। इस मूर्ति की स्थापना एक चबूतरे पर की गई। चूंकि यह मूर्ति बुद्धू माली को मिली थी, इसलिए माता का नाम बुद्धा देवी पड़ गया। चूंकि मूर्ति सब्जियों के बगीचे से निकली थी, इसीलिए मां को प्रसाद में सब्जियां चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।

जानिए सब्जियों का भोग लगाने की विशेष परंपरा

बुद्धा देवी को हरी सब्जियां अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। भक्त बुधवार के दिन विशेष रूप से **लौकी, बैंगन, पालक, टमाटर, गाजर, मूली** जैसी सब्जियां डलिया में भरकर लेकर आते हैं और माता को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि बुधवार को अर्जी लगाने से मां बुद्धा देवी हर भक्त की मनोकामना पूरी करती हैं।

अन्य मंदिरों से अलग, यहां पूजा-पाठ का कार्य किसी पुजारी द्वारा नहीं किया जाता, बल्कि इस परंपरा को **माली समुदाय** निभाता है। यही कारण है कि यह मंदिर अपनी विशेषता के लिए पूरे कानपुर में प्रसिद्ध है।

किसान भी आते हैं माता का आशीर्वाद लेने

इस मंदिर में न सिर्फ आम भक्त आते हैं, बल्कि आसपास के गांवों और क्षेत्रों के किसान भी बड़ी संख्या में दर्शन करने पहुंचते हैं। किसान अपनी अच्छी फसल और बेहतर पैदावार के लिए मां बुद्धा देवी से प्रार्थना करते हैं। जब उनकी मेहनत रंग लाती है और खेतों में अच्छी पैदावार होती है, तो वे माता को सब्जियां चढ़ाकर आभार व्यक्त करते हैं।

नवरात्र में होती है विशेष भीड़

साल भर मंदिर में भक्तों का आना-जाना बना रहता है, लेकिन **नवरात्र के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है**। इन दिनों भक्तगण सुबह से ही मंदिर पहुंचकर माता के दरबार में सब्जियों का प्रसाद अर्पित करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इन पावन दिनों में मां बुद्धा देवी अपने सभी भक्तों की झोली खुशियों और समृद्धि से भर देती हैं।

आस्था और परंपरा का होता है अनोखा संगम

कानपुर का बुद्धा देवी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह हमें परंपराओं की विविधता से भी परिचित कराता है। जहां अन्य मंदिरों में पूजा-पाठ का स्वरूप अलग होता है, वहीं हटिया का यह मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है। सब्जियों को प्रसाद के रूप में अर्पित करने की परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत और लोकप्रिय है, जितनी 110 साल पहले थी।

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