तीन साल की चुप्पी टूटी: बृजभूषण-योगी की गुपचुप बैठक से गरमाई यूपी की सियासत

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तीन साल की चुप्पी टूटी: बृजभूषण शरण सिंह और योगी आदित्यनाथ की गुपचुप मुलाकात से यूपी की सियासत गरमाई। क्या 2027 चुनाव की रणनीति शुरू?

तीन साल की चुप्पी टूटी: बृजभूषण शरण सिंह और योगी आदित्यनाथ की गुपचुप मुलाकात से यूपी की सियासत गरमाई। क्या 2027 चुनाव की रणनीति शुरू?

तीन साल की चुप्पी टूटी: बृजभूषण शरण सिंह की सीएम योगी से मुलाकात, तीन साल बाद टूटी सियासी खामोशी, पूर्वांचल की राजनीति में हलचल

तीन साल बाद पहली बार, लखनऊ में गर्माया माहौल

लखनऊ के सियासी गलियारों में सोमवार, 21 जुलाई 2025 की दोपहर अचानक हलचल मच गई। कारण था—पूर्व भाजपा सांसद और कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करना। यह मुलाकात मुख्यमंत्री आवास, 5 कालिदास मार्ग पर करीब 55 मिनट तक चली, और इसने उत्तर प्रदेश की राजनीति, खासकर पूर्वांचल की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी।

बृजभूषण और योगी के बीच यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि दोनों के बीच 31 महीने से कोई औपचारिक संवाद नहीं हुआ था। पिछली बार दोनों की मुलाकात दिसंबर 2022 में हुई थी, जब बृजभूषण का राजनीतिक कद घटा दिया गया था।

तीन साल की चुप्पी टूटी: राजनीतिक दूरी के बाद मेल-मिलाप का संकेत?

इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सियासी कदम है।
बृजभूषण शरण सिंह पूर्वांचल के गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और कैसरगंज जैसे क्षेत्रों में गहरी पकड़ रखते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इन क्षेत्रों में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। योगी आदित्यनाथ के लिए यह मुलाकात पार्टी में गुटबाजी रोकने और बृजभूषण के प्रभाव को सकारात्मक दिशा देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

तीन साल की चुप्पी टूटी: बृजभूषण का बयान – “योगी से मिलना जरूरी था”

मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए बृजभूषण ने कहा:

“योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए उनसे मिलना जरूरी था। मुलाकात खास थी, और मुझे उनके यहां बुलाया गया था।”

यह बयान इस बात का संकेत देता है कि मुलाकात महज संयोग नहीं, बल्कि योजनाबद्ध और संदेश देने वाली थी। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान दोनों नेताओं के बीच पूर्वांचल के राजनीतिक समीकरण और 2027 के चुनाव की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

पूर्वांचल की सियासत और भाजपा के समीकरण

बृजभूषण शरण सिंह, भले ही यौन शोषण के आरोपों और कुश्ती महासंघ विवाद के चलते विवादों में रहे हों, लेकिन उनका जनाधार और संगठनात्मक नेटवर्क आज भी मजबूत है।
भाजपा के लिए पूर्वांचल हमेशा रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र रहा है। गोंडा-बहराइच बेल्ट में बृजभूषण की पकड़ भाजपा को विपक्षी गठबंधन के खिलाफ बढ़त दिलाने में मदद कर सकती है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मुलाकात दोनों पक्षों के बीच की दूरियां पाटने और भाजपा के अंदर चल रही खींचतान को खत्म करने का प्रयास है।

क्या 2027 की तैयारी शुरू?

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है। भाजपा चाहती है कि उसके बड़े नेताओं के बीच कोई मतभेद न रहे और हर प्रभावशाली चेहरा पार्टी के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाए।
बृजभूषण शरण सिंह की वापसी या उनकी सक्रियता से भाजपा को पूर्वांचल में ओबीसी और ग्रामीण वोटबैंक पर सीधा असर मिल सकता है।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह मुलाकात “संकेत और संदेश” दोनों है—

संकेत: पार्टी में बृजभूषण की अहमियत अभी खत्म नहीं हुई।

संदेश: चुनाव से पहले हर नेता को पार्टी लाइन में रहकर काम करना होगा।

तीन साल की चुप्पी टूटी: राजनीति में नई करवट

21 जुलाई की यह मुलाकात साफ संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश की सियासत आने वाले महीनों में करवट लेने वाली है।
योगी आदित्यनाथ और बृजभूषण शरण सिंह की यह बातचीत सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरण, 2027 की रणनीति और भाजपा की एकजुटता की तरफ उठाया गया एक बड़ा कदम है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह मुलाकात बृजभूषण की सक्रिय वापसी का संकेत बनती है, या फिर यह केवल चुनावी समीकरण साधने की शुरुआत है।

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