Bihar Politics: तेजस्वी RJD विधायक दल के नेता चुने गए, लालू-राबड़ी ने बीच में बैठक छोड़ी

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Bihar Politics: तेजस्वी RJD विधायक दल के नेता बने, लेकिन लालू-राबड़ी ने बैठक बीच में छोड़कर राजनीतिक हलचल पैदा की, बिहार में सत्ता का नया मोड़।

Bihar Politics: तेजस्वी यादव RJD विधायक दल के नेता बने, लेकिन लालू-राबड़ी ने बैठक बीच में छोड़कर बिहार राजनीति में भूचाल मचा दिया

Bihar Politics राजनीति का तापमान चरम पर

पटना। बिहार की राजनीति आज उस सीमा पर पहुँच चुकी है जहाँ हर मिनट तस्वीर बदल रही है। सत्ता का संघर्ष, परिवारिक समीकरण, गठबंधन की जटिलताएँ और जनादेश की मांगें—सब एक ही मंच पर खड़े नजर आ रहे हैं। इस मंच पर जो दृश्य उभर रहे हैं, वे आने वाले वर्षों की राजनीति को पूरी तरह बदल सकते हैं।

आरजेडी का ऐतिहासिक दिन और परिवार की खामोशी

आज आरजेडी के लिए एक ऐतिहासिक दिन था। तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुना गया, और कमरे में मौजूद विधायक खुशी और उत्साह के साथ इस घोषणा का स्वागत कर रहे थे। लेकिन असली कहानी इसके तुरंत बाद सामने आई। जैसे ही प्रस्ताव पास हुआ, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी बिना कुछ कहे बैठक छोड़कर बाहर चले गए। उनके चेहरे पर उदासी और खामोशी थी, और उनके इस कदम ने साफ़ संकेत दिया कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।

नीतीश कुमार का चुपचाप निर्णायक कदम

वहीं दूसरी ओर, नीतीश कुमार ने बिना किसी शोर-शराबे के विधानसभा भंग का प्रस्ताव राज्यपाल को सौंपने का अगला कदम उठाया। राजभवन में राज्यपाल से मुलाकात के बाद उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि विधानसभा भंग की जाए और इसके बाद वे अपना इस्तीफा देंगे। इस चुपचाप और निर्णायक कदम ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी।

चुनाव परिणामों का भारी प्रभाव

243 सीटों में से एनडीए ने 202 सीटें जीत लीं, इतना बड़ा बहुमत कि किसी भी समीकरण या गठबंधन का कोई असर नहीं बचा। जनता ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे राज्य में स्थिर, मजबूत और निर्णायक सरकार चाहती है। बीजेपी ने 89, जेडीयू ने 85, एलजेपी ने 19 और अन्य छोटे गठबंधन ने 9 सीटें जीतीं।

आरजेडी के भीतर असमंजस और आंतरिक संघर्ष

आरजेडी ने सोचा था कि तेजस्वी मुख्यमंत्री बनेंगे और सरकार बनाएँगे, लेकिन लगातार हार, विधायक संख्या की कमी और नेतृत्व पर उठते सवाल पार्टी की नींव हिला रहे हैं। लालू-राबड़ी का बैठक छोड़कर बाहर जाना इसी असमंजस और आंतरिक मतभेद का प्रतीक है। यह केवल नाराज़गी नहीं बल्कि आने वाले संघर्ष की चेतावनी भी है।

विधानसभा भंग और नई सरकार की संभावनाएँ

जैसे ही विधानसभा भंग होगी, नीतीश कुमार अपना इस्तीफा देंगे और एनडीए नई सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। मुख्यमंत्री कौन होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि एनडीए पूरी तरह तैयार है और आरजेडी असमंजस में है।

बिहार एक ऐतिहासिक मोड़ पर

बिहार आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ सत्ता और परिवार दोनों ही दांव पर लगे हैं। नीतीश कुमार और एनडीए की मजबूत तैयारी के बीच आरजेडी की खामोशी और तेजस्वी यादव की चुप्पी इस राजनीतिक उठापटक को और भी नाटकीय बना रही है।

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