UP News: बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार, नरेश टिकैत की दोनों सरकारों को बड़ी चेतावनी
UP News: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने इस विषय पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर समय रहते इस पर एक्शन नहीं लिया गया, तो यह समस्या भारत में “बवंडर” खड़ा कर सकती है। टिकैत ने यह बयान बागपत जिले के दोघट क्षेत्र के बामनौली गांव में एक निजी कार्यक्रम के दौरान दिया।
भारत सरकार से कार्रवाई की मांग
नरेश टिकैत ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर भारत सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ बांग्लादेश का मामला नहीं है, इससे हिंदुस्तान में भी तनाव बढ़ सकता है। दोनों देशों की सरकारों को मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालना होगा।” टिकैत ने चेतावनी दी कि अगर यह तनाव बढ़ा, तो इसका असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ सकता है।
किसानों के मुद्दों पर भी बोले टिकैत
इस मौके पर नरेश टिकैत ने किसानों की समस्याओं को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।” टिकैत ने कहा कि देश की स्थिरता के लिए किसानों और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान करना बेहद जरूरी है।
‘दोनों देशों की जिम्मेदारी’
भाकियू अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने की जिम्मेदारी दोनों देशों की सरकारों की है। उन्होंने कहा, “भारत और बांग्लादेश को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा। यह समस्या सिर्फ धार्मिक अत्याचार की नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता की भी है।”
कार्यक्रम में शामिल हुए टिकैत
नरेश टिकैत ने यह बयान दोघट के बामनौली गांव में एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने के दौरान दिया। वहां पर उन्होंने किसानों और ग्रामीणों के साथ बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। टिकैत ने कहा कि वे किसानों की आवाज उठाने के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे और सरकार से उनका हक दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे।
तनाव को रोकने के लिए ठोस कदम जरूरी
टिकैत ने यह भी कहा कि बांग्लादेश के हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का असर भारत के समाज पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान में तनाव बढ़े, इससे पहले जरूरी है कि इस समस्या को सुलझाया जाए।” उनका यह बयान समाज में शांति और स्थिरता बनाए रखने की अपील के रूप में देखा जा रहा है।