Azam Khan Case Update: रामपुर की जेल में आजम खान की पहली रात, जानिए सत्ता से सलाखों तक की कहानी
Azam Khan Case Update: रामपुर की जेल में आजम खान की पहली रात, सत्ता से सलाखों तक की पूरी कहानी
सत्ता के बाद सलाखों का सामना
रामपुर। समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान एक बार फिर सलाखों के पीछे हैं। कभी स्टेट प्लेन में रामपुर तक विशेष ड्रॉप मिलने वाले आजम खान अब जेल की सामान्य कैदियों की तरह रात गुजार रहे हैं। सोमवार को रामपुर MP/MLA कोर्ट ने पैन कार्ड मामले में बाप-बेटे को दोषी मानते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
कोर्ट फैसले के बाद बाप-बेटे की गिरफ्तारी
जैसे ही कोर्ट ने फैसला सुनाया, पुलिस ने मौके पर ही आजम और अब्दुल्ला को हिरासत में ले लिया। दोनों को कड़ी सुरक्षा में गाड़ी से रामपुर जेल तक ले जाया गया। जेल पहुंचने पर आजम के हाथ में चश्मे का केस और दो पैकेट बिस्किट थे, जबकि अब्दुल्ला का हाथ खाली था। उनके बड़े बेटे अदीब ने पिता के कान में कुछ कहा, लेकिन मीडिया के कैमरे से यह स्पष्ट नहीं हो पाया।
जेल की पहली रात, सत्ता से साधारण कैदियों तक का बदलाव
आजम और अब्दुल्ला को रामपुर जिला कारागार के बैरक नंबर एक में रखा गया। दोनों नेताओं ने जेल में सामान्य कैदियों की तरह रात बिताई। उन्हें कोई विशेष सुविधा नहीं दी गई और रात का खाना भी जेल में ही परोसा गया। खाने में मसूर की दाल, आलू-पालक की सब्जी और रोटी शामिल थी।
समर्थकों की प्रतिक्रिया और सुनसान गलियां
आजम खान को सजा सुनाए जाने के बाद उनके समर्थक दुखी नजर आए। उनके घर की गलियां सुनसान थीं और कोई बाहर दिखाई नहीं दे रहा था। यह दृश्य इस बात का संकेत है कि आजम खान की राजनीतिक सत्ता और उनका व्यक्तिगत प्रभाव अब सीमित हो गया है।
मामला क्या है?
2017 में अखिलेश यादव सरकार में नगर विकास मंत्री रहे आजम खान पर आरोप है कि उन्होंने अपने रसूख के दम पर लखनऊ नगर निगम से अपने बेटे अब्दुल्ला का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया। उसी के आधार पर फर्जी पैन कार्ड बनाकर उसे चुनाव लड़वाया। रामपुर कोर्ट का यह फैसला उनके खिलाफ दर्ज 104 मुकदमों में से एक है। अब तक अदालत 11 मामलों में फैसला सुना चुकी है।
जेल और राजनीतिक भविष्य, अब क्या होगा?
दो महीने पहले जमानत मिलने के बाद आजम खान सीतापुर जेल से बाहर आए थे। लेकिन अब वही नेता फिर से जेल की सलाखों के पीछे हैं। यह मामला केवल पैन कार्ड या चुनावी धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि राजनीतिक सत्ता और रसूख कभी-कभी कानून के सामने भी फीके पड़ जाते हैं।
सत्ता से सलाखों तक की कहानी
आजम खान की यह कहानी सिर्फ व्यक्तिगत हार नहीं, बल्कि राजनीतिक सन्देश भी है। सत्ता का प्रभाव अब सीमित हो चुका है और कानून के कठोर कदम ने यह साफ कर दिया कि अपराध चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका सामना करना पड़ेगा। रामपुर की जेल में बिताई गई यह पहली रात आजम खान के राजनीतिक जीवन में एक नया अध्याय जोड़ गई है।
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