अयोध्या से की गई बड़ी घोषणा, तुरंत जानिए कब है धनतेरस और दीपावली का सही समय, पढ़िए शुभ मुहूर्त
धनतेरस का शुभ मुहूर्त और महत्व
आचार्य राकेश तिवारी के अनुसार धनतेरस का पर्व शनिवार, 18 अक्टूबर से प्रारंभ होगा। इस दिन त्रयोदशी तिथि दोपहर 1 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ होगी। धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी की पूजा का विशेष विधान बताया गया है। इस अवसर पर लोग नए बर्तन, सोना-चांदी या वाहन की खरीदारी शुभ मानते हैं। साथ ही, इस दिन दीपदान का विशेष महत्व होता है।
उन्होंने कहा कि धनवंतरी पूजन स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक है। इसलिए इस दिन भगवान धनवंतरी की आराधना कर घर और कार्यस्थल पर दीप प्रज्वलित करना शुभ फलदायी माना जाता है।
हनुमान जयंती 2025 का शुभ समय
दूसरा प्रमुख पर्व हनुमान जयंती, इस वर्ष रविवार, 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी। आचार्य तिवारी के अनुसार, हनुमान जी का जन्म मेष लग्न में हुआ था, इसलिए इस लग्न में पूजन को अत्यंत शुभ माना गया है। उन्होंने बताया कि मेष लग्न शाम 5:12 बजे से 6:51 बजे तक रहेगा, और इसी अवधि में भक्तों को श्री हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए।
इस समय में की गई आराधना से विशेष पुण्य लाभ प्राप्त होता है। हनुमान जी की पूजा में सिंदूर, चमेली का तेल, गुड़ और तुलसी पत्र अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है।
दीपावली की तिथि पर रहा मतभेद, पर मिला स्पष्ट उत्तर
दीपावली की तारीख को लेकर हर वर्ष की तरह इस बार भी मतभेद की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि, आचार्य राकेश तिवारी ने इस भ्रम को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि दीपावली सदैव अमावस्या तिथि को ही मनाई जाती है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 2:30 बजे से प्रारंभ होगी। इसलिए दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर को ही मनाया जाना चाहिए।
जानिए महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय
आचार्य तिवारी ने बताया कि महालक्ष्मी पूजन का सर्वोत्तम समय 20 अक्टूबर की शाम 6:51 से रात 8:48 बजे तक रहेगा। यह काल वृष लग्न में पड़ रहा है, जो स्थिर लग्न कहलाता है। स्थिर लग्न में किए गए पूजन से धन, वैभव और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
उन्होंने आगे कहा कि लक्ष्मी पूजन के समय दीपक का पूर्व दिशा की ओर जलाना, घर के मुख्य द्वार पर रंगोली और दीप सजाना अत्यंत शुभ होता है। इसके साथ ही घर के मंदिर में श्रीगणेश और महालक्ष्मी की संयुक्त पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
पढ़िए तीनों पर्वों का आध्यात्मिक संदेश
तीनों पर्वों का एक समान उद्देश्य — समृद्धि, शक्ति और सद्भाव — है। जहां धनतेरस स्वास्थ्य और संपत्ति की कामना का प्रतीक है, वहीं हनुमान जयंती शक्ति और भक्ति का संदेश देती है। दीपावली प्रकाश, ज्ञान और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
आचार्य तिवारी ने कहा कि इन पर्वों को सही मुहूर्त में श्रद्धा और शुद्धता के साथ मनाने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य का आगमन होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इन पर्वों के दौरान पर्यावरण की रक्षा और सादगी का ध्यान रखें।
अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य राकेश तिवारी ने बताया —
* धनतेरस: 18 अक्टूबर, दोपहर 1:20 बजे से त्रयोदशी प्रारंभ
* हनुमान जयंती: 19 अक्टूबर, शाम 5:12 से 6:51 मेष लग्न
* दीपावली: 20 अक्टूबर, अमावस्या तिथि दोपहर 2:30 बजे से
* महालक्ष्मी पूजन: 20 अक्टूबर, शाम 6:51 से रात 8:48 वृष लग्न
इन समयों में पूजा करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होंगे और घर में सुख-समृद्धि का वास होगा।