Agra: 11 लोग नदी में डूबे, 3 की मौत, 7 की तलाश जारी

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Agra: खैरागढ़ में दुर्गा मूर्ति विसर्जन के दौरान 11 युवक नदी में डूबे, 3 की मौत, 1 घायल, 7 की तलाश SDRF और गोताखोरों की टीम कर रही है।

Agra: खैरागढ़ ऊंटगन नदी हादसा, दुर्गा विसर्जन के दौरान 11 लोग नदी में डूबे, 3 की मौत, 7 की तलाश जारी

दिल दहला देने वाला हादसा

आगरा जिले के खैरागढ़ थाना क्षेत्र में  हुई एक भयावह दुर्घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान ऊंटगन नदी में 11 युवक अचानक तेज बहाव की चपेट में आकर डूब गए। चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच पूरा वातावरण मातम में बदल गया। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को गहरे शोक में डाल दिया, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की नींद उड़ा दी।

कैसे हुआ हादसा 

दोपहर लगभग 2 बजे प्रतिमा विसर्जन का कार्यक्रम चल रहा था। सैकड़ों लोग नदी किनारे जुटे थे। विसर्जन के बाद कुछ युवक नदी में नहाने और प्रतिमा को आगे तक ले जाने के लिए उतरे। तभी अचानक नदी का तेज बहाव उन्हें अपनी चपेट में ले गया। देखते ही देखते 11 युवक पानी की गहराई में समा गए। लोग दौड़कर बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज था कि कोई उन्हें बाहर नहीं निकाल पाया।

रेस्क्यू ऑपरेशन और अब तक की स्थिति

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आया। पुलिस बल, SDRF, PAC की टीमें और गोताखोर मौके पर पहुँचे और बचाव कार्य शुरू किया गया। राहत एवं बचाव कर्मियों ने अब तक 4 युवकों को बाहर निकाला है। इनमें से 3 को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया, जबकि एक युवक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। शेष 7 युवकों की तलाश लगातार जारी है। बचाव कार्य में आधुनिक उपकरणों और स्थानीय गोताखोरों की मदद ली जा रही है।

प्रशासनिक अमला मौके पर

हादसे की गंभीरता को देखते हुए जिले का पूरा प्रशासन सक्रिय हो गया। पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी, अपर पुलिस आयुक्त, DCP, ADM तथा क्षेत्रीय विधायक स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे। सभी अधिकारी राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं और मौके पर मौजूद टीमों को लगातार आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं।

लापरवाही पर सवाल

ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया है कि विसर्जन स्थल पर कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं थी। घाट की पक्की सीढ़ियाँ या सुरक्षा बैरिकेड्स जैसी व्यवस्थाएँ न होने से हादसा  हो गया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते एहतियाती कदम उठाए जाते तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था। कई ग्रामीणों ने प्रारंभिक समय में रेस्क्यू दल के देर से पहुँचने पर भी नाराज़गी जताई।

शोक और आक्रोश का माहौल

हादसे के बाद पीड़ित परिवारों में कोहराम मच गया। रोते-बिलखते परिजन अपने लापता बेटों और भाइयों की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। पूरे गाँव और इलाके में मातमी सन्नाटा पसरा है। कई ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ नाराज़गी भी जाहिर की और तत्काल राहत व सहायता की मांग उठाई।

ऊंटगन नदी में हुआ यह हादसा एक दर्दनाक सबक छोड़ गया है। धार्मिक आयोजनों में भीड़, सुरक्षा इंतज़ामों की कमी और प्रशासनिक लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी को जन्म दे सकती है, यह घटना उसी की चेतावनी है। अब ज़रूरी है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए सुरक्षित विसर्जन स्थलों का चयन हो, घाटों पर पर्याप्त इंतज़ाम हों और हर आयोजन में आपदा प्रबंधन दल पहले से तैनात रहें।

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