बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: 3 को जेल

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बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: नामचीन खुसरो डिग्री कॉलेज का काला सच

बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: करोड़ों रुपए हड़पने का मामला सामने आया है। सीबीगंज थाना क्षेत्र के इस कॉलेज से जुड़े घोटाले में पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विश्वनाथ शर्मा, जाकिर अली, और तारिक अली नाम के यह तीन आरोपी कॉलेज में तैनात थे और इन्होंने करीब 400 छात्रों को डी. फार्मा में दाखिला दिलाया। आरोप है कि इन छात्रों से करीब 3 करोड़ 70 लाख 94 हजार रुपये की फीस वसूली गई, लेकिन बदले में उन्हें फर्जी डिग्रियां दी गईं।

यह घोटाला न सिर्फ वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है, बल्कि सैकड़ों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाला एक बड़ा अपराध भी है। पुलिस ने खुसरो डिग्री कॉलेज के मालिक शेर अली जाफरी और उनके बेटे फिरोज अली को पहले ही जेल भेज दिया है। इस घोटाले में समाजवादी पार्टी के करीबियों के शामिल होने की भी चर्चाएं हैं। इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, और अब तक चार मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।

बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: छात्रों की मेहनत पर पानी फेरता फर्जीवाड़ा

आज के युवा दिन-रात मेहनत करके अपना भविष्य संवारने की कोशिश करते हैं। कॉलेजों में दाखिला लेने से लेकर परीक्षाओं की तैयारी करने तक, हर कदम पर वे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में खुसरो डिग्री कॉलेज जैसे संस्थानों द्वारा फर्जी डिग्रियां जारी करना उनके सपनों पर कुठाराघात है। यह न सिर्फ उनके करियर को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि समाज में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: पुलिस की कड़ी कार्रवाई और न्याय की उम्मीद

इस मामले में बरेली पुलिस की कार्रवाई को अब तक की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। एसपी सिटी बरेली, मानुष पारीख ने इस बारे में कहा, “हमारी टीम ने इस घोटाले में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आगे की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया है, और दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।”

पुलिस की इस कार्यवाही से पीड़ित छात्रों और उनके परिवारों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन उनके भविष्य को संवारने में कितना समय लगेगा, यह अभी भी सवालों के घेरे में है। जिन छात्रों ने सालों की मेहनत और लाखों रुपये इस कॉलेज में लगाए थे, उनके लिए यह घोटाला एक बड़ा आघात है।

समाज और सरकार की जिम्मेदारी

बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: ऐसे फर्जीवाड़ों से निपटने के लिए सिर्फ पुलिस या न्यायपालिका की नहीं, बल्कि समाज और सरकार की भी जिम्मेदारी है। शिक्षा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, और इसमें भ्रष्टाचार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। सरकार को ऐसे संस्थानों पर सख्त नजर रखनी होगी जो छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। वहीं, छात्रों को भी जागरूक रहना होगा और किसी भी संस्थान में दाखिला लेने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करनी होगी।

भविष्य का सवाल: क्या मिलेगा न्याय?

इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, तब तक छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ होता रहेगा। इस घोटाले से जुड़े तमाम आरोपी जेल की सलाखों के पीछे हैं, लेकिन न्याय मिलने में कितना समय लगेगा, यह देखना बाकी है।

इस घटना से सबक लेते हुए समाज को ऐसे फर्जीवाड़ों के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और छात्र इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार न हो सके।

बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: निष्कर्ष

यह मामला एक चेतावनी है कि जब तक शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी को बनाए नहीं रखा जाएगा, तब तक छात्रों के भविष्य पर खतरा मंडराता रहेगा। खुसरो डिग्री कॉलेज का यह घोटाला न केवल बरेली, बल्कि पूरे देश में शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है। छात्रों को फर्जी डिग्रियों से बचाने के लिए सरकार और प्रशासन को मिलकर कड़ी कार्रवाई करनी होगी।

बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: तीन आरोपी, सैकड़ों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
बरेली में डी. फार्मा की फर्जी डिग्री घोटाला: घटना की पुष्टि करते मानुष पारीख, एसपी सिटी बरेली

ने बताया कि “हमने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और इस घोटाले की गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। दोषियों को सख्त सजा दिलाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।”

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