VIP काफिले में भिड़ीं सांसद-विधायक की गाड़ियां, मचा हड़कंप
कुशीनगर में VIP काफिले में भिड़ीं सांसद-विधायक की गाड़ियां, मंत्री जयंत सिंह शहीद सत्यवाद सिंह को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे
कुशीनगर में बड़ा हादसा टला: मंत्री के काफिले में भिड़ीं सांसद और विधायक की गाड़ियां, शहीद को श्रद्धांजलि देने जा रहे थे नेता
घटना से मची अफरा-तफरी, लेकिन सभी नेता सुरक्षित
कुशीनगर (उत्तर प्रदेश):
जिले के पड़रौना मुख्यालय के समीप उस वक्त हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी के काफिले में शामिल सांसद और विधायक की गाड़ियां आपस में टकरा गईं। यह हादसा तब हुआ जब मंत्री हाटा तहसील के रामपुर सोहरौना गांव में शहीद सत्यवाद सिंह को श्रद्धांजलि देकर लौट रहे थे।
कैसे हुआ हादसा?
काफिले में शामिल सांसद की स्कॉर्पियो और विधायक की फॉरच्यूनर तेज रफ्तार में एक-दूसरे के नजदीक चल रही थीं। जैसे ही वाहन पड़रौना मुख्यालय के करीब पहुंचे, वहां अनियंत्रित गति और अचानक ब्रेक लगने के कारण दोनों गाड़ियां एक-दूसरे से टकरा गईं। जोरदार टक्कर से दोनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।
गनीमत रही, कोई जनहानि नहीं
सबसे राहत की बात यह रही कि टक्कर में कोई जनहानि नहीं हुई। सभी नेता एवं काफिले में शामिल लोग सुरक्षित हैं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षाकर्मी हरकत में आए और स्थिति को संभाल लिया गया।
शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे मंत्री
केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी, सांसद और विधायक का यह दौरा पूरी तरह शहीद सत्यवाद सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए था। सत्यवाद सिंह ने देश की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर किए थे, और उनके पैतृक गांव रामपुर सोहरौना में शहीद सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था। मंत्री समेत जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने गांव वालों के दिलों को गर्व से भर दिया।
काफिले की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद सुरक्षा और समन्वय व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। इतनी वीआईपी मूवमेंट के दौरान काफिले में आपसी टक्कर यह दर्शाती है कि वाहन चालकों के बीच समन्वय की कमी थी या सुरक्षा मानकों का पालन सही ढंग से नहीं हुआ।
जनता की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के काफिलों में अक्सर तेज रफ्तार और जल्दबाजी से हादसे की आशंका बनी रहती है। गनीमत रही कि इस बार बड़ा हादसा टल गया। लोग यह भी मांग कर रहे हैं कि ऐसे दौरों में आमजन की सुरक्षा और समन्वय का विशेष ध्यान रखा जाए।
इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया कि चाहे वो आम आदमी हो या जनप्रतिनिधि, सड़क सुरक्षा की अनदेखी किसी को नहीं बख्शती। शुक्र है कि इस बार कोई हानि नहीं हुई, लेकिन आने वाले समय में प्रशासन और सुरक्षा टीम को अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।