UP: नवजात शिशुओं के लिए डिब्बाबंद दूध खतरनाक, जानें नुकसान और WHO की चेतावनी
नवजात शिशुओं के लिए डिब्बाबंद दूध खतरनाक :
हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि उत्तर प्रदेश में नवजात शिशुओं के लिए डिब्बाबंद दूध गंभीर खतरा बन सकता है। यह केवल पोषण नहीं दे रहा, बल्कि बच्चों में कई स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी माता-पिता को इससे सावधान रहने की सलाह दी है।
डिब्बाबंद दूध: सेहत के लिए खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, डिब्बाबंद दूध में आवश्यक पोषण तत्व कम मात्रा में होते हैं। बच्चों को पर्याप्त कैलोरी और प्रोटीन नहीं मिल पाता, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक विकास प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके अलावा, पैकेजिंग और भंडारण के दौरान इसमें बैक्टीरिया और हानिकारक तत्व विकसित होने की संभावना भी रहती है।
नवजातों में बढ़ रहे रोग
डिब्बाबंद दूध के लगातार सेवन से नवजात शिशुओं में पेट संबंधी समस्याएं, पाचन रोग, एलर्जी और संक्रमण जैसी बीमारियां फैल रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि शिशुओं के लिए मां का दूध या चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित फॉर्मूला दूध ही सबसे सुरक्षित और पोषण युक्त विकल्प है।
WHO की चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने माता-पिता को स्पष्ट रूप से चेताया है कि नवजात शिशुओं को डिब्बाबंद दूध पर निर्भर न करें। WHO का कहना है कि यह बच्चों में पोषण की कमी और संक्रमण का कारण बन सकता है। साथ ही, बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए exclusively मां का दूध देना आवश्यक है।
विशेषज्ञों की सलाह
-
जन्म के पहले 6 महीनों तक केवल मां का दूध दें।
-
यदि मां का दूध उपलब्ध न हो तो प्रमाणित फॉर्मूला दूध का ही उपयोग करें।
-
बच्चों में किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य: नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को जोखिम में डालने वाला कोई भी उत्पाद, चाहे वह डिब्बाबंद दूध ही क्यों न हो, माता-पिता को सोच-समझकर ही देना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित और संतुलित पोषण के लिए प्राकृतिक विकल्प हमेशा सर्वोत्तम हैं।