ऑनलाइन ऑर्डर विवादों पर पढ़िए DGP की नई गाइडलाइन: अब पुलिस नहीं तो कौन करेगा शिकायतों की जांच
उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक (DGP) ने ऑनलाइन ऑर्डर और प्रोडक्ट क्वालिटी विवादों को लेकर एक नई गाइडलाइन जारी की है। अब इस तरह के मामलों में पुलिस सीधे तौर पर जांच नहीं करेगी।
DGP कार्यालय से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि ऑनलाइन खरीदारी से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण अब कंज्यूमर फोरम या कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही किया जाएगा।
यह कदम ऑनलाइन व्यापार से जुड़े बढ़ते विवादों और पुलिस पर बढ़ते अनावश्यक दबाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
जानिए क्या कहा गया है नई गाइडलाइन में
नई गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “यदि किसी उपभोक्ता को ऑनलाइन ऑर्डर किए गए सामान की क्वालिटी, डिलीवरी या भुगतान से संबंधित समस्या है, तो वह पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ग्राहक सेवा पोर्टल या कंज्यूमर फोरम से संपर्क करे। पुलिस केवल उन्हीं मामलों में कार्रवाई करेगी जहां फोरम के आदेश के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया हो।”
इससे पहले कई उपभोक्ता ऑनलाइन कंपनियों से जुड़ी छोटी शिकायतों के लिए थाने पहुंच जाते थे, जिससे पुलिसकर्मियों का समय और संसाधन दोनों व्यर्थ जा रहे थे।
अब उपभोक्ताओं को इन माध्यमों से मिलेगा समाधान
1. कंपनी की कस्टमर सर्विस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
2. कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) या वेबसाइट consumerhelpline.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
3. यदि इन माध्यमों से समाधान नहीं होता है, तो जिला उपभोक्ता फोरम में अपील करें।
4. केवल फोरम के आदेश के बाद ही पुलिस केस दर्ज करेगी।
इस प्रणाली से शिकायतों का निपटारा तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।
उद्देश्य: पुलिस पर अनावश्यक भार कम करना और उपभोक्ताओं को सही दिशा देना
DGP कार्यालय ने कहा है कि इस गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पुलिस बल का उपयोग केवल आपराधिक मामलों में ही किया जाए, न कि हर तरह के उपभोक्ता विवाद में। साथ ही, उपभोक्ताओं को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया की सही जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाना भी इस नीति का हिस्सा है।
विशेषज्ञों ने की सराहना
कानूनी विशेषज्ञों ने इस निर्णय को तर्कसंगत और समयोचित बताया है। उनका कहना है कि इससे जहां पुलिस पर कार्यभार कम होगा, वहीं उपभोक्ताओं को उचित मंच के माध्यम से न्याय मिलेगा। साथ ही, इससे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही बढ़ेगी और शिकायत निपटान प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।