Trump Tariff Rage: सोरों जी में ट्रंप की सद्बुद्धि के लिए ‘बुद्धि-शुद्धि यज्ञ’
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Trump Tariff Rage: भारत पर टैरिफ की धमकी पर तीखी वैदिक प्रतिक्रिया, सोरों जी में हुआ ट्रंप की ‘बुद्धि-शुद्धि यज्ञ’
वैश्विक राजनीति को वैदिक जवाब — भारत में अमेरिका के टैरिफ निर्णय के विरोध में उठी यज्ञ की अग्नि
Trump Tariff Rage: कासगंज जिले की ऐतिहासिक तीर्थ नगरी सोरों शूकरक्षेत्र इन दिनों वैश्विक राजनीति की चर्चा का केंद्र बन गई, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा के विरोध में यहां एक विशेष वैदिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। इस विरोध ने न सिर्फ स्थानीय नागरिकों को, बल्कि पूरे देश को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वैश्विक आर्थिक युद्ध का जवाब अब भारत अपनी सांस्कृतिक और वैदिक परंपरा से देगा?
क्या है ट्रंप का टैरिफ विवाद?
हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि यदि वे दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तो वे भारत सहित कई देशों पर 50% या उससे अधिक टैरिफ लगाने की योजना बना सकते हैं। इस प्रस्ताव का उद्देश्य अमेरिका में घरेलू उद्योगों की सुरक्षा बताई गई, लेकिन भारत जैसे देशों के लिए यह आर्थिक असमानता और अन्याय का संकेत माना जा रहा है।
सोरों जी में यज्ञ: अनोखा विरोध या आध्यात्मिक प्रतिवाद?
ट्रंप के इस बयान के विरोध में, सोरों शूकरक्षेत्र में एक “बुद्धि-शुद्धि यज्ञ” का आयोजन हुआ, जिसमें वैदिक विद्वानों, तीर्थ पुरोहितों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। आयोजन की अगुवाई आर्यव्रत संघ ने की और प्रमुख संयोजक भूपेश शर्मा और राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक पांडे ने इसे भारत के आत्मसम्मान और अर्थव्यवस्था के लिए एक नैतिक प्रतिक्रिया बताया।
संघ का बयान: “यह केवल भारत नहीं, वैश्विक संतुलन पर प्रहार है”
संघ प्रमुख भूपेश शर्मा ने इस मामले पर कहा,
“ट्रंप का यह निर्णय व्यापारिक अन्याय है। भारत की आर्थिक स्वतंत्रता और वैश्विक भूमिका को कमजोर करने की साजिश है। यह सिर्फ एक टैक्स का मामला नहीं, बल्कि हमारे आत्मगौरव पर चोट है।”
राष्ट्रीय प्रवक्ता अशोक पांडे ने कहा,
“डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह वैश्विक अर्थव्यवस्था को मनमानी से प्रभावित कर रहे हैं, वह चिंता का विषय है। यह फैसला न केवल भारत, बल्कि विश्व के व्यापारिक ताने-बाने के लिए भी शर्मनाक है।”
Trump Tariff Rage: वैदिक परंपरा से वैश्विक शांति की अपील
यज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ईश्वर से यह प्रार्थना की गई कि डोनाल्ड ट्रंप को भारत के प्रति सद्भाव और समझदारी प्राप्त हो। हवन में शामिल हुए प्रमुख नामों में उमेश पाठक, रामदास पुजारी, प्रमोद उपाध्याय, श्याम दीक्षित, सीताराम तिवारी समेत दर्जनों श्रद्धालु, व्यापारी और छात्र मौजूद रहे।
जनता की पीड़ा और संदेश: “भारत को फिर से उपनिवेश मत समझिए ट्रंप साहब”
स्थानीय जनता ने अमेरिका से अपील की कि वह भारत के साथ सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखे। भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और उसे धमकी नहीं, सम्मान की आवश्यकता है।
सोरों से उठी आवाज: वैदिक भारत अब चुप नहीं रहेगा
इस यज्ञ के माध्यम से केवल ट्रंप की आलोचना नहीं हुई, बल्कि यह भी संदेश दिया गया कि भारत अब हर प्रकार के आर्थिक दबाव और वैचारिक साम्राज्यवाद के खिलाफ खड़ा होगा। वैदिक परंपरा के माध्यम से यह शांतिपूर्ण लेकिन गूंजती हुई प्रतिक्रिया आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम है।
Trump Tariff Rage: यह यज्ञ केवल विरोध नहीं, सांस्कृतिक चेतना का संकेत है
सोरों जी में आयोजित “बुद्धि-शुद्धि यज्ञ” किसी राजनीतिक विरोध का हिस्सा मात्र नहीं था, बल्कि यह भारतीय जनमानस की उस चेतना का संकेत है जो अपने आत्मसम्मान के लिए अब हर मोर्चे पर खड़ी है — चाहे वह आर्थिक हो, कूटनीतिक हो या सांस्कृतिक। डोनाल्ड ट्रंप जैसे वैश्विक नेता यदि भारत को केवल एक व्यापारिक इकाई समझते हैं, तो उन्हें यह जानना चाहिए कि भारत आज भी अपने विचार, परंपरा और आत्मबल से दुनिया को दिशा देने की शक्ति रखता है।