तुम आ जाओ या दूसरी लड़की ला दो— सरकारी डॉक्टर की डिमांड ने हिला दिया Sultanpur का स्वास्थ्य तंत्र
Sultanpur: सरकारी अस्पताल में शालीनता की हदें पार — महिला नर्स से डॉक्टर ने की अश्वलील मांग, ऑडियो वायरल होते ही विभाग में मचा हड़कंप
सुल्तानपुर ज़िले के लंभुआ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से ऐसी घिनौनी घटना सामने आई है जिसने पूरे चिकित्सा तंत्र की गरिमा को तार-तार कर दिया है। यहाँ तैनात एक डॉक्टर ने अपनी अधीनस्थ महिला नर्स से ऐसी अशोभनीय और अपमानजनक बात कही, जिसे सुनकर हर संवेदनशील इंसान का सिर शर्म से झुक जाए।
“तुम आ जाओ या दूसरी लड़की ला दो…” — यह शब्द न सिर्फ एक महिला की अस्मिता पर हमला हैं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी कलंक हैं जो जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के नाम पर चल रही है।
घटना का पूरा सिलसिला
लंभुआ CHC में तैनात डॉक्टर अनिल कुमार और एक महिला स्वास्थ्यकर्मी के बीच की यह बातचीत अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि डॉक्टर ने अपनी सहयोगी नर्स से अभद्र भाषा में बातचीत करते हुए अशोभनीय प्रस्ताव रखा।
शुरुआत में नर्स ने इसे नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की, लेकिन जब डॉक्टर का रवैया बार-बार असहज होता गया, तो उसने हिम्मत जुटाकर शिकायत दर्ज कराई।
इस बीच, कथित बातचीत का एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हुआ जिसमें डॉक्टर की आवाज़ जैसी सुनाई देने वाली आवाज़ शर्मनाक शब्दों में महिला से अनुचित मांग करती नज़र आ रही है। यह ऑडियो सोशल मीडिया पर फैलते ही पूरे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
शिकायत के बाद हलचल
नर्स ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों को दी है। शिकायत में उसने साफ कहा है कि डॉक्टर की बातों से उसे मानसिक उत्पीड़न हुआ और कार्यस्थल पर असुरक्षित महसूस हुआ।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और प्रशासनिक स्तर पर इस घटना को ‘गंभीर अनुशासनहीनता’ और ‘यौन उत्पीड़न’ की श्रेणी में लिया गया है।
जांच टीम ने डॉक्टर और संबंधित नर्स — दोनों के बयान दर्ज किए हैं। सूत्रों के मुताबिक डॉक्टर का तबादला या निलंबन जल्द ही हो सकता है।
व्यवस्था पर बड़ा सवाल
यह सिर्फ एक डॉक्टर या एक अस्पताल का मामला नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की तस्वीर है जहाँ पद और प्रोफेशन के नाम पर शक्ति-दुरुपयोग आम होता जा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्र, जो मरीजों की सेवा और महिलाओं की सुरक्षा के प्रतीक माने जाते हैं, अब डर और असहजता के केंद्र बनते जा रहे हैं।
किसी भी महिला कर्मचारी को यह डर नहीं होना चाहिए कि उसके साथ कार्यस्थल पर अपमानजनक व्यवहार हो सकता है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि ऐसे मामले तब ही सामने आते हैं जब कोई पीड़िता अपनी नौकरी की परवाह किए बिना हिम्मत दिखाती है।
लोगों की प्रतिक्रिया
घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। कई सामाजिक संगठनों ने इस शर्मनाक प्रकरण पर डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि जब सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर ही इस तरह की हरकत करेंगे, तो आम जनता किससे न्याय की उम्मीद करे?
अब ज़रूरत कार्रवाई की, न कि लीपापोती की
यह मामला एक चेतावनी है — कि चिकित्सकीय गरिमा की रक्षा सिर्फ सफेद कोट पहनने से नहीं होती, बल्कि उस कोट के भीतर इंसान का चरित्र कैसा है, यह ज़्यादा मायने रखता है।
अगर विभाग इस मामले में उदाहरण-स्वरूप सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो यह आने वाले दिनों में और कई महिलाओं के लिए खामोशी की सज़ा बन सकता है।
लंभुआ CHC का यह मामला केवल एक महिला के सम्मान की बात नहीं, बल्कि पूरे सरकारी चिकित्सा-तंत्र की संवेदनशीलता और जवाबदेही की परीक्षा है।
डॉक्टर अनिल कुमार पर लगे आरोप यह दिखाते हैं कि जब सफ़ेद कोट में बैठे लोग ही मर्यादा तोड़ने लगें, तो समाज को आवाज़ उठानी ही होगी — वरना आने वाली पीढ़ियाँ ऐसे अस्पतालों में इलाज नहीं, डर का इंजेक्शन लेकर लौटेंगी।
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