Sonbhadra: खदान हादसा, अब तक 5 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, 3 के खिलाफ मुकदमा दर्ज
Sonbhadra: खदान हादसा अपडेट, प्रभावशाली लोगों की हिस्सेदारी और खनन सिंडिकेट का सच
सोनभद्र (ओबरा): ओबरा थाना के बिल्ली–मारकुंडी खदान हादसे ने पूरे सोनभद्र जिले को झकझोर कर रख दिया है। तीन दिन पहले यहां चट्टान धंसने से पांच मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई । हादसे के बाद अब खदान के संचालन और इसके पीछे छिपे प्रभावशाली लोगों के सिंडिकेट की हकीकत धीरे-धीरे सामने आ रही है। यह सिर्फ एक खदान हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक और खनन विभाग की बड़ी लापरवाही का प्रतीक बन गया है।
जांच में सामने आया है कि कृष्णा माइनिंग खदान केवल कागज़ों में एक नाम से संचालित थी। वास्तविकता यह है कि इस खदान के संचालन में दर्जन भर प्रभावशाली लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए थे। उन्होंने अपना पैसा लगाकर बड़े पैमाने पर खनन करवाया और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते रहे।
जानकारी के अनुसार, यह खदान जून 2016 से मई 2026 तक की लीज पर थी, और शुरुआत से ही नियमों की अवहेलना के साथ संचालित हो रही थी। कई हिस्सों पर धारा 22 के तहत प्रतिबंध लगाने के बावजूद, मिलीभगत और संरक्षण के चलते अवैध खनन लगातार जारी रहा। अब इस हादसे ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है और सवाल खड़ा कर दिया है—यह खदान कैसे और किसके संरक्षण में संचालित हो रही थी, और किसकी चुप्पी ने मजदूरों की जान ली।
रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि 45 घंटे से लगातार जारी मलबा हटाने के अभियान में अंतिम शव को भी जल्द निकाला जाएगा। हादसे के बाद खदान संचालक सहित तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
बद्रीनाथ सिंह ने कहा:
“हम पूरी गंभीरता के साथ जांच कर रहे हैं और कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बचाव कार्य अंतिम चरण में है और प्रशासन हर संभावित पहलू की तहकीकात कर रहा है।”
प्रशासन और खनन विभाग की लापरवाही उजागर
स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सोनभद्र जिले में सैकड़ों खदानें बिना किसी सुरक्षा मानक के संचालित हो रही हैं। DGMS नियमों का हवाला खदान मालिकों की ढाल बन गया है। सोनभद्र में खनन सिंडिकेट का जाल इतना गहरा है कि करोड़ों रुपये का अवैध खनन खुलेआम जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी और प्रभावशाली व्यक्तियों के सिंडिकेट का संकेत है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और खनन विभाग इस बड़े पैमाने पर चल रहे सिंडिकेट पर कार्रवाई करेगा या यह हादसा भी जल्द भूला दिया जाएगा।
आगे की जांच
प्रशासन ने तीन विशेष जांच टीमें गठित कर पूरी मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। इन टीमों का लक्ष्य है—खदान के असली संचालकों की पहचान करना, सुरक्षा मानकों की अनदेखी का विश्लेषण करना और प्रभावित अधिकारियों की भूमिका उजागर करना।
सोनभद्र का यह हादसा जनजीवन, मजदूर सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के लिए चेतावनी बन गया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि आखिर किन प्रभावशाली लोगों ने अपने संरक्षण के दम पर नियमों को ताक पर रखकर मासूमों की जान ली।
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