जानिए किस मंदिर के दर्शन से दूर होता है शनि दोष और साढ़ेसाती की छाया, पढ़िए हनुमान जी के मंदिर की अद्भुत कथा
भारत की पौराणिक परंपरा में हनुमानजी को शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना गया है। वे न केवल संकटमोचक हैं बल्कि अपने भक्तों के हर कष्ट को हरने वाले “कष्टभंजन” भी कहलाते हैं। वहीं शनिदेव न्याय के देवता माने जाते हैं, जो कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। परंतु एक समय ऐसा भी आया जब शनिदेव को हनुमान जी के चरणों में झुककर क्षमा मांगनी पड़ी — और वह भी स्त्री रूप में!
यह प्रसंग केवल आस्था नहीं, बल्कि यह संदेश भी देता है कि विनम्रता और भक्ति के आगे क्रोध व अहंकार को भी सिर झुकाना पड़ता है। आइए जानते हैं वह रोचक कथा और साथ ही दर्शन करते हैं सारंगपुर के कष्टभंजन हनुमान मंदिर के, जो शनि दोष निवारण के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
शनिदेव का प्रकोप और जनता का कष्ट
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक समय ऐसा आया जब शनिदेव का प्रकोप धरती पर अत्यधिक बढ़ गया था। उनके प्रभाव से लोगों का जीवन दुख, बीमारी और विपत्तियों से भर गया। भक्तों ने अपने रक्षक देवता *हनुमानजी* से प्रार्थना की कि वे इस संकट को दूर करें।
हनुमानजी, जो सदैव अपने भक्तों की पीड़ा हरने को तत्पर रहते हैं, उन्होंने यह प्रार्थना सुनी और शनिदेव को समझाने का निश्चय किया। किंतु जब शनिदेव ने उनकी चेतावनी को अनसुना किया, तब बजरंगबली ने उन्हें सबक सिखाने के लिए प्रस्थान किया।
शनिदेव का भय और स्त्री रूप धारण करना – पढ़िए रहस्य की कथा
जब शनिदेव को ज्ञात हुआ कि हनुमानजी उन पर क्रोधित हैं और उनके सामने आने वाले हैं, तो वे भयभीत हो गए। उन्हें यह भी पता था कि हनुमानजी बाल ब्रह्मचारी हैं और वे स्त्रियों पर हाथ नहीं उठाते। इसी कारण उन्होंने स्वयं को बचाने के लिए एक स्त्री रूप धारण कर लिया।
हनुमानजी जब उनके सामने पहुंचे, तो उन्होंने स्त्री रूप में शनिदेव को देखा और पहचान गए कि यह कोई साधारण स्त्री नहीं, बल्कि स्वयं शनिदेव हैं। इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा — “हे शनि, छल से कोई भी अपने कर्मों से नहीं बच सकता।”
जानिए क्यों शनिदेव की क्षमा याचना और वचन
हनुमान जी की तेजस्विता और भक्ति से शनिदेव का अहंकार पूर्ण रूप से समाप्त हो गया। उन्होंने अपने स्त्री रूप में ही हनुमान जी के चरणों में गिरकर क्षमा याचना की। शनिदेव ने वचन दिया कि वे हनुमानजी के भक्तों पर कभी अपनी तिरछी दृष्टि नहीं डालेंगे।
तभी से यह माना जाता है कि जो व्यक्ति हनुमानजी की उपासना करता है, उस पर शनिदेव का कोप नहीं होता। शनिदेव स्वयं उनके भक्तों की रक्षा करते हैं। यही कारण है कि शनिवार के दिन हनुमानजी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
सारंगपुर का कष्टभंजन हनुमान मंदिर – श्रद्धा और चमत्कार का है केंद्र
गुजरात के सारंगपुर में स्थित कष्टभंजन हनुमान मंदिर न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह मंदिर किसी किले की भांति विशाल और भव्य है। इसकी संरचना इतनी सुंदर है कि इसे देखने मात्र से भक्तों के मन में श्रद्धा जाग उठती है।
यहां हनुमानजी सोने के सिंहासन पर विराजमान हैं और उन्हें “महाराजाधिराज” के रूप में पूजा जाता है। उनकी प्रतिमा के चारों ओर वानर सेना की मूर्तियाँ हैं, जो अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं।
कष्टों से मुक्ति और शनि दोष का होता है अंत
ऐसा विश्वास है कि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में आकर श्रद्धा से हनुमानजी के दर्शन करता है, उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यदि किसी की कुंडली में शनि दोष या साढ़ेसाती का प्रभाव हो, तो कष्टभंजन हनुमानजी की पूजा से वह दोष भी समाप्त हो जाता है।
यहां आने वाले भक्त बताते हैं कि उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।
डिजिटल युग में भी साकार है यहां की भक्ति
मंदिर प्रबंधन ने आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए *लाइव दर्शन* की व्यवस्था की है। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर हर दिन हनुमानजी के दर्शन ऑनलाइन किए जा सकते हैं। इससे वे श्रद्धालु भी दर्शन का लाभ उठा सकते हैं जो दूर देशों में रहते हैं।
मिलता है भक्ति का यह संदेश
हनुमानजी और शनिदेव की यह कथा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि यह सिखाती है कि जब भी अहंकार या अन्याय बढ़ेगा, धर्म और भक्ति के बल से उसका अंत अवश्य होगा। हनुमानजी का आशीर्वाद हमें सदा यह प्रेरणा देता है कि विनम्रता, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलना ही सच्ची भक्ति है।