छाती पर लिखा ‘I Love Mohammad’—इत्तेफाक या साजिश? योगी सरकार के लिए नई चुनौती

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Shamli: युवक की छाती पर लिखा "I Love Mohammad" सवालों के घेरे में। मामला इत्तेफाक है या सोची-समझी साजिश? घटना से योगी सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो गयी है। 

शामली में युवक का प्रदर्शन,  छाती पर लिखा “I Love Mohammad” बरेली दंगे के बाद योगी सरकार के लिए नई चुनौती!

उत्तर प्रदेश में धार्मिक उन्माद की आग अभी बरेली में पूरी तरह थमी भी नहीं थी कि शामली से एक और सनसनीखेज घटना ने माहौल गरमा दिया है। बरेली में “आई लव मोहम्मद” लिखने को लेकर जिस तरह हिंसा भड़की थी और समाज में तनाव की स्थिति बनी थी, उसी तर्ज पर अब शामली जिले के कुडाना गांव का रहने वाला दिलशाद नामक युवक सड़कों पर उतर आया। उसने अपनी छाती पर बड़े-बड़े अक्षरों में “आई लव मोहम्मद” लिखवाया और हाथ में तिरंगा लेकर गांव और कस्बे की गलियों में घूम-घूमकर प्रदर्शन किया।

उसकी यह हरकत रील बनाकर इंस्टाग्राम पर वायरल की गई। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और प्रशासन की नींद उड़ गई।

बरेली का बवाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान

याद दिला दें कि बरेली में हाल ही में इसी मुद्दे पर भीषण विवाद हुआ था। दो पक्षों में भिड़ंत, तनाव और पथराव तक की नौबत आ गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तो वहां तक कह दिया था कि “मौलाना भूल गया कि किसका शासन है।” और सख्त लहजे में बयान देते हुए कहा था कि “ऐसा सबक सिखाएंगे कि आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।”

शामली में दिलशाद का प्रदर्शन – महज इत्तेफाक या सोची-समझी साजिश?

अब सवाल यह है कि बरेली की आग के बाद शामली में दिलशाद का यह प्रदर्शन अचानक कैसे हो गया? क्या यह सिर्फ एक युवक का व्यक्तिगत कदम है या इसके पीछे कोई बड़ी साज़िश रची जा रही है?

दिलशाद का हाथ में तिरंगा लेकर गांव और शहर के बीच घूमना, अपनी छाती पर संदेश लिखवाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करना और उसे सोशल मीडिया पर वायरल करना कहीं न कहीं सोच-समझकर उठाया गया कदम प्रतीत होता है।

प्रशासन सख्त, योगी सरकार अलर्ट

फिलहाल, शामली पुलिस और खुफिया तंत्र इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि “किसी भी हाल में जिले की शांति व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी।” पुलिस युवक की हर गतिविधि पर नजर रख रही है और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग भी तेज कर दी गई है।

योगी आदित्यनाथ सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि राज्य में अराजकता फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री का यह बयान – “ऐसा सबक सिखाएंगे कि आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी” – इस घटना के बाद और ज्यादा चर्चा में है।

जनता के मन में उठ रहे सवाल

शामली की इस घटना ने जनता के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं –

क्या यह महज धार्मिक भावनाओं का प्रदर्शन है या फिर इसके जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश?

बरेली और शामली के घटनाक्रम क्या किसी बड़ी साजिश की कड़ी हैं?

क्या कुछ तत्व सरकार की सख्ती को ललकारने की कोशिश कर रहे हैं?

योगी सरकार के लिए सीधी चुनौती

यह सच है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की छवि सख्त कानून-व्यवस्था वाली सरकार की रही है। लेकिन बरेली के बवाल के बाद अब शामली की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनौती खत्म नहीं हुई है।
दिलशाद का यह प्रदर्शन भले ही एक युवक का कदम दिखे, लेकिन इसकी गूंज राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर दूर तक जाने वाली है।

योगी सरकार ने पहले ही संकेत दे दिया है कि किसी भी अराजक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना होगा कि शामली की इस नई चुनौती पर सरकार का अगला कदम क्या होता है।

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