SCO Summit: मोदी-पुतिन-जिनपिंग एक साथ, America ki Dadagiri ka The End!

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SCO Summit में मोदी-पुतिन-जिनपिंग की एकजुटता ने America की Dadagiri को चुनौती दी। SCO-BRICS मिलकर नए World Order की दिशा तय कर रहे हैं।

SCO Summit: मोदी-पुतिन-जिनपिंग की दोस्ती और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का हालिया शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ। इस बैठक में भारत के प्रधानमंत्री, रूस के राष्ट्रपति और चीन के राष्ट्रपति की मुलाकात और उनकी आपसी दोस्ती ने यह संकेत दिया कि दुनिया अब एक नए भू-राजनीतिक संतुलन की ओर बढ़ रही है। लंबे समय तक चले पश्चिमी वर्चस्व और अमेरिकी एकाधिकार को चुनौती देने वाला यह संवाद, एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की नींव रखता हुआ प्रतीत हो रहा है।

SCO Summit:वैश्विक नेतृत्व का नया स्वरूप

बैठक में चीन के राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब दुनिया को एक नए संतुलित वैश्विक शासन मॉडल की जरूरत है। उन्होंने “आपसी सम्मान और सहयोग” को आगे बढ़ाने की अपील की और कहा कि किसी एक राष्ट्र का दबदबा विश्व को असंतुलन और अस्थिरता की ओर धकेलता है। इस संदेश में पश्चिमी देशों की “दादागीरी” को सीधी चुनौती छिपी थी।

भारत और चीन: प्रतिस्पर्धा से सहयोग की ओर

सत्र के दौरान भारत और चीन दोनों ने यह जताया कि वे एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार हैं। दोनों देशों ने “साझा विकास और सहयोग” को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। यह संदेश खास मायने रखता है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवादों और तनाव के चलते रिश्ते कठिन दौर से गुजरे थे। अब “हाथी और ड्रैगन” की साझेदारी से एशिया और पूरी दुनिया के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

SCO Summit:मोदी-पुतिन-जिनपिंग की त्रिपक्षीय दोस्ती

सम्मेलन के दौरान तीनों विश्व नेताओं का आपसी संवाद और गर्मजोशी से भरा स्वागत इस बात का संकेत था कि भारत, रूस और चीन—तीनों देश एक साझा मोर्चा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह गठजोड़ केवल आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक दक्षिण (Global South) को एकजुट कर पश्चिमी एकाधिकार के विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश है। इसने विकासशील देशों को एक नई उम्मीद दी है।

SCO Summit: SCO की बढ़ती ताकत और नई भूमिका

शुरुआत में SCO मुख्य रूप से सुरक्षा सहयोग के मंच के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब इसकी भूमिका और प्रभाव बढ़ चुका है। हालिया सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापारिक साझेदारी और अधोसंरचना विकास की दिशा में कई प्रस्ताव रखे गए। खासतौर पर “बेल्ट एंड रोड” जैसे परियोजनाओं और विकास बैंकों पर जोर दिया गया, जिसने SCO को एक व्यापक वैश्विक संगठन का रूप दे दिया है। यह अब सुरक्षा से आगे बढ़कर आर्थिक और राजनीतिक नेतृत्व का मंच बनता जा रहा है।

SCO Summit: BRICS में भारत की सोच और वैश्विक सुधार की मांग

भारत ने अपने संबोधन में यह कहा कि मानवता को केंद्र में रखकर विकास की दिशा तय की जानी चाहिए। भारत ने BRICS को एक ऐसा मंच बनाने की बात कही जहाँ न केवल आर्थिक सहयोग हो, बल्कि वैश्विक संस्थाओं में सुधार की दिशा में ठोस कदम भी उठाए जाएँ। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, विश्व व्यापार संगठन और अन्य वैश्विक संस्थाओं में दक्षिणी देशों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया। यह संकेत था कि भारत विकासशील देशों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देना चाहता है।

SCO शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया अब एक नए भू-राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रही है। मोदी-पुतिन-जिनपिंग की दोस्ती और सहयोग का यह प्रदर्शन सिर्फ एक कूटनीतिक तस्वीर नहीं, बल्कि आने वाले समय का संकेत है। यह मुलाकात दर्शाती है कि भारत, चीन और रूस जैसे महाशक्ति राष्ट्र मिलकर पश्चिमी वर्चस्व को चुनौती देने और एक संतुलित, बहुध्रुवीय और न्यायसंगत विश्व व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
भविष्य में SCO और BRICS जैसे संगठन केवल औपचारिक मंच नहीं रहेंगे, बल्कि दुनिया की नई दिशा तय करने वाले केंद्र बिंदु बनेंगे।

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